पाकिस्तान की सत्ता के गलियारों में इन दिनों एक नई बहस ने जोर पकड़ लिया है. वजह है — प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर के बार-बार हो रहे अमेरिका दौरे, और वहां की गईं कुछ ऐसी पेशकशें, जिन पर अब पाकिस्तानी संसद में ही सवाल उठने लगे हैं.
इन दौरों के दौरान अमेरिकी पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से हुई मुलाकात और उन्हें भेंट किए गए दुर्लभ खनिज अब विवादों में घिर गए हैं. इस पर सबसे तीखी प्रतिक्रिया दी है नेशनल असेंबली के सदस्य ऐमल वली खान ने, जिन्होंने सीधे संसद में इस पूरे घटनाक्रम पर न सिर्फ सवाल उठाया, बल्कि तीखा तंज भी कसा.
संसद में उठा सवाल: सेना प्रमुख किस हैसियत से ट्रंप को खनिज दे रहे हैं?
पाक सांसद ऐमल वली खान ने खुलकर कहा कि,आखिर किस अधिकार और भूमिका में जनरल आसिम मुनीर अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप को दुर्लभ खनिज दे रहे थे? यह कौन-सी कूटनीति है? उन्होंने इस पूरी मुलाकात को 'प्रोटोकॉल और संवैधानिक मर्यादाओं का उल्लंघन' बताया और साथ ही आरोप लगाया कि आसिम मुनीर एक सेल्समैन की तरह व्यवहार कर रहे थे, जो जैसे-तैसे कोई डील करवाने की कोशिश कर रहा हो.
शहबाज शरीफ पर भी कसा तंज
ऐमल वली खान ने प्रधानमंत्री पर भी निशाना साधते हुए कहा कि शहबाज शरीफ इस पूरे दृश्य में एक मैनेजर की भूमिका में खड़े थे, जो मूकदर्शक बनकर सब कुछ देख रहे थे. उन्होंने आगे कहा कि देश की कूटनीति और निर्णय शक्ति अब जनता के चुने प्रतिनिधियों के हाथ में नहीं रही, बल्कि सत्ता और विदेश नीति सीधे सैन्य प्रतिष्ठानों के माध्यम से संचालित हो रही है, जो पाकिस्तान के लोकतंत्र पर गंभीर सवाल खड़े करता है.
सोशल मीडिया पर वायरल हुई फोटो से बढ़ी चर्चा
इस विवाद को और हवा दी एक वायरल तस्वीर ने, जिसमें जनरल आसिम मुनीर और पीएम शहबाज शरीफ को व्हाइट हाउस में ट्रंप के साथ देखा गया. इस तस्वीर में मुनीर लकड़ी के एक खुले बॉक्स की ओर इशारा करते नजर आ रहे हैं, जिसमें कथित तौर पर पाकिस्तान के दुर्लभ खनिज रखे गए थे. यह फोटो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है — क्या ये खनिज राजनयिक सौगात थे या राजनीतिक सौदे की भूमिका?
क्या कहती है ये स्थिति पाकिस्तान की मौजूदा राजनीति के बारे में?
पाकिस्तान पहले ही राजनीतिक अस्थिरता, आर्थिक संकट और आंतरिक टकरावों से जूझ रहा है. ऐसे में शहबाज-मुनीर की अमेरिका यात्राएं और ट्रंप से मुलाकात जैसे कदम, देश के भीतर सत्ता के संतुलन पर नए सवाल खड़े कर रहे हैं. ऐमल वली खान का कहना है कि ये घटनाएं दिखाती हैं कि पाकिस्तान में लोकतंत्र नहीं, तानाशाही शासन चल रहा है. संसद की भूमिका केवल दिखावटी रह गई है.
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