ऑस्ट्रेलियाः जहां एक ओर संसद जैसे प्रतिष्ठित मंच पर आमतौर पर गंभीर चर्चाएं और नीतिगत बहसें होती हैं, वहीं ऑस्ट्रेलिया की संसद में हाल ही में ऐसा नज़ारा देखने को मिला जिसने सदन का माहौल कुछ मिनटों के लिए एक उत्सव में बदल दिया. इस बार न कोई तीखी बहस थी, न कोई विरोध प्रदर्शन—बल्कि चर्चा का केंद्र बने एक सांसद और उनके अलग हटकर विदाई भाषण का अंदाज़.
जब सांसद ने जूते को बनाया जाम का प्याला
ऑस्ट्रेलिया के सांसद काइल मैकगिन ने अपने आखिरी संबोधन को बिल्कुल अलग तरीके से यादगार बनाने का फैसला किया. उन्होंने मंच से विदा लेते हुए ऐसा काम किया जिसकी कल्पना शायद ही किसी ने की हो. भाषण के अंत में उन्होंने अपना एक जूता उतारा, उसमें बीयर डाली और सबके सामने उसे पी भी लिया. इस हैरान कर देने वाले पल को देखकर पहले तो संसद में मौजूद सदस्य अचंभे में रह गए, लेकिन जल्द ही तालियों और ठहाकों की गूंज सुनाई देने लगी.
विदाई के मौके को बनाया अनोखा
काइल मैकगिन ने खुद बताया कि वो चाहते थे कि उनका आखिरी भाषण कुछ खास हो, कुछ ऐसा जो लंबे समय तक याद रखा जाए. उन्होंने मज़ाकिया लहजे में कहा, “मैं पहले ही बहुत बार डांट खा चुका हूं, इसलिए इससे पहले कि अध्यक्ष मुझे कुछ कहें, मैं अपना भाषण यहीं समाप्त करता हूं.” और इस मजेदार अंदाज के साथ उन्होंने अपने दो कार्यकाल की समाप्ति की घोषणा की – “Cheers!”
क्या होता है ‘शूई’?
काइल का यह कारनामा कोई नया ट्रेंड नहीं बल्कि ऑस्ट्रेलिया की एक अनोखी परंपरा है, जिसे ‘शूई’ (Shoey) कहा जाता है. इस परंपरा के तहत किसी खास मौके—जैसे जीत, विदाई या जश्न—के दौरान जूते में शराब या बीयर डालकर उसे पिया जाता है. कभी-कभी तो पीने के बाद वह जूता दोबारा पहन भी लिया जाता है. यह प्रथा जितनी अजीब लगती है, उतनी ही लोकप्रिय भी है.
सिर्फ सांसद ही नहीं, सेलिब्रिटी भी कर चुके हैं शूई
ऑस्ट्रेलिया में ‘शूई’ का चलन कोई नया नहीं है. मशहूर फॉर्मूला वन रेसर डैनियल रिकियार्डो ने इसे ग्लोबल लेवल पर पहचान दिलाई थी. इसके अलावा हॉलीवुड के कई नामचीन सितारे जैसे जिमी फॉलन, ह्यू ग्रांट, जेरार्ड बटलर और पैट्रिक स्टीवर्ट भी इस परंपरा को निभा चुके हैं.
नई मिसाल या अनौपचारिकता की हद?
हालांकि कुछ लोगों को यह मजेदार लगा, तो कुछ ने इसे एक गंभीर मंच की गरिमा के खिलाफ माना. सोशल मीडिया पर इस घटना का वीडियो जमकर वायरल हो रहा है, जहां कुछ लोग इसे 'ऑस्ट्रेलियन स्वैग' कह रहे हैं तो कुछ लोग पूछ रहे हैं—“क्या संसद में ऐसे शो होना चाहिए?”
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