बिना तख्तापलट के ही सुपर पीएम बन जाएंगे मुनीर, परमाणु बम सहित इन चीजों पर होगा पूरा कंट्रोल

Pakistan Army Control: पाकिस्तान में सिविल-सेना संतुलन को लेकर एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है. शहबाज शरीफ सरकार संविधान में 27वां संशोधन ला रही है, जिसके बाद फौज को देश के रणनीतिक, सुरक्षा और संसाधनों पर अनोखी शक्ति मिल जाएगी.

Munir become super PM without coup will have complete control over things including nuclear bomb
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Pakistan Army Control: पाकिस्तान में सिविल-सेना संतुलन को लेकर एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है. शहबाज शरीफ सरकार संविधान में 27वां संशोधन ला रही है, जिसके बाद फौज को देश के रणनीतिक, सुरक्षा और संसाधनों पर अनोखी शक्ति मिल जाएगी. इस कदम के बाद जनरल असीम मुनीर एक तरह से देश के “सुपर पीएम” बन जाएंगे, जिनके फैसलों पर कोई भी सरकार असर नहीं डाल पाएगी.

इस संशोधन के तहत फील्ड मार्शल का पद संवैधानिक रूप से स्थायी होगा. इस पद पर नियुक्त व्यक्ति तीनों सेनाओं के चीफ और आईएसआई चीफ को नियुक्‍त कर सकेगा. सरकार बदलने पर भी अपने पद पर बने रहेंगे. देश की सुरक्षा, रणनीति और संसाधनों के इस्तेमाल पर स्वतंत्र फैसले ले सकेगा. इस कदम के बाद माना जा रहा है कि 2022 से चल रहे सिविल-मिलिटरी यूनिटी मॉडल को औपचारिक संवैधानिक दर्जा मिल जाएगा.

सेना के पॉलिटिकल और कानूनी अधिकार में इजाफा

आर्मी एक्ट 1952 में संशोधन के जरिए कमांड स्ट्रक्चर बदलेगा. ‘चेयरमैन जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ कमिटी’ का पद हट सकता है. ‘वाइस चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ’ नाम से नया पद बनेगा. इसका सीधा मतलब है कि पाकिस्तान की सेना सुप्रीम संवैधानिक शक्ति बन जाएगी, और सिविलियन सरकारों की भूमिका काफी हद तक सीमित हो जाएगी.

विपक्ष और लोकतंत्र पर असर

विपक्षी दल इस संशोधन को लोकतंत्र कुचलने वाला कदम बता रहे हैं. PPP के बिलावल भुट्टो ने कहा कि पार्टी का अंतिम निर्णय वर्किंग कमिटी में तय होगा. वहीं कानूनी विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि संवैधानिक अदालत और न्यायिक स्वतंत्रता के लिए खतरा बन सकता है.

भविष्य की दिशा तय होगी

संशोधन पास होने के बाद असीम मुनीर के पास रणनीतिक और सुरक्षा मामलों में प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति के बराबर प्रभाव होगा. पाकिस्तान की सत्ता संरचना में यह कदम सेना को स्थायी और कानूनी रूप से सुप्रीम बना देगा. अब देखना यह है कि संसद में यह बिल कैसे पारित होता है और पाकिस्तान के लोकतंत्र और सत्ता संतुलन पर इसका क्या असर पड़ता है.

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