हाल ही में पंजाब और हरियाणा से दो ऐसे जासूसी मामले सामने आए हैं, जिन्होंने यह स्पष्ट कर दिया कि पाकिस्तान से जुड़े हैंडलर सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए भारतीय नागरिकों को जासूस गतिविधियों में फंसा रहे हैं. इन घटनाओं में केवल बड़े या संवेदनशील पद पर बैठे लोग ही नहीं, बल्कि नाबालिग भी इस डिजिटल जाल का शिकार हो रहे हैं. पुलिस की प्रारंभिक जांच में यह भी पता चला है कि इमोशनल कमजोरियों, भरोसे और ऑनलाइन संपर्क के जरिए संवेदनशील जानकारियां हासिल की जा रही हैं.
नाबालिग का डिजिटल जाल
पंजाब के पठानकोट में एक 15 वर्षीय लड़के को गिरफ्तार किया गया है. पुलिस के अनुसार इस नाबालिग पर आरोप है कि उसने पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई, पाकिस्तानी सेना और आतंकवाद से जुड़े नेटवर्क से जुड़ी जानकारी साझा की. शुरुआती जांच में यह सामने आया कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से नाबालिग को धीरे-धीरे पाकिस्तान से जुड़े अकाउंट्स से जोड़ा गया.
पुलिस ने बताया कि पाकिस्तानी हैंडलरों ने नाबालिग को यह भरोसा दिलाने की कोशिश की कि उसके पिता की हत्या कर दी गई है. इस झूठी जानकारी ने उसके मानसिक और भावनात्मक स्थिति को प्रभावित किया, जिससे उसने बिना किसी संकोच के संवेदनशील जानकारियां साझा कीं. हालांकि, पुलिस ने इस हत्या के दावे का कोई ठोस सबूत नहीं पाया.
जांच में यह भी पता चला कि नाबालिग करीब एक साल तक पाकिस्तान से जुड़े लोगों के संपर्क में रहा और उसने संवेदनशील जगहों के वीडियो भी साझा किए. अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में लगी हैं कि उसने किस-किस से संपर्क किया, कितनी जानकारी साझा की और आगे की कार्रवाई इसी आधार पर की जाएगी.
एयरफोर्स से जुड़े ठेकेदार की गिरफ्तारी
पंजाब के मामले के बाद हरियाणा के अंबाला से भी एक महत्वपूर्ण मामला सामने आया. यहां एयरफोर्स स्टेशन में काम करने वाले ठेकेदार सुनील उर्फ सनी को जासूसी के आरोप में गिरफ्तार किया गया. पुलिस के अनुसार आरोपी 2020 से एयरफोर्स बेस पर मरम्मत का काम कर रहा था.
हरियाणा पुलिस के डीएसपी ने बताया कि आरोपी के बारे में पहले से इनपुट मिला था कि वह रक्षा क्षेत्र से संबंधित जानकारियां किसी को साझा कर रहा था. जांच के दौरान आरोपी का मोबाइल फोन जब्त किया गया, जिसमें कई संदिग्ध संदेश और जानकारी मिली. पुलिस के अनुसार आरोपी एक महिला के संपर्क में था, जो उससे जानकारियां मांगती और उन्हें आगे भेजती थी.
डिजिटल हनीट्रैप का खतरा
ये दोनों मामले स्पष्ट रूप से दिखाते हैं कि पाकिस्तान डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करके भारतीय नागरिकों, यहां तक कि नाबालिगों को भी अपनी जासूसी गतिविधियों का हिस्सा बना रहा है. इसमें सबसे ज्यादा इस्तेमाल किए जाने वाले तरीके हैं:
पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां लगातार ऐसे मामलों की जांच कर रही हैं और लोगों को इस तरह के डिजिटल जाल से सावधान रहने की चेतावनी दे रही हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि युवाओं और नाबालिगों को सोशल मीडिया पर अपनी जानकारियों के प्रति ज्यादा सतर्क रहना चाहिए, और किसी भी अज्ञात या संदिग्ध संपर्क से दूरी बनानी चाहिए.
ये भी पढ़ें- महिलाओं के लिए देश का कौन सा शहर सबसे सुरक्षित? टॉप 10 में UP-बिहार के एक भी नहीं, देखें लिस्ट