NCERT के नए मॉड्यूल जारी, इसमें भारत विभाजन के लिए कांग्रेस, जिन्‍ना और माउंटबेटन को बताया गया दोषी

राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने कक्षा 6 से 12 तक के छात्रों के लिए दो विशेष शिक्षण मॉड्यूल जारी किए हैं.

NCERT new content on partition of India
प्रतिकात्मक तस्वीर/ FreePik

नई दिल्ली: राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने कक्षा 6 से 12 तक के छात्रों के लिए दो विशेष शिक्षण मॉड्यूल जारी किए हैं. ये मॉड्यूल भारत के विभाजन की ऐतिहासिक घटनाओं को एक नई व्याख्या के साथ प्रस्तुत करते हैं. हालांकि यह सामग्री नियमित पाठ्यपुस्तकों का हिस्सा नहीं है, लेकिन इसे सप्लीमेंट्री (पूरक) शैक्षणिक संसाधन के तौर पर छात्रों को पढ़ाया जाएगा.

किसे ठहराया गया विभाजन का जिम्मेदार?

इन मॉड्यूल्स में यह स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि भारत के विभाजन के लिए तीन प्रमुख पक्ष- मोहम्मद अली जिन्ना, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस, और ब्रिटिश राज के अंतिम वायसरॉय लॉर्ड माउंटबेटन जिम्मेदार थे.

जिन्ना पर पाकिस्तान की मांग को उभारने और सांप्रदायिकता की राजनीति को बढ़ावा देने का आरोप लगाया गया है.

कांग्रेस पार्टी पर विभाजन की मांग को स्वीकार कर लेने का आरोप है, जिससे विभाजन की प्रक्रिया को वैधता मिली.

माउंटबेटन को इस पूरे राजनीतिक घटनाक्रम को तेजी से लागू करने और बंटवारे की अव्यवस्थित योजना के लिए जिम्मेदार ठहराया गया है.

यह जानकारी "विभाजन के दोषी" नामक शीर्षक के अंतर्गत प्रस्तुत की गई है.

नेहरू का दृष्टिकोण भी शामिल

इस मॉड्यूल में भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के एक ऐतिहासिक भाषण का अंश भी सम्मिलित है. इस भाषण में नेहरू ने कहा था, "हम एक ऐसी स्थिति पर आ गए हैं जहां हमें या तो विभाजन को स्वीकार करना होगा या निरंतर संघर्ष और अराजकता का सामना करना होगा."

इस कथन से यह झलकता है कि नेहरू के नेतृत्व में कांग्रेस ने विभाजन को अनिवार्य राजनीतिक समाधान के रूप में स्वीकार किया.

विभाजन का असर: सामाजिक और आर्थिक परिणाम

NCERT के इस विशेष मॉड्यूल में 1947 से 1950 के बीच घटित घटनाओं का गंभीर विश्लेषण किया गया है. यह स्पष्ट किया गया है कि विभाजन केवल एक भूगोलिक घटना नहीं थी, बल्कि इसके गहरे सामाजिक और आर्थिक प्रभाव पड़े:

  • सांप्रदायिक हिंसा, सामूहिक हत्याएं, और बड़ी संख्या में लोगों का पलायन हुआ.
  • पंजाब और बंगाल जैसे सीमावर्ती राज्यों की अर्थव्यवस्थाएं बुरी तरह प्रभावित हुईं.

जम्मू और कश्मीर जैसे क्षेत्रों में सामाजिक और जनसांख्यिकीय असंतुलन उत्पन्न हुआ, जिससे यह क्षेत्र आने वाले वर्षों में आतंकवाद और संघर्ष की चपेट में आ गया.

आधुनिक सन्दर्भ: प्रधानमंत्री मोदी का संदेश

मॉड्यूल की प्रस्तावना में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शब्दों को भी स्थान दिया गया है. प्रधानमंत्री ने विभाजन की विभीषिका को याद करते हुए कहा, "बंटवारे के दर्द को कभी भुलाया नहीं जा सकता. हमारी लाखों बहनें और भाई विस्थापित हो गए और लोगों की नासमझी और नफरती हिंसा के कारण कई जानें गईं. संघर्षों और बलिदान की याद में हमारे लोग 14 अगस्त को 'विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस' के रूप में मनाएंगे."

इस संदेश के माध्यम से छात्रों को विभाजन से जुड़ी भावनात्मक और ऐतिहासिक पीड़ा से जोड़ने की कोशिश की गई है.

शिक्षण का तरीका: पोस्टर, वाद-विवाद और चर्चाएं

यह मॉड्यूल्स नियमित पाठ्यक्रम का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि विशेष विषयों को छात्रों तक पहुँचाने के लिए विकसित किए गए सप्लीमेंट्री मटेरियल हैं. इन्हें पोस्टर प्रदर्शनी, चर्चाओं, वाद-विवाद, और इंटरएक्टिव सत्रों के माध्यम से कक्षा में पढ़ाया जाएगा.

इसका उद्देश्य छात्रों को इतिहास की घटनाओं के बारे में केवल तथ्य नहीं, बल्कि उनकी प्रासंगिकता, प्रभाव, और सीख को समझने में मदद करना है.

इतिहास की पुनर्व्याख्या: मुगल पर भी नया दृष्टिकोण

NCERT द्वारा हाल ही में कक्षा 8 की सामाजिक विज्ञान की पाठ्यपुस्तकों में भी बड़े बदलाव किए गए हैं. अब मुगल शासकों के धार्मिक नीतियों, सांस्कृतिक योगदान, और साथ ही साथ उनकी क्रूरता और मंदिरों के विध्वंस जैसे पहलुओं को भी समाविष्ट किया गया है.

पुस्तक में मथुरा, बनारस और सोमनाथ जैसे पवित्र स्थलों पर मंदिरों को तोड़ने, और जैन, सिख, सूफी तथा पारसी समुदायों पर अत्याचार का भी उल्लेख है. ये पाठ्यक्रम 2025-26 शैक्षणिक सत्र से स्कूलों में लागू होंगे.

NCERT की सफाई: इतिहास को छुपाना समाधान नहीं

NCERT के एक वरिष्ठ अधिकारी ने स्पष्ट किया, "इतिहास की घटनाओं को न तो नकारा जा सकता है और न ही मिटाया. यह समझना ज़रूरी है कि सत्ता की लालसा, अत्याचार और गलत महत्वाकांक्षाएं किस तरह समाज को विभाजित करती हैं. यदि हम इन घटनाओं की जड़ तक नहीं पहुँचते, तो उनके दोहराए जाने की आशंका बनी रहती है."

इस दृष्टिकोण के पीछे यह भावना है कि छात्रों को एक संतुलित, वस्तुनिष्ठ और यथार्थपरक इतिहास पढ़ाया जाए जिससे वे सिर्फ अतीत को जानें नहीं, बल्कि भविष्य के लिए भी सीख सकें.

ये भी पढ़ें- ऑपरेशन सिंदूर के घाव से अब तक नहीं उबर पाया पाकिस्तान, फाइटर जेट और एयरबेस के बाद लाशें गिन रही सेना