Nyoma Airbase: भारत ने चीन से सटी पूर्वी लद्दाख सीमा पर एक और बड़ा रणनीतिक कदम उठाया है. 13,700 फीट की ऊंचाई पर बना न्योमा एयरबेस (Nyoma Airbase) अब पूरी तरह तैयार हो चुका है और इसे भारतीय वायुसेना (IAF) ने औपचारिक रूप से संचालित करना शुरू कर दिया है. बुधवार को वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह ने खुद सी-130J सुपर हरक्युलिस विमान में सवार होकर यहां पहली लैंडिंग की, जिससे इस एयरबेस को आधिकारिक तौर पर परिचालन में शामिल कर लिया गया.
LAC से सिर्फ 30 किलोमीटर दूर नई ताकत
पूर्वी लद्दाख के न्योमा क्षेत्र में बना यह एयरबेस वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) से महज 30 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. यह भारत का सबसे ऊंचाई पर बना और अत्यधिक सामरिक महत्व वाला एयरबेस है. इतनी ऊंचाई पर इस स्तर का एयरबेस तैयार करना अपने आप में एक तकनीकी और सैन्य उपलब्धि मानी जा रही है.
न्योमा अब उन कुछ चुनिंदा एयरबेस में शामिल हो गया है जो ऊंचे पर्वतीय इलाकों में फाइटर जेट्स, ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट और हेलीकॉप्टर के संचालन में सक्षम हैं.
214 करोड़ की लागत से पूरा हुआ प्रोजेक्ट
न्योमा एयरबेस का निर्माण कार्य बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन (BRO) ने वर्ष 2021 में शुरू किया था. यह प्रोजेक्ट लगभग ₹214 करोड़ रुपये की लागत से पूरा किया गया.
करीब चार साल की कठिन मेहनत के बाद यह बेस अब पूरी तरह परिचालन के लिए तैयार है. यहां तीन किलोमीटर लंबी पक्की रनवे बनाई गई है, जो अत्यधिक ऊंचाई वाले इलाकों में ट्रांसपोर्ट और फाइटर विमानों के संचालन को सक्षम बनाएगी.
लद्दाख में अब चौथा बड़ा एयरबेस
न्योमा के तैयार होने के बाद अब लद्दाख में भारतीय वायुसेना के कुल चार प्रमुख एयरबेस हैं- लेह, कारगिल, थोइस (सियाचिन के पास) और न्योमा.
इसके अलावा, दौलत बेग ओल्डी (DBO) में एक छोटी लैंडिंग स्ट्रिप है, जहां हेलीकॉप्टर और छोटे कार्गो विमान उतर सकते हैं. लेकिन न्योमा पहला ऐसा बेस है जो LAC के बेहद करीब है और भारी विमानों के संचालन के लिए उपयुक्त है.
रणनीतिक रूप से बेहद अहम
विशेषज्ञों के मुताबिक, न्योमा एयरबेस भारत की रक्षा नीति में एक गेम चेंजर साबित हो सकता है. यह बेस भारतीय वायुसेना को सीमा पर तैनात सैनिकों तक तेजी से आपूर्ति, उपकरण और रसद समर्थन पहुंचाने में मदद करेगा.
साथ ही, किसी भी आपात स्थिति में फाइटर जेट्स को सीधे सीमा के पास से उड़ान भरने की क्षमता मिलेगी, जिससे प्रतिक्रिया समय (Response Time) काफी घट जाएगा.
वायुसेना प्रमुख बोले- हर परिस्थिति के लिए तैयार
एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह ने न्योमा एयरबेस पर उतरने के बाद कहा, “यह एयरबेस हमारी सीमाओं की सुरक्षा के लिए एक मजबूत कदम है. ऊंचे इलाकों में हमारी संचालन क्षमता पहले से कहीं अधिक बढ़ी है. भारतीय वायुसेना हर परिस्थिति के लिए तैयार है.”
उन्होंने यह भी कहा कि आने वाले महीनों में यहां से सुखोई-30 MKI और मिराज-2000 जैसे लड़ाकू विमानों के ऑपरेशन शुरू किए जा सकते हैं.
निर्माण में आईं कठिनाइयाँ
13,700 फीट की ऊंचाई पर निर्माण करना आसान नहीं था. यहां तापमान कई महीनों तक शून्य से नीचे चला जाता है, और हवा की घनत्व कम होने के कारण भारी मशीनरी का संचालन चुनौतीपूर्ण था.
BRO के इंजीनियरों और जवानों ने सीमित मौसम खिड़कियों के बीच काम करते हुए यह परियोजना पूरी की. निर्माण के दौरान पर्यावरणीय और भौगोलिक चुनौतियों का भी पूरा ध्यान रखा गया.
सीमा पर भारत की स्थिति और मजबूत
चीन के साथ चल रहे सीमा विवाद और पिछले वर्षों में हुई झड़पों के बाद भारत लगातार अपनी सीमावर्ती सैन्य बुनियादियों को मजबूत कर रहा है.
न्योमा एयरबेस का परिचालन शुरू होना उसी रणनीति का हिस्सा है, जिसमें देश ने हाल के वर्षों में लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश में कई सड़कों, पुलों और सुरंगों का निर्माण तेज किया है. यह एयरबेस भविष्य में न केवल रक्षा बल्कि आपदा राहत और मानवीय सहायता अभियानों के लिए भी अहम भूमिका निभा सकेगा.
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