इस्लामाबाद: पाकिस्तान में भीख मांगने की गतिविधियां अब एक बड़ी आर्थिक इंडस्ट्री में बदल चुकी हैं. हालिया रिपोर्टों के अनुसार, पाकिस्तान में भीख मांगने से जुड़ी कुल आमदनी लगभग 42 अरब डॉलर आंकी गई है, और इसमें शामिल लोगों की संख्या 3 करोड़ 80 लाख से अधिक है. यह आंकड़े यह दर्शाते हैं कि पाकिस्तान में भीख मांगना अब केवल गरीबी का परिणाम नहीं बल्कि एक व्यवस्थित और बड़े पैमाने पर चलने वाला उद्योग बन गया है.
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि पाकिस्तान दुनिया में भीख मांगने वाले लोगों का एक बड़ा सप्लायर बनकर उभरा है. सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और अन्य खाड़ी देशों में रहने वाले भिखारियों में 90 प्रतिशत से अधिक पाकिस्तानी पाए जाते हैं.
पाकिस्तान में भिखारियों की संख्या
पाकिस्तानी मीडिया और सामाजिक सर्वेक्षणों के अनुसार, पाकिस्तान की 23 करोड़ से अधिक आबादी में से लगभग 3.8 करोड़ लोग नियमित रूप से भिखारी हैं. इनमें से एक बड़ी संख्या देश के बाहर रहती है और खाड़ी देशों में वीजा लेकर भीख मांगने जाती है.
भिखारी आमतौर पर धार्मिक स्थलों, सड़कों, बाजारों और ट्रैफिक सिग्नलों पर काम करते हैं. खाड़ी देशों में मक्का, मदीना, दुबई, शारजाह और अबू धाबी जैसे बड़े शहरों में पाकिस्तानी भिखारियों की सबसे अधिक संख्या देखी जाती है. इन देशों में सरकारें अक्सर बड़े पैमाने पर भिखारियों को पकड़कर डिपोर्ट भी करती हैं, लेकिन इसके बावजूद संख्या अधिक बनी रहती है.
पाकिस्तान में भिखारियों की कमाई
रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान में भिखारियों की प्रतिदिन की कमाई शहरों के हिसाब से भिन्न है.
देशभर में औसत कमाई लगभग 850 रुपये प्रतिदिन आंकी गई है. भिखारियों की आय इस बात पर निर्भर करती है कि वे कहाँ और किस प्रकार की भीख मांगते हैं. धार्मिक स्थलों, सिग्नल और व्यस्त सड़क मार्गों पर भीख मांगने वाले भिखारियों की कमाई अपेक्षाकृत अधिक होती है.
किन शहरों में सबसे ज्यादा भिखारी
पाकिस्तान में सबसे ज्यादा भिखारियों की संख्या कराची में पाई जाती है. इसके पीछे मुख्य कारण हैं:
दूसरे स्थान पर लाहौर है. लाहौर में भिखारियों की संख्या अधिक होने का कारण उनकी कमाई के अवसर हैं.
इसके विपरीत, इस्लामाबाद में भिखारियों की संख्या अपेक्षाकृत कम है. इसके कारण हैं:
कई सार्वजनिक स्थानों पर भिखारियों की एंट्री पर प्रतिबंध लगाए गए हैं ताकि आम जनता और सरकारी कार्यों में व्यवधान न हो.
भीख मांगना कैसे बन गया व्यवस्थित उद्योग
विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तान में भीख मांगना अब सिर्फ आर्थिक तंगी या सामाजिक समस्या नहीं रह गया. इसमें व्यवस्थित नेटवर्क, विदेश में भेजने के लिए ट्रेनिंग, और पैसे की नियमित आवक-जावक जैसी व्यवस्थाएं शामिल हो गई हैं.
खाड़ी देशों में भिखारियों के लिए पाकिस्तानी एजेंसियां या स्थानीय नेटवर्क वीजा और आवास जैसी सुविधाएं भी मुहैया कराते हैं. इस तरह, यह अब एक लाखों करोड़ों डॉलर का व्यवसाय बन गया है, जो न केवल देश की छवि को प्रभावित कर रहा है, बल्कि समाज में असमानता और गरीबी की गंभीर तस्वीर भी पेश करता है.
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