'फिलीस्तीन नाम का मुल्क नहीं बनेगा...' मान्यता देने वाले देशों को नेतन्याहू की चेतावनी, देखें Video

इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अंतर्राष्ट्रीय मंच पर एक कड़ा और साफ संदेश देते हुए दो टूक कहा है कि जॉर्डन नदी के पश्चिम में किसी भी कीमत पर फिलीस्तीनी राज्य की स्थापना नहीं होने दी जाएगी.

Netanyahu warns countries that recognize Palestine
प्रतिकात्मक तस्वीर/ Social Media

तेल अवीव: इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अंतर्राष्ट्रीय मंच पर एक कड़ा और साफ संदेश देते हुए दो टूक कहा है कि जॉर्डन नदी के पश्चिम में किसी भी कीमत पर फिलीस्तीनी राज्य की स्थापना नहीं होने दी जाएगी. यह बयान ऐसे समय में आया है जब तीन प्रमुख पश्चिमी देशों ब्रिटेन, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया ने हाल ही में फिलीस्तीन को एक स्वतंत्र और संप्रभु राष्ट्र के रूप में आधिकारिक मान्यता देने की घोषणा की है.

प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने इस फैसले की तीखी आलोचना करते हुए कहा कि यह आतंकवाद को इनाम देने जैसा है. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि 7 अक्टूबर की भयावह घटना (हमास द्वारा इजरायल पर हमला) के बाद ऐसे कदम न केवल गलत हैं बल्कि सुरक्षा के लिहाज से भी खतरनाक संकेत देते हैं. उनके अनुसार, फिलीस्तीनी राज्य की मान्यता देना, उस आतंक को वैधता देना है, जिसने इस पूरे क्षेत्र को अशांत कर रखा है.

नेतन्याहू ने बयान में कहा, "मैं स्पष्ट करना चाहता हूं कि जॉर्डन नदी के पश्चिमी क्षेत्र में कोई फिलीस्तीनी देश नहीं बनेगा. हमने वर्षों तक घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय दबावों के बावजूद ऐसे किसी भी प्रयास को सफल नहीं होने दिया है."

अमेरिका से लौटने के बाद देंगे जवाब

प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा जारी बयान में यह भी बताया गया कि नेतन्याहू अमेरिका यात्रा के बाद इस फैसले का "ठोस जवाब" देंगे. उनके अनुसार, इन देशों द्वारा लिया गया यह कदम इजरायल की सुरक्षा, संप्रभुता और क्षेत्रीय नीति पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है, और इसका जवाब वैश्विक मंच पर दिया जाएगा.

इजरायल सरकार ने यह भी बताया कि पिछले कुछ वर्षों में उसने यहूदिया और सामरिया (विवादित वेस्ट बैंक क्षेत्र) में यहूदी आबादी को दुगुना किया है. नेतन्याहू ने इसे एक रणनीतिक कदम बताया और कहा कि यहूदियों की बढ़ती उपस्थिति इस क्षेत्र में इजरायल की स्थिति को मजबूत करती है.

फिलीस्तीन को मान्यता देने वाले देशों की दलील

जहां इजरायल ने इस मान्यता का कड़ा विरोध किया है, वहीं फिलीस्तीन को मान्यता देने वाले देशों का कहना है कि यह कदम शांति की ओर एक सकारात्मक प्रयास है. ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा जारी बयान में कहा गया कि वे फिलीस्तीनियों की स्वतंत्रता और उनकी लंबे समय से चली आ रही संप्रभुता की आकांक्षाओं का समर्थन करते हैं.

ऑस्ट्रेलिया का बयान: "हम फिलीस्तीन को एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में मान्यता देकर वहां के लोगों की आत्मनिर्णय की इच्छा को स्वीकार कर रहे हैं."

इसी प्रकार, कनाडा और ब्रिटेन ने भी दो-राष्ट्र समाधान की दिशा में आगे बढ़ने का समर्थन करते हुए इस कदम को न्याय और स्थिरता की दिशा में उठाया गया कदम बताया.

क्या होगा ग्लोबल डिप्लोमैसी पर असर?

इन तीन देशों द्वारा फिलीस्तीन की मान्यता ऐसे समय पर आई है जब गाजा पट्टी में इजरायल और हमास के बीच भीषण संघर्ष जारी है. इस युद्ध में हजारों फिलीस्तीनी नागरिकों की मौत हो चुकी है और लाखों विस्थापित हो गए हैं. इजरायल ने कई बार गाजा क्षेत्र को खाली करने के निर्देश दिए हैं और माना जा रहा है कि वह इस पूरे क्षेत्र पर पूर्ण नियंत्रण स्थापित करने की योजना बना रहा है.

अब जबकि ब्रिटेन, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया जैसे महत्वपूर्ण सहयोगी देश फिलीस्तीन को मान्यता दे रहे हैं, इससे इजरायल के लिए राजनयिक चुनौतियां और बढ़ सकती हैं. इस परिदृश्य में यह भी आशंका जताई जा रही है कि इजरायल प्रतिक्रिया स्वरूप वेस्ट बैंक के और अधिक हिस्सों को अपने क्षेत्र में शामिल करने का कदम उठा सकता है, जिससे वहां के भूराजनीतिक समीकरण और अधिक जटिल हो सकते हैं.

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