Pakistani Terrorist Organizations: पाकिस्तान के बहावलपुर में हाल ही में आयोजित एक धार्मिक कार्यक्रम के दौरान दो कुख्यात आतंकी संगठनों, लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद की गुप्त गतिविधियों का खुलासा हुआ है. इस कथित बैठक ने भारतीय सुरक्षा तंत्र की चिंताओं को और बढ़ा दिया है, क्योंकि इसे भारत के खिलाफ नई साजिश की तैयारी के संकेत के रूप में देखा जा रहा है. इसी कारण भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने नियंत्रण रेखा और अंतरराष्ट्रीय सीमा पर कड़ा निगरानी तंत्र सक्रिय कर दिया है.
लश्कर-ए-तैयबा का डिप्टी चीफ सैफुल्लाह कसूरी बहावलपुर में आयोजित एक धार्मिक कार्यक्रम में मौजूद था. यही वह शहर है जिसे जैश-ए-मोहम्मद के संस्थापक मसूद अजहर का प्रमुख ठिकाना माना जाता है. बताया जाता है कि कसूरी जलसे में शामिल होने के साथ-साथ मसूद अजहर से भी मिला, जो इस क्षेत्र में उसके नियमित दौरों का हिस्सा है.
पहले भी कई बार देखा गया है कि भारत पर हमलों से पहले दोनों नेताओं की मुलाकातें बढ़ जाती हैं. पहलगाम हमले से पहले भी ऐसे संपर्क स्थापित होने की जानकारी सामने आई थी, जिससे इन बैठकों को अत्यधिक संवेदनशील माना जाता है.
‘सीरत-ए-नबी’ जलसे में महिला जिहादियों की मौजूदगी ने बढ़ाई चिंता
बहावलपुर के जामिया उम्म अब्दुल अजीज में आयोजित इस धार्मिक सभा का उद्देश्य आधिकारिक रूप से इस्लामी शिक्षा बताया गया था. कार्यक्रम का नाम ‘सीरत-ए-नबी और सहीह बुखारी’ रखा गया था, लेकिन इसकी आड़ में कई संदिग्ध तत्वों की मौजूदगी नोट की गई.
सबसे अधिक चिंता का विषय यह है कि इस जलसे में कथित रूप से महिला जिहादियों को भी शामिल देखा गया, जो इस बात का संकेत है कि आतंकी संगठन महिलाओं को भी अपने ऑपरेशनों में अधिक सक्रिय रूप से जोड़ने की तैयारी कर रहे हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि यह संगठन अपनी रणनीतियों में बदलाव कर रहा है और भविष्य में हाई-प्रोफाइल हमलों में महिलाओं की भूमिका भी बढ़ सकती है.
कसूरी-अजहर की मुलाकात में छिपी साजिश की आशंका
कसूरी और अजहर की बैठक को भारतीय सुरक्षा एजेंसियाँ अत्यंत गंभीरता से ले रही हैं. इन दोनों की मुलाकातें अक्सर बड़े आतंकी प्लान का हिस्सा मानी जाती हैं, विशेषकर भारत को निशाना बनाने वाली गतिविधियों के संदर्भ में.
सुरक्षा अधिकारियों के मुताबिक, जब भी इन दोनों आतंकी नेताओं की बातचीत में तेज़ी आती है, उसी दौरान सीमा पर घुसपैठ और आतंकी मूवमेंट का खतरा बढ़ जाता है. इसलिए किसी संभावित हमले की तैयारी को ध्यान में रखते हुए ऑपरेशनल यूनिट्स को सतर्क कर दिया गया है.
भारतीय सुरक्षा तंत्र की त्वरित प्रतिक्रिया और सीमाओं पर कड़ा पहरा
जैसे ही दोनों संगठनों की गतिविधियों की जानकारी सामने आई, भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी. सीमा सुरक्षा बलों को चौकसी बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं और खुफिया इकाइयाँ संभावित आतंकी मूवमेंट पर पैनी नजर रख रही हैं.
उत्तरी और पश्चिमी सीमाओं पर तैनात टीमें ड्रोन सर्विलांस, सेंसर-आधारित सुरक्षा प्रणाली और मानवीय खुफिया नेटवर्क का इस्तेमाल कर किसी भी संदिग्ध गतिविधि को ट्रैक करने का प्रयास कर रही हैं.
भारत के खिलाफ संभावित योजनाओं पर कड़ी निगरानी
वर्तमान स्थिति को देखते हुए यह स्पष्ट है कि लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद एक बार फिर क्षेत्र में सक्रियता बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं. दोनों आतंकी नेटवर्क लंबे समय से भारत के खिलाफ हिंसक अभियानों में शामिल रहे हैं और उनके शीर्ष कमांडरों की हर मुलाकात को संभावित खतरे के रूप में देखा जाता है. एजेंसियां इस बात की जांच कर रही हैं कि क्या हालिया बैठक किसी नए हमले की रूपरेखा का हिस्सा है या भारत के भीतर किसी बड़े नेटवर्क को सक्रिय करने की तैयारी की जा रही है.
यह भी पढ़ें- कथावाचक इंद्रेश उपाध्याय और उनकी पत्नी से अक्षरा सिंह ने क्यों मांगी माफी, देंखे VIDEO