भीख मांगते-मांगते अमेरिका तक पहुंच गया पाकिस्तान, शशि थरूर के सामने हुई बिलावल की बेइज्जती, देखें

हाल ही में भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़े तनाव के बीच अमेरिका में दोनों देशों के कूटनीतिक प्रयासों ने वैश्विक मंच पर अलग-अलग तस्वीर पेश की.

Pakistan reached America begging for alms
प्रतीकात्मक तस्वीर/Photo- ANI

वॉशिंगटन: हाल ही में भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़े तनाव के बीच अमेरिका में दोनों देशों के कूटनीतिक प्रयासों ने वैश्विक मंच पर अलग-अलग तस्वीर पेश की. एक ओर भारत ने आतंकवाद के खिलाफ अपने सख्त रुख के लिए व्यापक समर्थन हासिल किया, वहीं पाकिस्तान को न केवल कड़े सवालों का सामना करना पड़ा बल्कि उसे अपनी सुरक्षा जरूरतों के लिए भी सार्वजनिक तौर पर गुहार लगानी पड़ी.

भारत का कूटनीतिक एजेंडा:

भारत ने हालिया सैन्य कार्रवाई 'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद दुनिया भर में एक स्पष्ट कूटनीतिक अभियान शुरू किया. भारत के उद्देश्य दो प्रमुख थे:

  • पहलगाम आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान के आतंकी नेटवर्क को उजागर करना.
  • आतंकवाद के खिलाफ भारत के रुख को वैश्विक समर्थन दिलाना.

भारत का प्रतिनिधिमंडल, जिसकी अगुवाई कांग्रेस सांसद शशि थरूर कर रहे थे, अमेरिका पहुंचा और वहां उच्च स्तरीय बैठकों में भाग लिया. अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, उप विदेश मंत्री क्रिस्टोफर लैंडौ और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने भारत की आतंकवाद विरोधी नीति का खुलकर समर्थन किया. वेंस ने पहलगाम हमले को 'अस्वीकार्य' बताते हुए भारत के संयमित जवाब की सराहना की और ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत की भूमिका को जिम्मेदार और आवश्यक बताया.

पाकिस्तान का कठिन संवाद

भारत के समानांतर पाकिस्तान ने भी अमेरिका में अपने प्रतिनिधिमंडल को भेजा, जिसका नेतृत्व बिलावल भुट्टो जरदारी ने किया. पाकिस्तान का उद्देश्य था अपनी सुरक्षा चिंताओं को अमेरिका के समक्ष रखना, लेकिन उनकी बातचीत का स्वरूप अपेक्षा से अलग रहा. कई अमेरिकी अधिकारियों ने पाकिस्तान के प्रतिनिधिमंडल के समक्ष आतंकवाद से निपटने में विफलता के गंभीर सवाल उठाए.

अमेरिकी कांग्रेस सदस्य ब्रैड शेरमन ने कड़े शब्दों में पाकिस्तान को जैश-ए-मोहम्मद जैसे आतंकी संगठनों के खिलाफ ठोस कार्रवाई करने की सलाह दी. शेरमन ने 2002 में पत्रकार डेनियल पर्ल की हत्या का संदर्भ देते हुए आतंकवाद के खिलाफ पाकिस्तान की लचर नीति पर सवाल उठाया. इसके अलावा, उन्होंने शकील अफरीदी की रिहाई का मुद्दा भी पाकिस्तान के समक्ष मजबूती से उठाया, जिन्होंने ओसामा बिन लादेन का पता लगाने में अमेरिका की मदद की थी.

अमेरिका से सुरक्षा सहायता की अपील

इन बैठकों के दौरान पाकिस्तान के संघीय मंत्री मुसादिक मलिक अमेरिका से हवाई सुरक्षा प्रणाली और लड़ाकू विमानों की मांग करते हुए देखे गए. मलिक ने तर्क दिया कि भारत के पास अत्याधुनिक वायु शक्ति है और पाकिस्तान को अपनी सुरक्षा व्यवस्था को बेहतर करने के लिए अमेरिकी सहायता की आवश्यकता है. यह अपील न केवल पाकिस्तान की सुरक्षा चिंताओं को उजागर करती है बल्कि उसकी सीमित रणनीतिक स्थिति भी दर्शाती है.

भारत को कूटनीतिक बढ़त

अमेरिका में दोनों देशों की कूटनीतिक सक्रियताओं के बाद यह स्पष्ट हो गया कि भारत को जहां मजबूत अंतरराष्ट्रीय समर्थन प्राप्त हुआ, वहीं पाकिस्तान को आतंकवाद पर अपनी स्थिति को सही ठहराने में कठिनाई हुई. भारत के पक्ष को अमेरिकी अधिकारियों ने गंभीरता से स्वीकार किया और पाकिस्तान की नीतियों पर सख्त सवाल खड़े किए गए.

भारत का यह कूटनीतिक अभियान इस बात का प्रमाण है कि केवल सैन्य शक्ति नहीं, बल्कि वैश्विक मंच पर भरोसेमंद और स्थिर साझेदार के रूप में भारत की छवि लगातार मजबूत हो रही है.

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