1KG से ज्यादा सोना, 6 घर और 2 प्लॉट... कितने अमीर हैं देश के अगले CJI सूर्यकांत? जानें संपत्ति की डिटेल

भारत के मुख्य न्यायधीश, जस्टिस बीआर गवई ने अपने उत्तराधिकारी के रूप में जस्टिस सूर्यकांत का नाम घोषित किया है. जस्टिस सूर्यकांत 24 नवंबर, 2022 को भारत के 53वें मुख्य न्यायधीश के रूप में शपथ लेंगे.

next CJi Justice Suryakant net worth includes 1 kg of gold 8 crore in FD
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नई दिल्ली: भारत के मुख्य न्यायधीश, जस्टिस बीआर गवई ने अपने उत्तराधिकारी के रूप में जस्टिस सूर्यकांत का नाम घोषित किया है. जस्टिस सूर्यकांत 24 नवंबर, 2022 को भारत के 53वें मुख्य न्यायधीश के रूप में शपथ लेंगे. उनके पास अब तक के अपने लंबी न्यायिक यात्रा के दौरान कई महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक फैसले दिए हैं. उनकी संपत्ति, जीवन यात्रा, और अब तक के अहम योगदान पर एक नज़र डालते हैं.

जस्टिस सूर्यकांत की संपत्ति का खुलासा

सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार, जस्टिस सूर्यकांत एक प्रभावशाली संपत्ति के मालिक हैं. उनके पास 8 करोड़ रुपये से अधिक की एफडी है और उनका पीएफ खाता भी 4.23 करोड़ रुपये से भरा हुआ है. इसके अलावा, उनके पास 6 प्रॉपर्टीज हैं, जिनमें चंडीगढ़, पंचकुला, गुरुग्राम, नई दिल्ली और हिसार जैसे शहरों में घर और ज़मीन शामिल हैं. उनके परिवार के पास सोने-चांदी के अलावा कई एफडी और पीपीएफ खाते भी हैं, जो उनके वित्तीय स्थिरता को दर्शाते हैं. 

सोना-चांदी और एफडी में भारी निवेश

जस्टिस सूर्यकांत के परिवार के पास लगभग 1.1 किलोग्राम सोना है और छह किलो चांदी है। वहीं, उनके नाम पर कुल 16 एफडी हैं, जिनमें कुल 4,11,22,395 रुपये जमा हैं। उनकी पत्नी के नाम पर एक पीपीएफ अकाउंट भी है, जिसमें 49,90,733 रुपये जमा हैं। पत्नी के जीपीएफ अकाउंट में 3,74,03,026 रुपये हैं। उनकी दोनों बेटियों के पास 100-100 ग्राम सोना है। बड़ी बेटी के आठ एफडी अकाउंट में 34 लाख और पीपीएफ में 47 लाख रुपये जमा हैं। वहीं, छोटी बेटी की सात एफडी में 25 लाख और पीपीएफ में 47 लाख रुपये जमा हैं।

जस्टिस सूर्यकांत का न्यायिक सफर

जस्टिस सूर्यकांत का सफर एक छोटे शहर के वकील से देश के सर्वोच्च न्यायिक पद तक पहुंचने का है. हरियाणा के हिसार जिले में 10 फरवरी, 1962 को जन्मे जस्टिस सूर्यकांत ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा पूरी करने के बाद कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से कानून में स्नातकोत्तर की डिग्री प्राप्त की. 2011 में उन्हें ‘प्रथम श्रेणी में प्रथम’ के तौर पर सम्मानित किया गया. उन्होंने पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय में भी कई महत्वपूर्ण निर्णय दिए और 2018 में हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायधीश बने. इसके बाद 2019 में उन्हें सुप्रीम कोर्ट में न्यायधीश के रूप में नियुक्त किया गया.

सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस सूर्यकांत के ऐतिहासिक फैसले

जस्टिस सूर्यकांत ने सुप्रीम कोर्ट में रहते हुए कई अहम फैसले दिए हैं. विशेष रूप से अनुच्छेद 370 को हटाने और नागरिकता के अधिकारों पर उनके निर्णय ने देश को महत्वपूर्ण दिशा दी. इसके अलावा, राजद्रोह कानून, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और अन्य संवैधानिक मामलों में उनके निर्णय चर्चित रहे हैं. उन्होंने बिहार में 65 लाख मतदाताओं का विवरण सार्वजनिक करने और चुनावी सुधारों को लेकर भी कई महत्वपूर्ण आदेश दिए.

महिलाओं और लैंगिक समानता के लिए योगदान

जस्टिस सूर्यकांत ने न्यायपालिका में महिलाओं के लिए कई अहम पहल की हैं. उन्होंने सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन और अन्य बार एसोसिएशनों में महिलाओं के लिए एक तिहाई सीटें आरक्षित करने का आदेश दिया. इसके अलावा, वह महिला सरपंचों के अधिकारों की रक्षा करने के लिए भी सक्रिय रहे और गैरकानूनी तरीके से हटाई गई एक महिला सरपंच को बहाल किया. उनका मानना है कि महिलाओं के लिए न्याय सुनिश्चित करना और लैंगिक समानता को बढ़ावा देना समाज के लिए जरूरी है.

जस्टिस सूर्यकांत का प्रभावी न्यायिक कार्यकाल

जस्टिस सूर्यकांत ने सुप्रीम कोर्ट में अपने कार्यकाल के दौरान 300 से अधिक पीठों का हिस्सा बने, जिसमें उन्होंने आपराधिक, संवैधानिक और प्रशासनिक मामलों में महत्वपूर्ण योगदान दिया. 1967 के एएमयू के फैसले को खारिज करने वाली पीठ में उनका अहम योगदान था, जिससे इस मामले में पुनर्विचार की राह खोली गई. इसके अलावा, उन्होंने इजराइली स्पाइवेयर पेगासस के कथित इस्तेमाल के मामले में साइबर विशेषज्ञों की एक समिति का गठन किया था.

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