ईरान के खिलाफ हाल ही में सफल रहे ‘ऑपरेशन मिडनाइट हैमर’ के बाद अमेरिका अब अपने हवाई हमले की ताकत को और भी उन्नत करने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है. अमेरिकी वायुसेना बहुत जल्द अपने नए और अत्याधुनिक B-21 ‘रेडर’ स्टील्थ बॉम्बर को सेवा में शामिल करने जा रही है.
यह विमान न केवल अपने पूर्ववर्तियों की तुलना में ज्यादा प्रभावशाली होगा, बल्कि यह भविष्य की युद्ध रणनीतियों में एक केंद्रीय भूमिका निभाएगा. B-21 को दुनिया का पहला छठी पीढ़ी का स्टील्थ बॉम्बर बताया जा रहा है, जो न केवल तकनीकी रूप से बेहद उन्नत है, बल्कि इसे डिज़ाइन ही इस तरह किया गया है कि यह रडार और सेंसर की पकड़ से दूर रह सके.
B-2 की विदाई की तैयारी, B-21 लेगा उसकी जगह
अब तक अमेरिका की लंबी दूरी की हवाई ताकत का चेहरा रहा B-2 स्पिरिट बॉम्बर अब धीरे-धीरे अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है. यह विमान तकनीकी रूप से भले ही आज भी दुनिया में अग्रणी है, लेकिन रखरखाव की अधिक लागत और सीमित संख्या इसकी सबसे बड़ी कमजोरियां बन गई हैं. फिलहाल अमेरिका के पास 21 B-2 बॉम्बर हैं, जिनमें से दो अब ऑपरेशनल नहीं हैं. ऐसे में अब B-21 रेडर को अमेरिका की नई "एयर स्ट्राइक बैकबोन" बनाने की योजना है.
B-21 की खूबियां जो इसे सबसे अलग बनाती हैं
B-21 बॉम्बर को "फ्लाइंग विंग" डिज़ाइन में तैयार किया गया है, जो इसे रडार से बचाने में मदद करता है. इसके एयर इनलेट्स और 2-डी एग्जॉस्ट सिस्टम इस तरह से डिज़ाइन किए गए हैं कि इंफ्रारेड ट्रैकिंग सिस्टम से इसे पकड़ना लगभग नामुमकिन हो जाता है. विमान में अत्याधुनिक रडार, सेंसर, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर तकनीक, और ISR (इंटेलिजेंस, सर्विलांस और रिकॉन) क्षमताएं मौजूद हैं. इसकी सबसे बड़ी ताकत है इसका ओपन आर्किटेक्चर सिस्टम, जिसकी मदद से भविष्य में नई टेक्नोलॉजी को इसमें आसानी से जोड़ा जा सकता है. बिना रीफ्यूलिंग के यह विमान बेहद लंबी दूरी तक ऑपरेशन कर सकता है, जिससे अमेरिकी वायुसेना की वैश्विक पहुंच और भी मजबूत होगी.
अमेरिका की रणनीति: कितने B-21 होंगे वायुसेना में?
फिलहाल अमेरिकी वायुसेना कम से कम 100 B-21 बॉम्बर्स को अपने बेड़े में शामिल करने की योजना बना रही है. हालांकि कई सैन्य विशेषज्ञों और जनरलों का मानना है कि यह संख्या पर्याप्त नहीं होगी, खासकर जब चीन और रूस जैसे देशों के साथ वैश्विक शक्ति संघर्ष की संभावना बनी हुई है. कुछ विश्लेषकों की राय है कि अमेरिका को कम से कम 200 या उससे अधिक B-21 बॉम्बर बनाने चाहिए, ताकि वह एक साथ एशिया, मिडल ईस्ट और अफ्रीका जैसे क्षेत्रों में अपनी हवाई ताकत का प्रदर्शन कर सके.
महंगी लेकिन असरदार परियोजना
इससे पहले B-2 बॉम्बर की योजना में 132 विमानों का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन लागत के चलते केवल 21 ही बन पाए. हर एक B-2 की कीमत करीब 2 अरब डॉलर तक पहुंच गई थी. यही खतरा B-21 के साथ भी है, यदि इसका उत्पादन सीमित रखा गया तो लागत भारी पड़ सकती है.इसलिए अमेरिकी रणनीतिकार यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि B-21 को बड़े पैमाने पर बनाया जाए, ताकि यह सिर्फ तकनीकी दृष्टि से ही नहीं, बल्कि लागत के लिहाज़ से भी फायदेमंद साबित हो.
यह भी पढ़ें: पत्रकार ने की तारीफ, जेलेंस्की ने धो डाला! कहा-पिछली बार भी आपने...माफी तक मांगनी पड़ी; ट्रंप भी हैरान