पाकिस्तान इन दिनों आर्थिक संकट, सुरक्षा चुनौतियों और राजनीतिक उथल-पुथल के बीच फंसा हुआ है. लेकिन इन सबके बावजूद सत्ता के गलियारों में ऐसा कदम उठा लिया गया, जिसने पूरे देश के गुस्से को सड़क पर ला दिया है.
सेना प्रमुख और ‘फ्लॉप फील्ड मार्शल’ कहे जाने वाले जनरल आसिम मुनीर को संविधान में बदलाव कर अभूतपूर्व शक्तियां दे दी गईं. इस संशोधन ने पाकिस्तान की न्यायिक और प्रशासनिक संरचना को झकझोर कर रख दिया है और अब कराची से लेकर पूरे देश में वकील खुलकर बगावत कर रहे हैं.
विवादित संशोधन के खिलाफ कराची में हाईकोर्ट के बाहर वकीलों का विस्फोटक प्रदर्शन
कराची बार एसोसिएशन के सदस्य शनिवार को सिंध हाईकोर्ट पहुंचे और वहां 27वें संवैधानिक संशोधन के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया. यह वही संशोधन है जिसने सेना को मजबूत और अन्य संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करने का रास्ता तैयार किया है. स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, प्रदर्शन इतना उग्र हो गया कि वकीलों और पुलिस के बीच हाथापाई तक हो गई. कई पुलिसकर्मियों ने आरोप लगाया कि वकीलों ने उनकी वर्दी तक फाड़ डाली. हालात बिगड़ने पर पुलिस को पीछे हटना पड़ा और प्रदर्शनकारियों को कोर्ट परिसर में घुसने से रोक नहीं सके.
मुनीर को ‘अमर शक्तियां’ देने वाला संशोधन क्यों बना इतना बड़ा मुद्दा?
इस विवाद के केंद्र में है फेडरल कॉन्स्टिट्यूशनल कोर्ट (FCC) का गठन, जिसे सेना समर्थित सरकार ने विपक्ष की आपत्तियों को दरकिनार करते हुए पास कर दिया. कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार यह कदम पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट को कमजोर करने और उसकी शक्तियां कम करके एक नई अदालत को सर्वोच्च बनाकर पेश करने की कोशिश है. इसी मुद्दे पर 13 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट के दो वरिष्ठ जज अतहर मिनल्लाह और मंसूर अली शाह—ने तत्काल इस्तीफा दे दिया था. उनका साफ कहना था कि यह संशोधन पाकिस्तान की न्याय व्यवस्था पर सीधा हमला है.
हाईकोर्ट में नारेबाजी, बिजली कटौती और पुलिस-वकील टकराव
शनिवार के प्रदर्शन के दौरान वकीलों ने सिंध हाईकोर्ट के बाहर नारे लगाए. बाद में कोर्ट परिसर में घुसकर विरोध तेज किया. पुलिस के साथ धक्का-मुक्की की. हाईकोर्ट बार एसोसिएशन हॉल में बैठकर प्रदर्शन जारी रखा. डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक झड़प में कुछ पुलिसकर्मी घायल हुए. बिजली सप्लाई काटे जाने के बाद भी वकील बार रूम के बाहर धरना देते रहे.
न्यायपालिका की एकजुट हड़ताल, अदालतें ठप
कराची बार एसोसिएशन ने पिछले पूरे हफ्ते. सेवानिवृत्त जजों के समर्थन में हड़ताल की. सोमवार को शहर की अदालतों में काम रोक दिया और कोर्ट परिसर में केस करने वालों को अंदर घुसने से रोक दिया. बार एसोसिएशन ने पहले ही घोषणा कर दी थी कि मंगलवार से शनिवार तक रोज सुबह 11 बजे टोकन स्ट्राइक की जाएगी—और अब यह विरोध एक आंदोलन का रूप लेता जा रहा है.
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