नेपाल में Gen-Z प्रदर्शनकारियों ने होटल फूंका, यूपी की एक महिला की मौत, बेटे ने सुनाई भयानक कहानी

यह प्रदर्शन 8 सितंबर से शुरू हुआ था, जिसमें युवा वर्ग ने सोशल मीडिया प्रतिबंधों के खिलाफ आवाज़ बुलंद की थी. हालांकि, जल्द ही यह विरोध एक उग्र आंदोलन में तब्दील हो गया. प्रदर्शनकारियों ने संसद में घुसने की कोशिश की, सड़कें जाम कर दी गईं और शहर भर में आगजनी की घटनाएं होने लगीं.

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जब कोई धार्मिक यात्रा की योजना बनाता है, तो उसका मकसद आत्मिक शांति और श्रद्धा होता है. लेकिन गाजियाबाद से आए रामवीर सिंह गोला और उनकी पत्नी राजेश गोला की यह तीर्थयात्रा नेपाल के पशुपतिनाथ मंदिर तक पहुंच तो गई, मगर लौटते वक्त वो एक ऐसी त्रासदी में तब्दील हो गई जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकेगा.

विरोध की आग पहुंची होटल तक

नेपाल में चल रहे Gen-Z आंदोलन ने जब हिंसक रूप लिया, तब राजधानी काठमांडू के कई हिस्से जलने लगे. सरकारी इमारतें, निजी संपत्तियां और यहां तक कि संसद भवन भी प्रदर्शनकारियों के निशाने पर आ गए. इन्हीं घटनाओं की चपेट में आया वो पांच सितारा होटल, जिसमें गोला दंपति ठहरे हुए थे.

8 सितंबर से शुरू हुआ था आंदोलन

यह प्रदर्शन 8 सितंबर से शुरू हुआ था, जिसमें युवा वर्ग ने सोशल मीडिया प्रतिबंधों के खिलाफ आवाज़ बुलंद की थी. हालांकि, जल्द ही यह विरोध एक उग्र आंदोलन में तब्दील हो गया. प्रदर्शनकारियों ने संसद में घुसने की कोशिश की, सड़कें जाम कर दी गईं और शहर भर में आगजनी की घटनाएं होने लगीं.

पर्दे से उतरने की कोशिश बनी जानलेवा

9 सितंबर की रात, जब होटल की निचली मंजिलों में आग फैलने लगी, तब ऊपर ठहरे रामवीर और राजेश घबरा गए. बाहर निकलने का कोई रास्ता न देख, रामवीर ने पर्दे की मदद से पत्नी को नीचे उतारने की कोशिश की, लेकिन हादसा हो गया. फिसलने से राजेश गिर पड़ीं और सिर व शरीर पर गंभीर चोटें आईं.

अस्पताल पहुंचने से पहले ही तोड़ दी सांसें

राजेश को तुरंत अस्पताल ले जाया गया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी. अत्यधिक खून बह जाने की वजह से उनकी मौत हो गई. परिवार वालों के अनुसार, घटना बेहद दर्दनाक थी और मदद समय पर नहीं मिल सकी. शुक्रवार को सुबह करीब 10:30 बजे उनका पार्थिव शरीर गाजियाबाद स्थित मास्टर कॉलोनी के घर लाया गया.

मृतक महिला के बेटे ने बताया कि मेरे माता-पिता 8 सितंबर को मंदिर में पूजा-अर्चना करने के बाद बेहद खुश थे. उन्होंने हमें काठमांडू के दर्शनीय स्थल दिखाने के लिए वीडियो कॉल भी की थी. लेकिन 9 सितंबर की रात को अफरा-तफरी मच गई. भीड़ ने होटल पर धावा बोल दिया और उसे आग लगा दी. होटल की सीढ़ियां धुएं से भर गईं. बचाव दल ने नीचे गद्दे बिछा दिए. लोग कूद रहे थे. मेरी मां फिसल गई. उनकी रीढ़ की हड्डी में चोट लग गई और बाद में उनकी मौत हो गई.

कई भारतीय अब भी नेपाल में फंसे

इस हिंसा का प्रभाव सिर्फ एक परिवार तक सीमित नहीं रहा. सैकड़ों भारतीय यात्री अभी भी नेपाल में फंसे हुए हैं, जो हालात सामान्य होने का इंतजार कर रहे हैं. भारत सरकार और दूतावास द्वारा राहत कार्य चलाए जा रहे हैं, लेकिन हालात बेहद चिंताजनक हैं.

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