अब जन औषधि केंद्र खोलना होगा और आसान, सरकार ने खत्म किया ये नियम

Jan Aushadhi Kendra: अब महानगरों और भीड़भाड़ वाले शहरों में जन औषधि केंद्र खोलना पहले से कहीं ज्यादा आसान हो गया है. केंद्र सरकार ने लोगों को किफायती दवाइयों की बेहतर उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए एक किलोमीटर की न्यूनतम दूरी का नियम हटा दिया है. यह फैसला 10 सितंबर 2025 से लागू हो गया है.

Now opening a Jan Aushadhi Kendra will be easier the government has abolished this rule
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Jan Aushadhi Kendra: अब महानगरों और भीड़भाड़ वाले शहरों में जन औषधि केंद्र खोलना पहले से कहीं ज्यादा आसान हो गया है. केंद्र सरकार ने लोगों को किफायती दवाइयों की बेहतर उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए एक किलोमीटर की न्यूनतम दूरी का नियम हटा दिया है. यह फैसला 10 सितंबर 2025 से लागू हो गया है.

इस बदलाव का सबसे बड़ा फायदा ये होगा कि अब दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, बेंगलुरु, हैदराबाद, कोलकाता और अहमदाबाद जैसे बड़े शहरों में एक ही इलाके में एक से ज्यादा केंद्र खुल सकेंगे.

क्या है बदलाव और क्यों ज़रूरी था?

अब तक जन औषधि केंद्र खोलने के लिए न्यूनतम एक किलोमीटर की दूरी जरूरी थी. इससे कई इच्छुक लोगों को केंद्र खोलने में दिक्कत आती थी, खासकर भीड़ वाले शहरी इलाकों में.

लेकिन अब सरकार ने फैसला लिया है कि:

  • 10 लाख से ज्यादा आबादी वाले 46 शहरों में दूरी का नियम हटाया गया है.
  • अगर किसी जगह पिछले दो साल में कोई केंद्र नहीं खुला है, तो नजदीक में दूसरा खोलना संभव होगा.
  • अन्य छोटे शहरों और कस्बों में फिलहाल एक किलोमीटर की दूरी का नियम बना रहेगा.

जन औषधि केंद्र क्यों हैं खास?

प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना (PMBJP) के तहत चल रहे इन केंद्रों का मकसद है, लोगों को गुणवत्ता वाली जेनेरिक दवाइयां सस्ती दरों पर उपलब्ध कराना. ब्रांडेड दवाइयों की तुलना में 50% से 90% तक सस्ती होती हैं ये जेनेरिक दवाएं. अभी देश में 17,000 से अधिक जन औषधि केंद्र चल रहे हैं.  इन केंद्रों पर 2047 दवाइयां और 300 सर्जिकल उत्पाद मिलते हैं. सरकार का लक्ष्य है कि 31 मार्च 2027 तक ऐसे 25,000 केंद्र पूरे देश में खोले जाएं.

 नए उद्यमियों और युवाओं के लिए सुनहरा मौका

जन औषधि केंद्र खोलने वालों को सरकार की ओर से वित्तीय मदद भी दी जाती है:

  • ₹20,000 प्रति माह तक प्रोत्साहन राशि
  • ₹2 लाख तक की एकमुश्त सहायता राशि

दवाइयों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए ये केवल उन्हीं कंपनियों से खरीदी जाती हैं जो WHO-GMP मानकों का पालन करती हैं.

इस फैसले से होंगे कई फायदे:

  • भीड़भाड़ वाले इलाकों में दवाइयों की बेहतर उपलब्धता
  • अधिक लोगों को केंद्र खोलने का मौका
  • युवाओं के लिए रोजगार और स्व-रोजगार के अवसर
  • लोगों को जेब पर हल्की, लेकिन असरदार दवाएं

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