नई दिल्ली: भारत की राजनीति में कुछ व्यक्तित्व ऐसे होते हैं जो न केवल संगठन की नींव को मजबूत करते हैं, बल्कि खुद को एक प्रेरणास्रोत के रूप में स्थापित कर लेते हैं. सीपी राधाकृष्णन का नाम भी उन्हीं में से एक है. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े इस समर्पित कार्यकर्ता ने ज़मीनी स्तर से राजनीति की शुरुआत की और अब राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने उन्हें उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार घोषित किया है. यह एक ऐसा क्षण है जो न सिर्फ राधाकृष्णन की मेहनत का सम्मान है, बल्कि उन लाखों कार्यकर्ताओं के लिए प्रेरणा भी है जो राष्ट्र निर्माण के लिए निस्वार्थ भाव से जुटे हैं.
सीपी राधाकृष्णन का जन्म 20 अक्टूबर 1957 को तमिलनाडु के तिरुपुर जिले में हुआ था. वे एक ओबीसी परिवार से आते हैं और उनका पूरा नाम है- चंद्रपुरम पोन्नुसामी राधाकृष्णन. उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा के बाद बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन (BBA) में स्नातक की डिग्री प्राप्त की. छात्र जीवन से ही उनमें एक अलग ऊर्जा और सामाजिक सरोकार की भावना थी, जो बाद में उनके राजनीतिक जीवन का आधार बनी.
16 साल की उम्र में RSS से जुड़ाव
राधाकृष्णन की विचारधारा और सामाजिक दृष्टिकोण को आकार देने में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की अहम भूमिका रही. जब वे महज 16 साल के थे, तभी उन्होंने संघ से जुड़ने का फैसला किया. यह वह दौर था जब युवाओं में राष्ट्रसेवा का जज्बा तेज़ी से फैल रहा था और राधाकृष्णन भी उसी भावना से प्रेरित थे. साल 1974 में वे भारतीय जनसंघ की राज्य कार्यकारिणी समिति के सदस्य बने, जो इस बात का संकेत था कि संगठन ने उनकी क्षमताओं को जल्दी ही पहचान लिया था.
लगातार दो बार संसद पहुंचे
1990 के दशक के अंत में, दक्षिण भारत में भारतीय जनता पार्टी की राजनीतिक पकड़ सीमित थी. लेकिन 1998 और 1999 में राधाकृष्णन ने कोयम्बटूर लोकसभा सीट से लगातार दो बार शानदार जीत दर्ज की.
इन दोनों चुनावों में उनकी जीत सिर्फ भाजपा की जीत नहीं थी, बल्कि दक्षिण भारत में पार्टी के लिए एक स्थायी आधार की नींव भी रखी गई.
तमिलनाडु भाजपा को दी नई ऊर्जा
राधाकृष्णन ने सिर्फ चुनावी राजनीति में नहीं, बल्कि संगठनात्मक स्तर पर भी महत्वपूर्ण योगदान दिया. 2004 से 2007 तक उन्होंने तमिलनाडु भाजपा अध्यक्ष के रूप में पार्टी की कमान संभाली. इस दौरान उन्होंने 19,000 किलोमीटर लंबी रथयात्रा निकाली, जिसने राजनीतिक हलकों में व्यापक चर्चा बटोरी.
इस रथयात्रा का उद्देश्य था-
यह यात्रा सिर्फ एक राजनीतिक कार्यक्रम नहीं थी, बल्कि एक सामाजिक आंदोलन की तरह थी जिसने पार्टी को राज्य के हर कोने तक पहुंचाया.
राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी छाप
राजनीति में राधाकृष्णन की सक्रियता केवल राज्य तक सीमित नहीं रही. 2004 में उन्होंने संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारत का प्रतिनिधित्व किया. यह उस विश्वास का प्रतीक था जो पार्टी और सरकार को उनके ज्ञान, कूटनीति और नेतृत्व पर था.
इतना ही नहीं, वे ताइवान का दौरा करने वाले पहले भारतीय संसदीय प्रतिनिधिमंडल का भी हिस्सा बने. यह अनुभव उन्हें अंतरराष्ट्रीय राजनीति की समझ के साथ-साथ वैश्विक कूटनीति में भी सक्रिय भागीदार बनाता है.
प्रशासनिक कार्यों में दक्षता: कोयर बोर्ड के चेयरमैन बने
2016 में राधाकृष्णन को कोच्चि स्थित कोयर बोर्ड का चेयरमैन नियुक्त किया गया. उनके कार्यकाल के दौरान भारत के कोयर उत्पादों का निर्यात रिकॉर्ड 2,532 करोड़ रुपए तक पहुंच गया. यह एक बड़ी उपलब्धि मानी गई क्योंकि इससे भारत के पारंपरिक उद्योग को अंतरराष्ट्रीय पहचान और आर्थिक मजबूती मिली.
राज्यपाल के रूप में अनुभव
राजनीतिक और प्रशासनिक अनुभव के बाद राधाकृष्णन को झारखंड का राज्यपाल बनाया गया. बाद में उन्होंने तेलंगाना और पुडुचेरी का अतिरिक्त प्रभार भी संभाला.
जुलाई 2024 में उन्हें महाराष्ट्र का राज्यपाल नियुक्त किया गया. इस दौरान उन्होंने न सिर्फ राज्य प्रशासन के साथ बेहतर समन्वय स्थापित किया बल्कि सामाजिक मुद्दों पर भी सक्रिय भूमिका निभाई.
खेलों से खास लगाव, युवाओं के लिए प्रेरणा
राधाकृष्णन का व्यक्तित्व बहुआयामी है. वे कॉलेज के दिनों में टेबल टेनिस के चैंपियन रहे हैं. साथ ही वे लंबी दौड़ के धावक भी थे. क्रिकेट और वॉलीबॉल जैसे खेलों में भी उनकी गहरी रुचि रही है. उनका यह पहलू आज के युवाओं को बताता है कि राजनीति और सामाजिक सेवा के साथ भी फिटनेस और खेलों को प्राथमिकता दी जा सकती है.
20 से ज्यादा देशों की यात्रा का अनुभव
राजनीतिक और सामाजिक कार्यों के सिलसिले में राधाकृष्णन ने अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली, स्पेन, जापान, चीन, सिंगापुर समेत 20 से अधिक देशों की यात्रा की है. इन यात्राओं से उन्हें दुनिया भर की राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक व्यवस्थाओं को समझने का मौका मिला, जो उनके नेतृत्व कौशल को और परिपक्व बनाता है.
निजी जीवन: एक संतुलित परिवारिक व्यक्ति
राधाकृष्णन का पारिवारिक जीवन भी उतना ही शांत और स्थिर है. उनकी पत्नी का नाम श्रीमती आर सुमति है. इस दंपती के एक बेटा और एक बेटी हैं. हालांकि उनके बच्चों के बारे में सार्वजनिक रूप से ज्यादा जानकारी उपलब्ध नहीं है, लेकिन राधाकृष्णन ने हमेशा पारिवारिक जीवन और सार्वजनिक जिम्मेदारियों के बीच संतुलन बनाए रखा है.
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