म्यांमार और बांग्लादेश में छिड़ेगा युद्ध, रोहिंग्या बनेगा कारण! अराकान आर्मी ने युनूस को दे डाली अंतिम चेतावनी

Myanmar Bangladesh Clash: म्यांमार के प्रभावशाली सशस्त्र गुट अराकान आर्मी (Arakan Army) ने हाल ही में बांग्लादेश को तीखी चेतावनी दी है, जिसमें कहा गया है कि अगर ढाका सरकार ने म्यांमार के भीतर सक्रिय रोहिंग्या उग्रवादी संगठनों को समर्थन देना नहीं रोका, तो इसका खामियाजा पूरे दक्षिण-पूर्व एशियाई क्षेत्र को भुगतना पड़ सकता है.

Myanmar Bangladesh will face war Rohingya as the culprit Arakan Army has issued warning Yunus
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Myanmar Bangladesh Clash: म्यांमार के प्रभावशाली सशस्त्र गुट अराकान आर्मी (Arakan Army) ने हाल ही में बांग्लादेश को तीखी चेतावनी दी है, जिसमें कहा गया है कि अगर ढाका सरकार ने म्यांमार के भीतर सक्रिय रोहिंग्या उग्रवादी संगठनों को समर्थन देना नहीं रोका, तो इसका खामियाजा पूरे दक्षिण-पूर्व एशियाई क्षेत्र को भुगतना पड़ सकता है.

यह चेतावनी अराकान आर्मी के राजनीतिक संगठन, यूनाइटेड लीग ऑफ अराकान (United League of Arakan - ULA) की ओर से 11 अक्टूबर को जारी एक औपचारिक प्रेस बयान में दी गई, जिसमें सीधे तौर पर बांग्लादेश की अंतरिम सरकार और सीमा सुरक्षा एजेंसी बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (BGB) पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं.

ARSA और RSO की गतिविधियों पर ULA का आक्रोश

ULA का कहना है कि बांग्लादेश सीमा के भीतर सक्रिय अराकान रोहिंग्या साल्वेशन आर्मी (ARSA) और रोहिंग्या सॉलिडैरिटी ऑर्गनाइजेशन (RSO) न केवल म्यांमार की संप्रभुता को चुनौती दे रहे हैं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए भी खतरा बनते जा रहे हैं.

बयान के अनुसार, 11 अक्टूबर को म्यांमार के रखाइन राज्य के मोंगडॉ क्षेत्र में स्थित लेक गांव के पास तीन स्थानीय नागरिकों पर अज्ञात बंदूकधारियों ने हमला किया, जिसमें एक की मौत और दो अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए. ULA ने इस हमले के लिए ARSA और RSO के उग्रवादियों को जिम्मेदार ठहराया है.

बांग्लादेश पर गंभीर आरोप, सैन्य समर्थन का दावा

ULA ने दावा किया कि बांग्लादेश की सीमा सुरक्षा एजेंसी BGB (बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश) के कुछ अधिकारी न केवल इन रोहिंग्या सशस्त्र समूहों को चिकित्सा सहायता, शरण, हथियार, और लॉजिस्टिक सपोर्ट प्रदान कर रहे हैं, बल्कि उन्हें हवाई निगरानी, रडार सिस्टम, और सैन्य खुफिया जानकारी तक मुहैया करा रहे हैं.

बयान में कहा गया, "हमारे पास प्रमाण हैं कि घायल या मारे गए उग्रवादियों को बांग्लादेशी सीमा के भीतर चिकित्सा सुविधा दी जा रही है, उन्हें सुरक्षित मार्ग प्रदान किया जा रहा है, और भोजन व हथियारों की आपूर्ति की जा रही है. यह न केवल म्यांमार के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप है, बल्कि क्षेत्रीय शांति के लिए भी गंभीर खतरा है."

बांग्लादेश को दी कड़ी चेतावनी

ULA ने स्पष्ट रूप से कहा है कि यदि बांग्लादेश सरकार ने इन तत्वों पर तुरंत अंकुश नहीं लगाया, तो यह सीमा क्षेत्र में सैन्य टकराव की स्थिति पैदा कर सकता है. संगठन ने बांग्लादेश से उन अधिकारियों और संस्थाओं की तत्काल पहचान और कार्रवाई की मांग की है जो किसी भी रूप में रोहिंग्या उग्रवादियों को समर्थन दे रहे हैं.

ULA ने चेताया, "अगर बांग्लादेश ने ARSA और RSO की गतिविधियों को नियंत्रित नहीं किया, तो यह न सिर्फ सीमा पर टकराव बढ़ाएगा, बल्कि पूरे ASEAN क्षेत्र की स्थिरता पर प्रतिकूल प्रभाव डालेगा."

मोहम्मद यूनुस और बांग्लादेश की अंतरिम सरकार पर इशारों में निशाना

हालांकि ULA ने प्रत्यक्ष रूप से बांग्लादेश के कार्यवाहक प्रधानमंत्री या सरकार का नाम नहीं लिया, लेकिन उन्होंने बांग्लादेश के "शासन तंत्र में मौजूद तत्वों" को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया. बयान में कहा गया, "हम अंतरिम सरकार से आग्रह करते हैं कि वे तत्काल स्थिति की समीक्षा करें और उन सभी व्यक्तियों और संस्थानों की जिम्मेदारी तय करें जो म्यांमार में हिंसा फैलाने वाले समूहों को सहायता दे रहे हैं."

रखाइन राज्य में अराकान आर्मी का बढ़ता प्रभाव

गौरतलब है कि म्यांमार में जारी गृहयुद्ध के बीच अराकान आर्मी ने सेना को पीछे धकेलते हुए म्यांमार के पश्चिमी प्रांत रखाइन (Rakhine) के कई हिस्सों पर नियंत्रण स्थापित कर लिया है. यह क्षेत्र लंबे समय से रोहिंग्या संकट का केंद्र रहा है, जहां से लाखों की संख्या में रोहिंग्या मुस्लिम शरणार्थी बांग्लादेश में शरण ले चुके हैं. हाल के महीनों में, कई रिपोर्टों के अनुसार, बांग्लादेश से सटे क्षेत्रों में स्थित रोहिंग्या शरणार्थी शिविरों से कुछ युवाओं की उग्रवादी गुटों में भर्ती की भी खबरें आई हैं.

बाहरी समर्थन का भी आरोप

ULA ने दावा किया कि जो हथियार और सैन्य उपकरण ARSA और RSO के पास से बरामद हुए हैं, वे बाहरी स्रोतों से प्राप्त किए गए प्रतीत होते हैं. बयान में यह भी कहा गया कि म्यांमार की सेना के कुछ भ्रष्ट अधिकारी भी इन हथियारों की आपूर्ति में शामिल हो सकते हैं, लेकिन प्राथमिक चिंता बांग्लादेश से हो रही कथित सहायता को लेकर है.

ASEAN क्षेत्र की स्थिरता पर खतरा

ULA ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि रोहिंग्या गुटों की हिंसक गतिविधियों पर जल्द लगाम नहीं लगाई गई, तो यह केवल म्यांमार और बांग्लादेश के लिए नहीं, बल्कि पूरे दक्षिण-पूर्व एशिया (ASEAN) के लिए सुरक्षा संकट बन सकता है.

उन्होंने कहा, "बांग्लादेश सरकार को समझना होगा कि रोहिंग्या उग्रवादियों का संरक्षण एक अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा संकट को जन्म दे सकता है. यह केवल सीमावर्ती संघर्ष नहीं, बल्कि रणनीतिक अस्थिरता का केंद्र बन सकता है."

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