इस्लामाबाद/क्वेटा: पाकिस्तान का बलूचिस्तान प्रांत एक बार फिर मानवाधिकार उल्लंघनों के केंद्र में है. पिछले कुछ वर्षों से लगातार बढ़ रही हिंसा, सैन्य कार्रवाई और जबरन गुमशुदगी के मामलों ने अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता बढ़ा दी है, लेकिन वैश्विक बिरादरी की चुप्पी अब सवालों के घेरे में है.
जनवरी से जून 2025 के बीच बलूचिस्तान में जो कुछ हुआ है, वह किसी संघर्ष क्षेत्र की भयावह तस्वीर को उजागर करता है. आधिकारिक और गैर-सरकारी रिपोर्टों के अनुसार:
और सबसे खौफनाक आंकड़ा: 752 बलूच नागरिकों को अगवा किया गया, जिनमें से सैकड़ों अब भी लापता हैं.
सरकारी और गैर-सरकारी आंकड़ों में अंतर
बलूचिस्तान होम डिपार्टमेंट की रिपोर्ट के मुताबिक, आतंकवाद से जुड़ी घटनाओं में 45% वृद्धि हुई है, जबकि नागरिकों पर टारगेटेड अटैक में 100% तक उछाल आया है.
वहीं, पाकिस्तान सरकार द्वारा गठित Commission of Inquiry on Enforced Disappearances (COIED) के अनुसार, पूरे देश में इस दौरान 125 लापता लोगों के केस दर्ज किए गए, जिनमें केवल 36 केस बलूचिस्तान के बताए गए. लेकिन इन सरकारी आंकड़ों को स्थानीय संगठनों ने पूरी तरह नकारा है.
बलूच यकजिहती कमेटी का बड़ा खुलासा
बलूच क्षेत्र में सक्रिय मानवाधिकार संगठन BYC (Baloch Yakjehti Committee) ने दावा किया है कि:
BYC का आरोप है कि अधिकतर अपहरण पाकिस्तानी सेना और अर्धसैनिक बलों द्वारा किए जा रहे हैं. इन मामलों में न कोई वारंट, न मुकदमा और न ही परिजनों को जानकारी दी जाती है.
प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई
स्थानीय मीडिया और सामाजिक संगठनों की रिपोर्टों के अनुसार, शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोगों पर भी सैन्य बल का प्रयोग किया गया है. कई प्रदर्शनकारियों को बिना किसी आरोप के हिरासत में लिया गया है. इनमें महिलाओं और बच्चों की भी भागीदारी थी.
इसके अलावा, बलूचिस्तान में एक मौलवी मौलाना मुनीर का नाम भी सुर्खियों में है, जिन पर बलूच आबादी के खिलाफ भड़काऊ भाषण और हिंसा फैलाने के आरोप लगे हैं. स्थानीय लोगों का दावा है कि मौलाना मुनीर और कुछ धार्मिक चरमपंथी समूह पाकिस्तानी सेना के समर्थन से बलूचों के खिलाफ दमनकारी गतिविधियों में शामिल हैं.
बलूच विद्रोह और सेना की नाकामी
बलूचिस्तान में कई दशकों से विद्रोही गतिविधियां चल रही हैं, जहां BLA (Baloch Liberation Army), BLF (Balochistan Liberation Front) जैसे संगठनों ने सेना के ठिकानों पर हमले किए हैं. 2025 में भी इन संगठनों ने कई हमलों की जिम्मेदारी ली है.
माना जा रहा है कि विद्रोही गतिविधियों को दबाने में विफल रहने पर पाकिस्तानी सेना आम नागरिकों पर कार्रवाई कर रही है, जिससे स्थानीय जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है.
गायब लोगों की कहानियाँ बेहद दर्दनाक
बलूचिस्तान में जबरन गायब किए गए लोगों की कहानियाँ बेहद दर्दनाक हैं. परिवारों को न उनके ठिकाने की जानकारी दी जाती है, न अदालत में पेश किया जाता है. कुछ लोगों की कब्रें पहाड़ों में मिलती हैं, तो कुछ की लाशें अमानवीय अवस्था में बरामद होती हैं.
कई मामलों में युवाओं को सिर्फ इस वजह से उठा लिया जाता है कि वे सोशल मीडिया पर सरकार या सेना की आलोचना कर रहे थे, या किसी प्रदर्शन में भाग लिया था.
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया: चुप्पी क्यों?
बलूचिस्तान में हो रहे मानवाधिकार हनन पर दुनिया भर के मानवाधिकार संगठनों ने पहले भी चिंता जताई है, लेकिन हाल की घटनाओं पर संयुक्त राष्ट्र, यूरोपीय यूनियन या अमेरिका जैसे देशों की ओर से कोई ठोस प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.
विश्लेषकों का मानना है कि पाकिस्तान की भौगोलिक स्थिति, चीन-पाक आर्थिक गलियारा (CPEC) और अफगानिस्तान सीमा की संवेदनशीलता के चलते कई देश इस मुद्दे पर खुलकर कुछ नहीं कहना चाहते.
हालांकि, एमनेस्टी इंटरनेशनल, ह्यूमन राइट्स वॉच जैसे संगठन समय-समय पर पाकिस्तान से जबरन गायब किए गए लोगों की सूची और रिपोर्टें जारी करते रहे हैं, लेकिन उन पर अमल होता दिखाई नहीं देता.
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