सरेंडर के लिए तैयार नक्सली, सरकार से एंटी-माओवादी ऑपरेशन रोकने की अपील, कब तक खत्म होगा नक्सलवाद?

देश के नक्सल-प्रभावित क्षेत्रों में पिछले कुछ वर्षों से सुरक्षा बलों ने लगातार दबाव बनाते हुए कई बड़े ऑपरेशन चलाए हैं. इन अभियानों की वजह से माओवादी संगठनों के अंदर गहरी बेचैनी और असुरक्षा का माहौल देखा जा रहा है.

Naxalites appeal to the government to stop anti-Maoist operation
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देश के नक्सल-प्रभावित क्षेत्रों में पिछले कुछ वर्षों से सुरक्षा बलों ने लगातार दबाव बनाते हुए कई बड़े ऑपरेशन चलाए हैं. इन अभियानों की वजह से माओवादी संगठनों के अंदर गहरी बेचैनी और असुरक्षा का माहौल देखा जा रहा है. कई राज्यों में दर्जनों नहीं, बल्कि सैकड़ों नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा से जुड़ने का रास्ता अपनाया है.

सबसे बड़ा झटका तब लगा जब सुरक्षा बलों ने हाल ही में आंध्र प्रदेश के जंगलों में शीर्ष कमांडर हिडमा को ढेर कर दिया.हिडमा को माओवादी संगठन का सैन्य मुखिया और सबसे खतरनाक रणनीतिकार माना जाता था. सरकार ने कई बार साफ संदेश दिया है कि अब नक्सलियों के पास सिर्फ दो ही रास्ते हैं- सरेंडर करें या कड़ी कार्रवाई झेलें.

इसी माहौल के बीच प्रतिबंधित संगठन कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (माओवादी) की महाराष्ट्र–मध्य प्रदेश–छत्तीसगढ़ (MMC) स्पेशल जोनल कमेटी ने कथित तौर पर एक महत्वपूर्ण पत्र तीनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों को भेजा है. इस पत्र में उन्होंने 15 फरवरी 2026 तक हथियार डालने की इच्छा जताई है, लेकिन साथ ही सरकार से सुरक्षा अभियानों पर अस्थायी रोक लगाने का आग्रह किया है.

मुख्यमंत्रियों को भेजे गए पत्र में क्या कहा गया?

माओवादी संगठन द्वारा भेजे गए पत्र को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साईं तथा प्रदेश के गृहमंत्री विजय शर्मा को संबोधित किया गया है. इसमें MMC स्पेशल जोनल कमेटी ने लिखा है कि वे भी हथियार छोड़कर सरकार की पुनर्वास एवं पुनर्मिलन (Rehabilitation & Reintegration) नीति को स्वीकार करना चाहते हैं.

हालांकि, वे सरकार से थोड़ा समय चाहते हैं. उनका कहना है कि उनकी पार्टी डेमोक्रेटिक सेंट्रलिज़्म के सिद्धांतों पर चलती है, इसलिए सामूहिक रूप से निर्णय लेने में कुछ वक्त लगेगा. यानी संगठन की अंदरूनी प्रक्रिया के अनुसार हथियार डालने का फैसला सभी स्तरों पर संवाद के बाद ही संभव है.

पत्र की एक अहम बात यह है कि माओवादी प्रवक्ता "अनंत" के नाम से जारी इस दस्तावेज़ में संगठन ने अपने सशस्त्र अभियानों को रोकने की पेशकश भी की है.

उनका कहना है कि वे 15 फरवरी 2026 तक का समय चाहते हैं. यह समय सीमा सरकार द्वारा तय की गई 31 मार्च 2026 की नक्सलवाद समाप्त करने की डेडलाइन के भीतर है. इस अवधि में वे अपनी गतिविधियाँ रोक देंगे. बदले में वे सरकार से सुरक्षा बलों के कॉम्बिंग ऑपरेशंस रोकने और "संयम रखने" की अपील कर रहे हैं.

सरकार की प्रतिक्रिया: 'समय नहीं है, ठोस प्रस्ताव दें'

माओवादी संगठन के पत्र पर प्रतिक्रिया देते हुए छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री और गृहमंत्री विजय शर्मा ने साफ कहा कि नक्सलियों को सिर्फ पत्र भेजने से काम नहीं चलने वाला, उन्हें ठोस प्रस्ताव रखना होगा.

उन्होंने पत्र में मांगी गई समय-सीमा पर भी सवाल उठाए. शर्मा ने कहा, “मैंने पत्र भी देखा है और ऑडियो भी सुना है. वे 15 फरवरी की तारीख बता रहे हैं, लेकिन इतना लंबा समय लेने की जरूरत नहीं. सरकार के पास भी इतना इंतज़ार करने का समय नहीं है. उन्हें स्पष्ट और ठोस प्रस्ताव देना चाहिए.”

सरकारी रुख स्पष्ट करता है कि राज्य किसी तरह की लंबी मोहलत या सुरक्षा बलों की कार्रवाई में कमी का कोई वादा करने के मूड में नहीं है. सरकार का जोर इस बात पर है कि यदि माओवादी आत्मसमर्पण करना चाहते हैं तो तुरंत करें, न कि लंबी समय-सीमा की मांग रखें.

क्या 2026 तक नक्सलवाद खत्म होने की राह पर?

सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि बीते कुछ वर्षों में नक्सलवाद अपनी सबसे कमजोर स्थिति में पहुंच गया है.

  • प्रमुख नेताओं का सफाया
  • संगठन के अंदर भ्रम और विभाजन
  • लगातार आत्मसमर्पण
  • मजबूत खुफिया नेटवर्क
  • सड़क, संचार और विकास कार्यों का विस्तार

ने माओवाद की जड़ों को धीरे-धीरे कमजोर किया है.

सरकार ने संकेत दिया है कि 31 मार्च 2026 वह समय-सीमा है जिसके भीतर केंद्र और राज्य सरकारें नक्सलवाद को निर्णायक रूप से समाप्त करना चाहती हैं.

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