Iran On America: दुनिया की बदलती भू-राजनीति के बीच ईरान ने एक बार फिर अमेरिका को कठघरे में खड़ा कर दिया है. तेहरान में आयोजित एक अहम अंतरराष्ट्रीय समिट में ईरानी विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने तीखा संदेश देते हुए कहा कि कुछ शक्तिशाली देश दुनिया को अपनी सैन्य ताकत के बल पर चलाने के प्रयास में लगे हैं, जिससे वैश्विक कानून व्यवस्था कमजोर पड़ रही है. अराघची के अनुसार आज की दुनिया में “नियमों का शासन” नहीं, बल्कि “ताकत का शासन” तेज़ी से बढ़ रहा है और अमेरिका इसका सबसे बड़ा उदाहरण है.
अराघची ने अमेरिका और उसके सहयोगी देशों पर आरोप लगाया कि वे अपनी विदेश नीतियों को लागू करने के लिए सैन्य हस्तक्षेप को सामान्य साधन की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं. उन्होंने इसे जंगल का कानून करार देते हुए कहा कि ऐसे मॉडल कभी लंबे समय तक टिक नहीं सकते. उनके मुताबिक, यदि दुनिया को स्थिरता चाहिए तो अंतरराष्ट्रीय ढांचा न्याय, नियम और पारदर्शिता पर खड़ा होना चाहिए, सिर्फ शक्ति पर नहीं.
परमाणु कार्यक्रम पर ईरान की सबसे स्पष्ट सफाई
यह पहली बार है जब जून 2025 में हुए इजराइली-अमेरिकी हमलों के बाद किसी शीर्ष नेता ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर इतने साफ शब्दों में प्रतिक्रिया दी है. अराघची ने कहा कि ईरान में कहीं भी कोई छिपा हुआ या अवैध यूरेनियम संवर्धन नहीं चल रहा है. सभी परमाणु संयंत्र IAEA की पूर्ण निगरानी में काम करते हैं. हालिया हमलों के कारण फिलहाल संवर्धन रोक दिया गया है, लेकिन यह देश का वैधानिक अधिकार है और ईरान इसे नहीं छोड़ेगा. उन्होंने स्पष्ट कहा कि अमेरिका और उसके सहयोगी इसे “खतरा” मानकर देखना बंद करें, क्योंकि ईरान का पूरा कार्यक्रम शांतिपूर्ण और कानूनन वैध है.
तेहरान में समिट: ईरान ने रखा अपना पक्ष, पश्चिम पर उठे सवाल
तेहरान में आयोजित तीन दिवसीय सम्मेलन में ब्रिटेन समेत कई अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थानों के पत्रकार और विशेषज्ञ शामिल हुए. समिट का थीम था, “अंतर्राष्ट्रीय कानून पर हमला: आक्रामकता और आत्मरक्षा”. कार्यक्रम में जून 2025 के 12-दिन के युद्ध के दौरान हुए हमलों, इजराइल की सैन्य कार्रवाई, और पश्चिमी देशों की नीतियों पर विस्तृत चर्चा की गई.
इसी दौरान जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज का वह बयान भी पेश किया गया, जिसमें उन्होंने ईरान पर हुए हमलों को “गंदा काम” कहा था. सम्मेलन स्थल पर युद्ध में मारे गए बच्चों की तस्वीरें लगाई गईं, जो माहौल को भावुक बना रही थीं. यह समिट शहीद जनरल क़ासिम सुलेमानी भवन में हुआ, उस सैन्य कमांडर के नाम पर, जिन्हें 2020 में अमेरिकी ड्रोन हमले में मार दिया गया था.
युद्ध के बाद का ईरान: दबाव, चुनौतियां और अनिश्चित भविष्य
हमलों के बाद ईरान कई चुनौतियों से जूझ रहा है कि इजराइल ने ईरान के कई एयर डिफेंस सिस्टम तबाह कर दिए हैं, जिससे हवाई सुरक्षा कमजोर पड़ गई है. देश कठिन आर्थिक दबाव में है. सामाजिक माहौल में भी अनिश्चितता है, पेट्रोल की कीमत, हिजाब कानून और अन्य संवेदनशील मुद्दों पर सरकार अब तक कोई ठोस फैसला नहीं ले पाई है. इन स्थितियों ने ईरान को बेहद सतर्क मोड में ला दिया है, जहां उसे रक्षा, कूटनीति और घरेलू नीतियों को नए सिरे से संतुलित करना पड़ रहा है.
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