पाकिस्तान, जो खुद को इस्लामिक दुनिया का नेतृत्वकर्ता मानने का सपना संजो रहा है, आर्थिक मोर्चे पर लगातार फिसलता चला जा रहा है. हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि एक के बाद एक दुनिया की बड़ी कंपनियां इस देश से अपना कारोबार समेट रही हैं. अब इस कड़ी में शैम्पू से लेकर शेविंग क्रीम तक बनाने वाली दिग्गज अमेरिकी कंपनी प्रॉक्टर एंड गैंबल (P&G) ने भी पाकिस्तान से बाहर निकलने का फैसला कर लिया है.
P&G ने अपने फैसले को ग्लोबल रिस्ट्रक्चरिंग प्रोग्राम का हिस्सा बताया है. कंपनी ने अप्रैल 2025 में इस योजना की घोषणा की थी, जिसमें उन्होंने दुनियाभर के “चुनौतीपूर्ण बाजारों” से बाहर निकलने की बात कही थी. दुर्भाग्य से, पाकिस्तान को भी उसी श्रेणी में रखकर P&G ने अपना लोकल ऑपरेशन बंद कर दिया है. कंपनी ने रेजर डिवीजन जिलेट पाकिस्तान समेत अपनी सभी प्रोडक्शन और कमर्शियल गतिविधियां रोक दी हैं.
जनता की चिंता: अब साबुन और डिटर्जेंट भी होगा 'लग्ज़री'?
P&G के अचानक चले जाने से पाकिस्तानी उपभोक्ताओं में बेचैनी का माहौल है. सोशल मीडिया पर लोग लगातार सवाल पूछ रहे हैं कि अब उन्हें साबुन, शेविंग क्रीम और डिटर्जेंट जैसे बुनियादी उत्पाद कैसे मिलेंगे? लाहौर के एक यूजर ने एक्स पर लिखा, 24 करोड़ लोगों को अब भी साबुन और शेविंग क्रीम की ज़रूरत है. ये फैसला समझ से बाहर है. इसी तरह इस्लामाबाद के इंजीनियर जावेद इकबाल ने भी शिकायत की कि उन्हें पिछले कई महीनों से जिलेट रेजर नहीं मिल रहा. उन्होंने इसे चीनी कंपनियों के सस्ते विकल्पों से बेहतर बताया.
क्या अब घरेलू ज़रूरतें भी इंपोर्ट होंगी?
हिना सफी नाम की एक यूजर ने सवाल उठाया –क्या अब पाकिस्तान को एरियल, पैंटीन, पैम्पर्स और विक्स जैसे रोज़मर्रा के उत्पाद भी इंपोर्ट करने पड़ेंगे?एक अन्य पोस्ट ने चुटकी लेते हुए लिखा P&G का प्रवक्ता कहता है – पाकिस्तानियों की नहाने और कपड़े धोने की आदत नहीं, इसलिए बिक्री कम हुई
क्यों भाग रही हैं बड़ी कंपनियां?
पूर्व जिलेट एग्जीक्यूटिव साद अमानुल्लाह खान का मानना है कि कंपनियों के इस पलायन के पीछे ऊंची बिजली लागत, रेगुलेटरी दबाव, बदहाल बुनियादी ढांचा और लगातार गिरती अर्थव्यवस्था जिम्मेदार है.उन्होंने उम्मीद जताई कि अब शायद सरकार को जमीनी हालात का अंदाज़ा हो. अकेले P&G नहीं, ये कंपनियां भी कर चुकी हैं विदाई.
पिछले दो वर्षों में कई अंतरराष्ट्रीय कंपनियां पाकिस्तान से नाता तोड़ चुकी हैं:
वादों के उलट, हकीकत कड़वी
पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री इशाक डार ने हाल ही में दावा किया कि देश 57 इस्लामिक देशों की अगुवाई करने को तैयार है. लेकिन जमीनी हकीकत ये है कि बाजार से विश्वास उठ चुका है, और निवेशक अब पाकिस्तान को जोखिम भरा बाजार मानते हैं.
क्या कहता है भविष्य?
भले ही P&G ने अपने कुछ प्रोडक्ट्स को थर्ड पार्टी डिस्ट्रीब्यूशन के ज़रिए उपलब्ध रखने की बात कही है, लेकिन ये भी तय है कि स्थायी समाधान तब तक नहीं मिल सकता, जब तक पाकिस्तान में आर्थिक और राजनीतिक स्थिरता नहीं आती.जब तक बुनियादी समस्याओं का हल नहीं होगा, बहुराष्ट्रीय कंपनियों का पलायन जारी रहेगा.
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