Pakistan Bangladesh Relations: पाकिस्तान में स्थिति लगातार जटिल होती जा रही है. उन आतंकवादी और कट्टरपंथी संगठनों के लिए, जिन्हें लंबे समय तक पाकिस्तान की सरकार ने अपने राजनीतिक और धार्मिक एजेंडे के लिए पोषित किया, अब वही संगठन खुद इस्लामाबाद के लिए बड़ी चुनौती बनते जा रहे हैं. इसका ताजा उदाहरण तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान (टीएलपी) पर लगाई गई पाबंदी है.
टीएलपी को पाकिस्तान सरकार ने पहले सक्रिय रूप से समर्थन दिया था ताकि धार्मिक एजेंडे को आगे बढ़ाया जा सके. लेकिन अब यह संगठन हिंसक गतिविधियों में लिप्त हो गया है. टीएलपी समर्थकों ने हाल ही में गाजा एकजुटता मार्च निकाला, जो जल्दी ही हिंसक रूप धारण कर गया. सुरक्षा बलों के साथ भिड़ंत के दौरान कई लोग मारे गए. खासकर मुरीदके में हुई झड़प ने यह स्पष्ट कर दिया कि कट्टरपंथी संगठन अब सरकार के लिए गंभीर खतरा बन चुके हैं.
पाकिस्तान की इस स्थिति से यह साफ हो गया है कि अपनी जमीन पर धार्मिक कट्टरपंथी तत्वों को नियंत्रित करना सरकार के लिए मुश्किल होता जा रहा है. टीएलपी जैसे संगठनों की हिंसक गतिविधियों ने न केवल आंतरिक सुरक्षा को खतरे में डाला है, बल्कि पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय छवि पर भी असर डाला है.
बांग्लादेश में पाकिस्तान का बढ़ता हस्तक्षेप
वहीं, पाकिस्तान अपनी नीतियों को बांग्लादेश तक बढ़ा रहा है. हाल के समय में बांग्लादेश में पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई की सक्रियता बढ़ी है. आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी आर्मी (IRA) के पहले चरण का काम शुरू हो चुका है. IRA को बांग्लादेशी सेना और सुरक्षा एजेंसियों के बजाय ISI के माध्यम से प्रशिक्षित किया जा रहा है. इसका उद्देश्य बांग्लादेश में एक ऐसी सेना तैयार करना है जो पाकिस्तान के निर्देशों के अनुसार काम करे.
ISI बांग्लादेश में शरिया कानून लागू कराने और कट्टर इस्लामिक व्यवस्था स्थापित करने के लिए IRA को प्रशिक्षित कर रहा है. इसमें महिलाओं के अधिकारों पर नियंत्रण और ईरान के धार्मिक मॉड्यूल की तर्ज पर नियम लागू करने की भी योजना है. इन कदमों से यह संकेत मिलता है कि बांग्लादेश धीरे-धीरे एक इस्लामिक राष्ट्र की दिशा में बढ़ रहा है.
राजनीतिक और क्षेत्रीय प्रभाव
भारत के दृष्टिकोण से यह स्थिति चिंता का विषय है. बांग्लादेश की राजनीतिक व्यवस्था और पाकिस्तान के धार्मिक कट्टरपंथी एजेंडा में बढ़ता हस्तक्षेप भारत के सुरक्षा हितों को प्रभावित कर सकता है. हालांकि, बांग्लादेश के कुछ नेताओं ने साफ किया है कि वे भारत के साथ अच्छे पड़ोसी संबंध बनाए रखना चाहते हैं. जमात-ए-इस्लामी के नेता डॉ. शफीकुर रहमान ने हाल ही में कहा कि भारत के विशाल भूभाग और जनसंख्या का सम्मान करना बांग्लादेश के लिए आवश्यक है. उन्होंने यह भी जोड़ा कि यदि भारत और बांग्लादेश आपसी सम्मान के साथ संबंध बनाए रखते हैं, तो दोनों देशों को वैश्विक स्तर पर भी लाभ होगा.
हालांकि, बांग्लादेश में ISI और IRA की गतिविधियों को देखते हुए यह अंदेशा है कि धार्मिक कट्टरपंथी ताकतें धीरे-धीरे वहां प्रभाव बढ़ा रही हैं. इससे न केवल बांग्लादेश के आंतरिक स्थायित्व पर असर पड़ेगा, बल्कि क्षेत्रीय सुरक्षा और भारत के लिए भी खतरे की घंटी बन सकता है.
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