'मुस्लिम सुपरपावर का हो रहा उदय', सऊदी से डील कर उछल रहा पाकिस्तान; भारत को धमकाने की कर रहा नाकाम कोशिश

सऊदी अरब के साथ हाल ही में हुए रक्षा समझौते के बाद पाकिस्तान के नेता एक बार फिर बयानबाज़ी पर उतर आए हैं, जिसमें वे भारत को घुमा-फिराकर चेतावनी देने की कोशिश कर रहे हैं. जहां एक ओर पाकिस्तान आर्थिक संकट की मार झेल रहा है.

Pakistan Remarks on superpower emerging after meeting with saudi arabia
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सऊदी अरब के साथ हाल ही में हुए रक्षा समझौते के बाद पाकिस्तान के नेता एक बार फिर बयानबाज़ी पर उतर आए हैं, जिसमें वे भारत को घुमा-फिराकर चेतावनी देने की कोशिश कर रहे हैं. जहां एक ओर पाकिस्तान आर्थिक संकट की मार झेल रहा है. लोग रोज़मर्रा की ज़रूरतों के लिए संघर्ष कर रहे हैं—वहीं दूसरी ओर सत्ता के गलियारों में इसे एक ‘नई मुस्लिम महाशक्ति’ के तौर पर पेश किया जा रहा है.

पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के राजनीतिक सलाहकार राणा सनाउल्लाह ने जियो न्यूज के चर्चित शो ‘जिरगा’ में इस रक्षा करार को ‘मुस्लिम एकता’ की दिशा में एक बड़ा कदम बताया. उन्होंने कहा कि "पाकिस्तान की परमाणु क्षमता और सऊदी अरब की आर्थिक शक्ति मिलकर एक उभरती हुई शक्ति का निर्माण कर रही हैं, जो मुस्लिम दुनिया के लिए एक मजबूत संकेत है." सनाउल्लाह ने दावा किया कि यह साझेदारी केवल सैन्य उत्पादन तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि संकट के समय दोनों देश एक-दूसरे की रक्षा में खड़े रहेंगे.

भारत पर अप्रत्यक्ष निशाना, NATO जैसा मॉडल बताया गया

इस समझौते को लेकर पाकिस्तानी नेतृत्व इसे भारत के खिलाफ एक रणनीतिक कवच के तौर पर पेश करने में जुटा है. नेताओं के बयानों में इसे ऐसा दिखाने की कोशिश की जा रही है कि जैसे अगर भारत पाकिस्तान पर हमला करता है, तो सऊदी अरब उसकी मदद को आगे आएगा. राणा सनाउल्लाह ने इस समझौते की तुलना NATO (नाटो) जैसी व्यवस्था से करते हुए कहा कि "यह रक्षा गठबंधन वैश्विक स्तर पर एक नई मिसाल बन सकता है और अमेरिका को इससे आपत्ति नहीं होनी चाहिए." उन्होंने आगे कहा कि यह करार पाकिस्तान की वैश्विक भूमिका को और सशक्त करने वाला कदम है.

विदेश मंत्रालय ने दी सफाई: समझौता है रक्षात्मक

हालांकि पाकिस्तानी विदेश कार्यालय के प्रवक्ता शफकत अली खान ने इस समझौते पर सफाई देते हुए कहा कि यह किसी तीसरे देश के खिलाफ नहीं है और इसका मकसद केवल आपसी सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता को मजबूत करना है. उन्होंने इसे दोनों देशों के बीच पहले से मौजूद सैन्य सहयोग का ही औपचारिक रूप बताया.

जमीनी हकीकत कुछ और कहती है

जहां एक ओर पाकिस्तानी नेता इस समझौते को नई मुस्लिम महाशक्ति के गठन का संकेत बता रहे हैं, वहीं उनके अपने देश में हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं. आर्थिक मंदी, महंगाई और बेरोज़गारी से जूझ रही आम जनता को राहत देने की बजाय, सरकार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बयानबाज़ी और शक्ति प्रदर्शन में व्यस्त दिखाई देती है.

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