शेख हसीना और यूनुस से क्या था उस्मान हादी का नाता? जानें किसे करता था सपोर्ट

Osman Hadi Killing: बांग्लादेश में हालात एक बार फिर नियंत्रण से बाहर होते दिख रहे हैं. सत्ता परिवर्तन के बाद जिस शांति और स्थिरता की उम्मीद की जा रही थी, वह लगातार हिंसा, आगजनी और राजनीतिक टकराव में बदलती जा रही है.

Osman hadi killing relation with sheikh hasina and muhammad yunus
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Osman Hadi Killing: बांग्लादेश में हालात एक बार फिर नियंत्रण से बाहर होते दिख रहे हैं. सत्ता परिवर्तन के बाद जिस शांति और स्थिरता की उम्मीद की जा रही थी, वह लगातार हिंसा, आगजनी और राजनीतिक टकराव में बदलती जा रही है. अंतरिम सरकार के मुखिया मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व पर पहले से ही सवाल उठ रहे थे, और अब युवा नेता शरीफ उस्मान बिन हादी उर्फ उस्मान हादी की हत्या ने देश को एक नए संकट में धकेल दिया है. 

उनकी मौत की खबर फैलते ही सड़कों पर उबाल आ गया, मीडिया संस्थानों को निशाना बनाया गया और कई शहरों में हालात तनावपूर्ण हो गए. ऐसे में हर कोई यह जानना चाहता है कि आखिर उस्मान हादी कौन थे, जिनकी मौत ने पूरे बांग्लादेश को हिला दिया.

सिंगापुर में टूटा जीवन का संघर्ष

बांग्लादेश के चर्चित छात्र नेता शरीफ उस्मान बिन हादी का गुरुवार, 18 दिसंबर 2025 को सिंगापुर में इलाज के दौरान निधन हो गया. सिंगापुर सरकार ने आधिकारिक बयान जारी कर बताया कि डॉक्टरों के तमाम प्रयासों के बावजूद हादी को बचाया नहीं जा सका. 32 वर्षीय हादी को 12 दिसंबर को ढाका में दिनदहाड़े गोली मारी गई थी. वह बैटरी से चलने वाले ऑटो-रिक्शा में सफर कर रहे थे, तभी एक बाइक सवार हमलावर ने उनके सिर को निशाना बनाया. गंभीर हालत में उन्हें पहले ढाका मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने बताया कि उनके ब्रेन स्टेम को भारी नुकसान पहुंचा है. हालत में सुधार न होने पर 15 दिसंबर को उन्हें सिंगापुर जनरल हॉस्पिटल के न्यूरोसर्जरी आईसीयू में शिफ्ट किया गया, लेकिन किस्मत ने साथ नहीं दिया.

छात्र राजनीति से राष्ट्रीय पहचान तक

उस्मान हादी छात्र संगठन ‘इंक़िलाब मंच’ के वरिष्ठ नेता थे. 2024 के छात्र आंदोलनों के दौरान वह तेजी से राष्ट्रीय राजनीति में उभरे और युवाओं के बीच उनकी अलग पहचान बन गई. बांग्लादेशी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, वह फरवरी में प्रस्तावित आम चुनाव में ढाका-8 सीट से संभावित उम्मीदवार माने जा रहे थे. उनकी मौत के बाद इंक़िलाब मंच ने सोशल मीडिया पर उन्हें “शहीद” बताते हुए भावुक संदेश साझा किया. संगठन ने दावा किया कि हादी ने भारतीय वर्चस्व के खिलाफ संघर्ष किया और इसी रास्ते पर चलते हुए उन्हें शहादत मिली. हादी को भारत का खुला आलोचक माना जाता था और वह पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की नीतियों के भी विरोधी थे.

शेख हसीना से जुड़ा रहा पुराना रिश्ता

दिलचस्प बात यह है कि अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उस्मान हादी कभी शेख हसीना के करीबी सहयोगियों में गिने जाते थे. बाद में राजनीतिक मतभेद बढ़े और वह उन्हीं आंदोलनों का हिस्सा बने, जिनके चलते शेख हसीना की सरकार को सत्ता से हटना पड़ा. उनकी हत्या ने एक बार फिर बांग्लादेश की राजनीति और कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. पुलिस ने मामले की जांच तेज कर दी है. दो मुख्य संदिग्धों की तस्वीरें जारी की गई हैं और उनकी गिरफ्तारी में मदद करने वाले को 50 लाख टका इनाम देने का ऐलान किया गया है. अब तक करीब 20 लोगों को हिरासत में लिया जा चुका है, लेकिन जांच अभी जारी है.

मौत के बाद भड़की हिंसा, मीडिया बना निशाना

हादी के निधन की खबर सामने आते ही ढाका समेत कई शहरों में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए. सैकड़ों लोग सड़कों पर उतर आए. करवान बाजार इलाके में स्थित प्रमुख अखबार ‘प्रथम आलो’ के मुख्य कार्यालय के बाहर प्रदर्शन हुआ, जो बाद में हिंसक हो गया. प्रदर्शनकारियों ने इमारत में घुसकर तोड़फोड़ की. पास ही स्थित ‘डेली स्टार’ के दफ्तर में भी आगजनी की खबरें सामने आईं. मौके पर मौजूद सेना और अर्धसैनिक बल हालात बिगड़ने के बावजूद तत्काल सख्त कार्रवाई से बचते नजर आए.

मोहम्मद यूनुस की प्रतिक्रिया और राष्ट्रीय शोक

उस्मान हादी उन छात्र नेताओं में शामिल थे, जिन्होंने शेख हसीना को सत्ता से हटाने वाले आंदोलनों में अहम भूमिका निभाई थी. यही वजह है कि अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस ने उनकी मौत पर गहरा दुख जताया. यूनुस ने राष्ट्र के नाम संबोधन में कहा कि डर और खून-खराबे के जरिए देश की लोकतांत्रिक यात्रा को रोका नहीं जा सकता.सरकार ने शुक्रवार की नमाज के बाद मस्जिदों में विशेष दुआ कराने और शनिवार को आधे दिन का राष्ट्रीय शोक घोषित किया है. बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के कार्यकारी अध्यक्ष तारिक रहमान समेत कई राजनीतिक दलों ने इसे लोकतंत्र पर हमला करार देते हुए हादी की हत्या की निंदा की है. उस्मान हादी की मौत अब सिर्फ एक हत्या नहीं रह गई है, बल्कि यह बांग्लादेश की अस्थिर राजनीति, कमजोर कानून-व्यवस्था और गहराते सामाजिक तनाव का प्रतीक बन चुकी है. आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि सरकार हालात को संभाल पाती है या देश एक और बड़े उथल-पुथल की ओर बढ़ता है.

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