कौन है D गैंग का मास्टरमाइंड? किसने की थी धमाके की प्लानिंग, जांच में सामने आया मास्टरमाइंड का नाम

दिल्ली के लाल किले के पास हुए धमाके की जांच अब उस मोड़ पर पहुंच चुकी है, जहां इस पूरे नेटवर्क का असली चेहरा सामने आने लगा है. जांच एजेंसियों के सूत्रों के मुताबिक, इस हमले के पीछे जिस शख्स का दिमाग काम कर रहा था.

New Delhi Car Blast know who is mastermind of this incident
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दिल्ली के लाल किले के पास हुए धमाके की जांच अब उस मोड़ पर पहुंच चुकी है, जहां इस पूरे नेटवर्क का असली चेहरा सामने आने लगा है. जांच एजेंसियों के सूत्रों के मुताबिक, इस हमले के पीछे जिस शख्स का दिमाग काम कर रहा था, वह कोई और नहीं बल्कि जम्मू-कश्मीर के शोपियां जिले का मौलाना इरफान है. कहा जा रहा है कि इरफान सिर्फ इस ब्लास्ट तक सीमित नहीं था, बल्कि वह देश के कई बड़े शहरों में धमाके की योजना बना रहा था.

इरफान, जिसे इलाके में लोग “मौलवी” के नाम से जानते हैं, शोपियां के नदीगाम गांव का रहने वाला है और उम्र महज 28 साल बताई जा रही है. दिखने में एक धार्मिक शिक्षक लगने वाला यह व्यक्ति दरअसल आतंक का नया चेहरा बन चुका था. वह AGuH (अंसार गजावत-उल-हिंद) संगठन से जुड़ा हुआ था और उसके मारे गए कमांडर हाफिज मुजम्मिल तांत्रे के संपर्क में था.बताया जाता है कि 2021 में ही तांत्रे ने वॉट्सऐप के जरिए “गाजी” और “हाशिम” जैसे नामों से इरफान और डॉक्टर मुजम्मिल के साथ बातचीत शुरू की थी. इसी दौरान दोनों की सोच में कट्टरता भर दी गई और धीरे-धीरे उन्होंने भारत में हिंसा फैलाने की साजिश रचनी शुरू की.

टेलीग्राम और सिग्नल पर बन रहा था जाल

जांच में सामने आया है कि ये सभी बातचीत टेलीग्राम जैसे एन्क्रिप्टेड प्लेटफॉर्म पर करते थे ताकि सुरक्षा एजेंसियां इनकी गतिविधियों को ट्रैक न कर सकें. डॉक्टर मुजम्मिल शकील और इरफान ने मिलकर अपने संगठन का नेटवर्क बढ़ाने के लिए आदिल और उमर को जोड़ा. इन चारों ने मिलकर कश्मीर से लेकर दिल्ली तक अपने मॉड्यूल का खाका तैयार किया.मौलाना इरफान कुरान की क्लासेज के बहाने युवाओं को रेडिकलाइज कर रहा था और जिहाद के नाम पर उन्हें आतंक की राह पर ले जा रहा था. वहीं, “हाशिम” नाम का आतंकी इन लोगों को जरूरत पड़ने पर हथियार उपलब्ध कराता था.

डॉक्टर मुजम्मिल का दोहरा चेहरा

जांच एजेंसियों की रिपोर्ट के मुताबिक, डॉक्टर मुजम्मिल शकील अल फलाह यूनिवर्सिटी में चीफ मेडिकल ऑफिसर के पद पर कार्यरत था. उसकी सालाना आय लगभग 9 से 10 लाख रुपये थी, लेकिन इस धन का बड़ा हिस्सा उसने आतंकी गतिविधियों में झोंक दिया.मुजम्मिल और मौलाना इरफान की दोस्ती 2021 में हुई थी, जब मुजम्मिल ने घायल आतंकी हाफिज तांत्रे का इलाज किया था. तभी से वह आतंक के साये में आने लगा. धीरे-धीरे मुजम्मिल को “धार्मिक वीडियो” और “जिहादी पोस्टर्स” दिखाकर मानसिक रूप से तैयार किया गया.

विस्फोटक तैयार करने की गुप्त तैयारी

जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि ब्लास्ट की तैयारी के लिए उमर, आदिल, और मुजम्मिल ने 26 लाख रुपये जुटाए थे. यह पूरा अमाउंट नकद में उमर को सौंपा गया. उमर ने इस पैसे से हरियाणा के नूंह और गुरुग्राम इलाकों से 26 क्विंटल NPK फर्टिलाइजर खरीदा — जिसका इस्तेमाल IED (इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) तैयार करने में किया जाना था.मौलाना इरफान और उसके साथियों का इरादा सिर्फ दिल्ली ही नहीं, बल्कि उत्तर भारत के कई प्रमुख शहरों में धमाके करने का था.

पैसों पर फंसा पूरा खेल

लेकिन इस नेटवर्क की सबसे बड़ी चूक उनके ही भीतर से हुई. उमर और डॉक्टर मुजम्मिल के बीच पैसों को लेकर विवाद शुरू हो गया. डॉक्टर मुजम्मिल ने उमर से पूरे 26 लाख रुपये का हिसाब मांगा जिसके बाद दोनों के बीच कहासुनी बढ़ गई.डर के कारण उमर ने सारा सामान और दस्तावेज मुजम्मिल को वापस सौंप दिए. बताया जा रहा है कि इसी दौरान एजेंसियों को उनके डिजिटल चैट्स और फंडिंग ट्रेल की जानकारी मिल गई, जिससे पूरे मॉड्यूल का भंडाफोड़ हो गया.

कैसे हुआ पर्दाफाश

उमर ने करीब तीन महीने पहले Signal App पर एक ग्रुप बनाया था, जिसमें उसने 2-4 विश्वसनीय सदस्यों को जोड़ा. इसी ग्रुप में विस्फोटक सामग्री, हथियारों और टारगेट लोकेशन पर चर्चा होती थी.जांच में यह भी सामने आया है कि जो हथियार शाहिना के पास से बरामद हुए, वे भी उमर के जरिए इसी ग्रुप ने मुहैया कराए थे. डिजिटल ट्रेल, बैंकिंग रिकॉर्ड और कॉल डिटेल्स के जरिए एजेंसियों ने धीरे-धीरे इस पूरी साजिश को उजागर किया.

मौलाना इरफान के प्लान का अंत

इरफान का प्लान बड़ा था — वह चाहता था कि देश के अलग-अलग राज्यों में छोटे-छोटे ब्लास्ट कराकर दहशत फैलाई जाए. लेकिन पैसों के झगड़े, आंतरिक मतभेद और एजेंसियों की सतर्कता ने उसका पूरा खेल खत्म कर दिया.अब NIA और दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल मौलाना इरफान, डॉक्टर मुजम्मिल और उमर के नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही हैं. एजेंसियों को उम्मीद है कि जल्द ही इस आतंकी साजिश की जड़ तक पहुंचा जा सकेगा.

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