Mars Life Discovery: अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में हमेशा से एक बड़ा सवाल बना रहा है क्या हम पृथ्वी के बाहर भी कहीं जीवन मौजूद है? इस सवाल का जवाब खोजने की दिशा में बुधवार को नासा ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है. अमेरिकी स्पेस एजेंसी के मंगल रोवर पर्सिवरेंस ने लाल ग्रह की सतह पर ऐसी चट्टान से “संभावित बायोसिग्नेचर” यानी जीवन के संकेत खोजे हैं, जिसने वैज्ञानिकों को उत्साहित कर दिया है.
चेयावा फॉल्स: मंगल की जीवन संभावनाओं की कहानी
पर्सिवरेंस रोवर ने 2024 में चेयावा फॉल्स नामक चट्टान का अध्ययन किया. इस चट्टान में मिट्टी, सिल्ट, ऑर्गेनिक कार्बन, सल्फर, फॉस्फोरस और ऑक्सीकृत आयरन जैसे तत्व पाए गए, जो पृथ्वी पर प्राचीन सूक्ष्मजीवों के अस्तित्व के प्रमाण माने जाते हैं. नासा ने बताया कि इन तत्वों का संयोजन इलेक्ट्रॉन-ट्रांसफर रिएक्शन जैसा है, जो जीवित जीवों में ऊर्जा उत्पादन के लिए जरूरी होता है. हालांकि, वैज्ञानिकों ने यह भी कहा कि यह संरचना गैर-जीववैज्ञानिक कारणों से भी हो सकती है, इसलिए अभी पूरे प्रमाण की प्रतीक्षा है.
नासा का बड़ा मिशन: मंगल से धरती तक जीवन की खोज
नासा के कार्यवाहक प्रशासक सीन डफी ने इस खोज को मंगल ग्रह पर जीवन की सबसे करीबी उपलब्धि बताया. पर्सिवरेंस अब तक 30 से अधिक नमूने इकट्ठा कर चुका है, जिन्हें भविष्य में धरती पर लाकर जांचा जाएगा. यह ‘मार्स सैंपल रिटर्न’ (MSR) मिशन अभी कई तकनीकी और वित्तीय चुनौतियों का सामना कर रहा है, और इसकी संभावित सफलता वैज्ञानिकों के लिए एक बड़ा सवाल बनी हुई है.
मंगल से नमूने लाना: बड़ी तकनीकी चुनौती
MSR मिशन की शुरुआत से ही कई देरी और विवाद हुए हैं. प्रारंभिक योजना के मुताबिक 2033 तक नमूने धरती पर लाने थे, लेकिन बजट की बढ़ोतरी और तकनीकी जटिलताओं के कारण यह लक्ष्य अब 2040 तक स्थगित हो चुका है. नासा ने अब नई योजना बनाई है जिसमें या तो खुद लैंडर भेजा जाएगा या फिर किसी निजी कंपनी की मदद ली जाएगी. हालांकि, बजट कटौती के कारण इस मिशन की राह और मुश्किल हो गई है.
क्या मंगल पर इंसानी बस्ती संभव?
अगर मंगल से लाए गए नमूनों में जीवन के प्रमाण मिलते हैं, तो यह साबित होगा कि ब्रह्मांड में जीवन केवल पृथ्वी तक सीमित नहीं है. इससे यह सवाल भी उठेगा कि क्या भविष्य में इंसान लाल ग्रह पर रह सकता है? वर्तमान में मंगल का वातावरण बेहद पतला, तापमान सर्द और ऑक्सीजन की कमी वाला है, लेकिन जीवन के संकेत इस ग्रह के प्राचीन समय में धरती जैसा माहौल होने की संभावना जताते हैं. यही वजह है कि वैज्ञानिक अब मंगल पर मानव बस्ती बसाने के सपने को ज्यादा यथार्थवादी मानने लगे हैं.
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