सीजफायर के लिए तैयार हुए पाकिस्तान-अफगानिस्तान, तालिबान ने की जेल में बंद TTP लड़ाकों रिहाई की मांग

पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच लंबे समय से चल रहे सीमा विवाद और सुरक्षा से जुड़ी तनातनी को कम करने की दिशा में एक अहम पहल देखने को मिली है.

Pakistan and Afghanistan ready for ceasefire
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दोहा: पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच लंबे समय से चल रहे सीमा विवाद और सुरक्षा से जुड़ी तनातनी को कम करने की दिशा में एक अहम पहल देखने को मिली है. कतर की राजधानी दोहा में दोनों देशों के वरिष्ठ प्रतिनिधियों के बीच पहली शांति वार्ता आयोजित की गई, जिसमें प्रारंभिक रूप से एक अस्थायी युद्धविराम पर सहमति बनी है.

यह बैठक ऐसे समय हुई है जब पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच डूरंड लाइन पर हाल ही में फिर से तनाव बढ़ा है और दोनों पक्षों के बीच गोलीबारी तथा हवाई हमले जैसी घटनाएं सामने आई हैं.

करीब 4.5 घंटे तक चली गुप्त बैठक

शनिवार देर रात शुरू हुई यह वार्ता करीब साढ़े चार घंटे तक चली और बंद कमरे में आयोजित की गई. बातचीत का आयोजन कतर सरकार के सहयोग और पश्चिमी कूटनीतिक समर्थन से किया गया. कतर इस वार्ता में एक मध्यस्थ के रूप में शामिल रहा और दोनों पक्षों को संयम बरतने की सलाह दी.

सूत्रों के अनुसार, बैठक का माहौल अपेक्षा से अधिक सकारात्मक रहा, जहां दोनों देशों ने प्रत्यक्ष संवाद के जरिए आगे बढ़ने का संकल्प लिया. इसके साथ ही यह तय किया गया कि वार्ता का अगला दौर रविवार सुबह जारी रहेगा.

सीजफायर पर बनी प्राथमिक सहमति

कतर के विदेश मंत्रालय ने एक आधिकारिक बयान जारी कर यह पुष्टि की कि पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच तत्काल प्रभाव से युद्धविराम लागू करने पर सहमति बनी है. हालांकि यह स्थायी समझौता नहीं है, लेकिन इसे एक “प्रारंभिक विश्वास बहाली का कदम” बताया गया है.

वार्ता में हिस्सा लेने वाला प्रतिनिधिमंडल शनिवार रात दोहा में ही रुका और रविवार को दूसरी बैठक में शामिल हुआ. दोनों देशों के बीच एक हफ्ते के भीतर एक और उच्च स्तरीय बैठक की योजना भी बनाई जा रही है.

पाकिस्तान की सुरक्षा, तालिबान की संप्रभुता

बैठक में पाकिस्तान की ओर से रक्षा मंत्री, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार और आईएसआई के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल आसिम मलिक ने प्रतिनिधित्व किया. वहीं, अफगानिस्तान की ओर से तालिबान सरकार के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए.

पाकिस्तानी पक्ष ने सीमा क्षेत्रों में "सुरक्षित कॉरिडोर" की मांग रखी ताकि सैन्य गतिविधियां निर्बाध रूप से जारी रह सकें. इसके अलावा, पाकिस्तान ने संघर्षविराम के साथ-साथ सीमावर्ती इलाकों में सुरक्षा के लिए प्रभावी व्यवस्था की बात भी उठाई.

TTP के लड़ाकों की रिहाई की मांग

दूसरी ओर, तालिबान प्रतिनिधियों ने पाकिस्तान द्वारा हाल ही में किए गए सीमा पार हवाई हमलों पर आपत्ति जताई और उसे अफगान संप्रभुता का उल्लंघन करार दिया. इसके साथ ही तालिबान ने पाकिस्तान की जेलों में बंद तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) के लड़ाकों की रिहाई की भी मांग की.

तालिबान प्रतिनिधि ने बैठक में कहा, "हम अपने देश की रक्षा करने के लिए बाध्य हैं, लेकिन हमारे पास आधुनिक हवाई सुरक्षा नहीं है. पाकिस्तान को हमारी सीमाओं का सम्मान करना चाहिए."

डूरंड लाइन पर हिंसा और युद्धविराम

बैठक से पहले दोनों देशों के बीच सीमा पर हालात काफी तनावपूर्ण हो चुके थे. डूरंड लाइन पर पिछले हफ्ते झड़पों में दोनों पक्षों को जान-माल का नुकसान उठाना पड़ा.

48 घंटे के एक अस्थायी युद्धविराम के खत्म होने के बाद पाकिस्तान ने सीमा पार कई हवाई हमले किए थे, जिनका तालिबान प्रशासन ने तीखा विरोध किया था. अफगान सरकार के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने इसे “अफगानिस्तान की संप्रभुता के खिलाफ गंभीर उल्लंघन” करार दिया था और चेतावनी दी थी कि “पाकिस्तानी सेना की आक्रामकता से क्षेत्रीय हालात और बिगड़ सकते हैं.”

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