जिनेवा: पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (POK) में जहां एक ओर पाकिस्तानी सेना और सुरक्षा बलों द्वारा भीषण हिंसा और दमन की खबरें सामने आ रही हैं, वहीं दूसरी ओर पाकिस्तान संयुक्त राष्ट्र के मंच पर खड़ा होकर मानवाधिकारों पर भाषण दे रहा है. यह विरोधाभास बुधवार को जिनेवा में आयोजित संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) की 60वीं बैठक में खुलकर सामने आया, जब भारत ने इस पर तीखा प्रतिवाद दर्ज कराया.
बैठक के दौरान भारतीय प्रतिनिधि मोहम्मद हुसैन ने पाकिस्तान को स्पष्ट शब्दों में लताड़ते हुए कहा, “यह अत्यंत विडंबनापूर्ण है कि एक ऐसा देश जो खुद अपने यहां अल्पसंख्यकों पर दमन करता है, वह दूसरों को मानवाधिकारों की शिक्षा देने का दुस्साहस करता है.” उन्होंने पाकिस्तान पर झूठ फैलाने और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर गलत जानकारी देने का आरोप लगाते हुए कहा कि इस्लामाबाद को सबसे पहले अपने घर के भीतर झांकने की जरूरत है.
POK और बलूचिस्तान में पाकिस्तान के अत्याचार
भारत ने यह बयान उस समय दिया जब POK में भारी तनाव और हिंसा की खबरें लगातार सामने आ रही हैं. हाल के महीनों में पाकिस्तान सरकार और सेना द्वारा इस क्षेत्र में शांतिपूर्ण आंदोलनों को कुचलने, इंटरनेट और संचार सेवाओं पर रोक लगाने और सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ाने जैसी कठोर कार्रवाइयों की खबरें मिली हैं.
'Deeply Ironic That Country With One Of World's Worst Human Rights Records Seeks To Lecture others' - 🇮🇳 SLAMS 🇵🇰 At UNHRC
— RT_India (@RT_India_news) October 1, 2025
Islamabad should instead "confront the rampant state-sponsored persecution and systematic discrimination of minorities," diplomat Mohammed Hussain added.… pic.twitter.com/gDddfipWOF
यूनाइटेड कश्मीर पीपुल्स नेशनल पार्टी (UKPNP) के प्रवक्ता नासिर अजीज खान ने जिनेवा में परिषद को संबोधित करते हुए बताया कि पाकिस्तान POK के प्राकृतिक संसाधनों का शोषण कर रहा है और स्थानीय नागरिकों की आवाज को दबाने के लिए बल प्रयोग कर रहा है. उन्होंने कहा कि रेंजर्स को तैनात किया जा रहा है, इंटरनेट बंद किया जा रहा है और विरोध जताने वाले लोगों को गिरफ्तार या गायब किया जा रहा है.
इसी तरह, बलूच नेशनल मूवमेंट (BNM) के मानवाधिकार संगठन ‘पांक’ की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2025 की पहली छमाही में बलूचिस्तान में 785 लोगों की जबरन गुमशुदगी और 121 लोगों की हत्याएं दर्ज की गई हैं. ये आंकड़े पाकिस्तान के सुरक्षा बलों द्वारा किए जा रहे कथित मानवाधिकार उल्लंघनों की भयावह तस्वीर पेश करते हैं.
पश्तूनों पर दमन और धार्मिक अल्पसंख्यकों की स्थिति
सिर्फ बलूच ही नहीं, पश्तून समुदाय भी पाकिस्तान की क्रूर नीतियों का शिकार हो रहा है. पश्तून अधिकार संगठनों के अनुसार, इस साल अब तक लगभग 4,000 पश्तून नागरिक लापता हैं. इन मामलों में पारदर्शिता नहीं है और कई परिवारों को अपने प्रियजनों के बारे में महीनों से कोई जानकारी नहीं मिली है.
इसके अलावा, धार्मिक अल्पसंख्यकों, विशेषकर अहमदिया समुदाय, हिंदू, ईसाई और शिया मुसलमानों को भी पाकिस्तान में उत्पीड़न का सामना करना पड़ रहा है. हाल ही में अमेरिका की संस्था USCIRF (यू.एस. कमीशन ऑन इंटरनेशनल रिलीजियस फ्रीडम) की वर्ष 2025 की रिपोर्ट में बताया गया है कि पाकिस्तान में 700 से अधिक लोग ईशनिंदा के आरोप में जेल में बंद हैं, जो कि पिछले वर्ष की तुलना में 300% की बढ़ोतरी दर्शाता है.
संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों ने भी पाकिस्तान को फटकारा
भारत की आपत्ति अकेली नहीं थी. संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार विशेषज्ञों ने भी जुलाई 2025 में पाकिस्तान सरकार को एक पत्र लिखकर धार्मिक अल्पसंख्यकों पर बढ़ते हमलों, गैर-न्यायिक हत्याओं और जबरन गायब किए जाने की घटनाओं को रोकने की मांग की थी. विशेषज्ञों ने इस पत्र में पाकिस्तान सरकार से आग्रह किया था कि वह धार्मिक स्थलों पर हो रहे हमलों पर भी नियंत्रण रखे और न्याय प्रणाली की निष्पक्षता सुनिश्चित करे.
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