नई दिल्ली: इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने बुधवार को एक अहम बयान देते हुए साफ कर दिया कि इजरायल अपनी सुरक्षा नीति में पूरी तरह स्वतंत्र है और वह अमेरिका के आदेशों पर काम नहीं करता. यह बयान उन्होंने अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस से मुलाक़ात से पहले उस वक्त दिया, जब ग़ाज़ा में अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा बल की संभावित तैनाती को लेकर चर्चा तेज़ थी. नेतन्याहू का उद्देश्य इजरायली नागरिकों को यह भरोसा दिलाना था कि उनकी सरकार देश की रक्षा को लेकर कोई समझौता नहीं करेगी.
ग़ाज़ा में विदेशी सुरक्षा बल पर चिंता
ग़ाज़ा पट्टी में किसी भी अंतरराष्ट्रीय फोर्स की मौजूदगी को लेकर नेतन्याहू स्पष्ट हैं कि इससे इजरायल की सुरक्षा रणनीति पर कोई असर नहीं पड़ना चाहिए. उनका कहना है कि इजरायल को यह अधिकार होना चाहिए कि वह अपनी सैन्य कार्रवाई बिना किसी बाहरी हस्तक्षेप के जारी रख सके. इस बयान के ज़रिए नेतन्याहू ने एक बार फिर दोहराया कि ग़ाज़ा में इजरायली सेना की आज़ादी और प्रभुत्व से कोई समझौता नहीं किया जाएगा.
“हम अमेरिका के गुलाम नहीं”
वेंस से मुलाकात के बाद नेतन्याहू ने साफ शब्दों में कहा, “इजरायल अमेरिका का गुलाम या कोई अधीन देश नहीं है.” उन्होंने इस तरह की अटकलों को बकवास बताते हुए कहा कि कभी लोग कहते हैं इजरायल अमेरिका को चलाता है, तो कभी ये कि अमेरिका इजरायल को कंट्रोल करता है दोनों ही बातें गलत हैं. उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच एक मजबूत साझेदारी है, जो साझा मूल्यों और हितों पर आधारित है. हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि कुछ मुद्दों पर मतभेद हो सकते हैं, लेकिन ज़्यादातर मामलों में दोनों सरकारें मिलकर काम करती हैं.
ग़ाज़ा में स्थायित्व एक चुनौती: वेंस
इस बीच, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी माना कि ग़ाज़ा में स्थायित्व कायम रखना आसान नहीं होगा. उन्होंने कहा कि हमास को निष्क्रिय करना और ग़ाज़ा के नागरिकों की मदद करना एक जटिल प्रक्रिया है. हालांकि, उन्होंने उम्मीद जताई कि यह मिशन सफल हो सकता है. अपनी इज़राइल यात्रा के दौरान वेंस ने राष्ट्रपति इसहाक हर्ज़ोग से भी मुलाकात की. इस दौरान उनके साथ अमेरिकी मध्य पूर्व दूत स्टीव विटकॉफ और पूर्व सलाहकार जेरड कुशनर भी मौजूद थे.
कौन होंगे अंतरराष्ट्रीय फोर्स का हिस्सा?
अब तक यह तय नहीं हुआ है कि ग़ाज़ा में प्रस्तावित अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा बल में कौन-कौन से देश भाग लेंगे. वेंस ने बताया कि तुर्की और इंडोनेशिया इसमें सैनिक भेजने पर विचार कर रहे हैं, जबकि ब्रिटेन कुछ सैन्य विशेषज्ञ इजरायल भेज रहा है, जो संघर्ष विराम की निगरानी करेंगे. इस बीच इजरायल को अब तक कुल 15 बंधकों के शव लौटाए जा चुके हैं, जबकि 13 शव अभी ग़ाज़ा में हैं.
अब तक हुई इतनी तबाही
7 अक्टूबर से शुरू हुई इजरायल-हमास जंग ने अब तक भारी तबाही मचाई है. हमास के शुरुआती हमले में करीब 1,200 इज़राइली नागरिकों की मौत हुई थी और 251 लोगों को बंधक बना लिया गया था. इसके जवाब में इजरायल ने ग़ाज़ा पर ज़बरदस्त सैन्य कार्रवाई शुरू की. ग़ाज़ा की स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, अब तक 68,000 से अधिक फिलिस्तीनियों की मौत हो चुकी है, हालांकि इजरायल इस आंकड़े को स्वीकार नहीं करता.
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