Vande Bharat: वंदे भारत एक्सप्रेस अब सिर्फ तेज रफ्तार और आरामदायक यात्रा तक सीमित नहीं रही. भारतीय रेलवे ने यात्रियों के अनुभव को और खास बनाने के लिए एक नया कदम उठाया है, जिसके तहत अब वंदे भारत ट्रेनों में उस क्षेत्र का पारंपरिक खाना परोसा जाएगा, जहां से ट्रेन की शुरुआत होती है. इसका मतलब यह है कि यात्री अब सफर के दौरान भारत के अलग-अलग हिस्सों के स्वाद का भी अनुभव कर सकेंगे.
रेलवे का मानना है कि यह पहल यात्रा को केवल एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचने का जरिया नहीं, बल्कि देश की सांस्कृतिक और खानपान विविधता से जुड़ने का अनुभव बनाएगी.
‘52 हफ्तों में 52 सुधार’ योजना का हिस्सा है नया फैसला
रेल मंत्रालय के इस फैसले को ‘52 हफ्तों में 52 सुधार’ योजना का एक अहम हिस्सा माना जा रहा है. केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव पहले ही यह स्पष्ट कर चुके हैं कि मौजूदा वर्ष रेलवे सुधारों को समर्पित रहेगा. इस योजना के तहत खाने की गुणवत्ता, कैटरिंग व्यवस्था और ऑनबोर्ड सेवाओं को बेहतर बनाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है.
वंदे भारत ट्रेनों में लोकल क्यूजीन की शुरुआत को फिलहाल पायलट प्रोजेक्ट के रूप में देखा जा रहा है. अगर यात्रियों से इसे अच्छा रिस्पॉन्स मिलता है, तो आने वाले समय में इसे पूरे रेलवे नेटवर्क में लागू किया जा सकता है.
इन वंदे भारत रूट्स पर शुरू हुई लोकल क्यूजीन सेवा
फिलहाल यह नई व्यवस्था छह जोड़ी वंदे भारत ट्रेनों (अप और डाउन दोनों दिशाओं) में लागू की गई है. रेलवे ने साफ किया है कि अभी सभी नए मेन्यू पूरी तरह शाकाहारी रखे गए हैं. इसमें स्वाद के साथ-साथ सेहत और क्षेत्रीय पहचान का भी ध्यान रखा गया है.
मंगलुरु–तिरुवनंतपुरम वंदे भारत में यात्रियों को इडियप्पम, परिप्पू वडा, चेट्टीनाड वेज ग्रेवी और सोयाबीन फ्राई जैसे दक्षिण भारतीय व्यंजन मिल रहे हैं.
कटरा–श्रीनगर वंदे भारत में कश्मीरी पुलाव, राजमा, छोले-कुलचे, कश्मीरी रॉथ केक और चना दाल बर्फी जैसे स्थानीय स्वाद शामिल किए गए हैं.
नागपुर–सिकंदराबाद रूट पर उपमा, पलाकुरा पप्पू, पनीर कोल्हापुरी और ड्राय भेंडाकाया वेपुडु परोसे जा रहे हैं.
इसके अलावा सबरमती–वेरावल और कासरगोड–तिरुवनंतपुरम रूट्स पर भी वहां की स्थानीय खाने की पहचान को मेन्यू का हिस्सा बनाया गया है.
स्टेशन बदलेगा तो स्वाद भी बदलेगा
रेलवे की इस नई नीति की एक खास बात यह है कि ट्रेन की दिशा बदलने के साथ खाने का स्वाद भी बदलेगा. उदाहरण के तौर पर, अगर कोई यात्री कटरा से श्रीनगर की ओर सफर करता है, तो उसे डोगरी और जम्मू क्षेत्र से जुड़े व्यंजन मिलेंगे. वहीं, श्रीनगर से कटरा लौटने वाली वंदे भारत में कश्मीरी खाना परोसा जाएगा.
इससे यात्रियों को हर दिशा में सफर के दौरान अलग-अलग अनुभव मिलेगा और यात्रा और भी खास बन जाएगी.
वंदे भारत स्लीपर ट्रेन में भी मिलेगा देसी स्वाद
रेलवे इस पहल को जल्द शुरू होने वाली पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन में भी लागू करने जा रहा है.
हावड़ा–गुवाहाटी रूट पर चलने वाली इस ट्रेन में, हावड़ा से रवाना होने पर यात्रियों को बंगाली व्यंजन मिलेंगे. मेन्यू में पुलाव, छानेर दालना, भाजा मूंग दाल, सुत्ती भाजा, फुल्का और मशहूर बंगाली मिठाई संदेश शामिल होगी.
वहीं, गुवाहाटी से चलने पर यात्रियों को असमिया स्वाद चखने को मिलेगा, जिसमें जोहा राइस, माटी मोहर दाल, असमिया मटर पनीर और नारियल बर्फी जैसे व्यंजन शामिल हैं.
पहले की व्यवस्था से कैसे अलग है यह नई नीति
अब तक राजधानी, शताब्दी, दुरंतो और वंदे भारत जैसी प्रीमियम ट्रेनों में भोजन IRCTC के तय और एक जैसे मेन्यू के अनुसार परोसा जाता था. नई व्यवस्था इससे अलग है और ज्यादा लचीली मानी जा रही है, क्योंकि इसमें रूट और क्षेत्र के हिसाब से खाना तय किया जा रहा है.
इस बदलाव से कैटरिंग सिस्टम को यात्रियों की पसंद और स्थानीय स्वाद के अनुरूप ढालने में मदद मिलेगी.
यात्रियों को क्या मिलेगा फायदा
इस पहल से यात्रियों को सफर के दौरान स्थानीय और ताजा स्वाद का अनुभव मिलेगा. एक ही देश के भीतर अलग-अलग संस्कृतियों और खानपान से जुड़ने का मौका मिलेगा.
साथ ही, लोकल सप्लायर्स और वेंडर्स को भी इससे रोजगार के नए अवसर मिल सकते हैं. खाने की गुणवत्ता और वैरायटी में सुधार भी इस बदलाव का एक बड़ा लाभ माना जा रहा है.
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