पाकिस्तान की चिंता बढ़ना तय! भारत-अफगानिस्तान के बीच गहराती मित्रता से बलूच खुश, किया बड़ा ऐलान

Balochs On India-Afgan Ties: दक्षिण एशिया की बदलती राजनीतिक और भू-रणनीतिक परिस्थितियों में भारत और अफगानिस्तान के संबंधों में जो हालिया सुधार देखने को मिला है, उसे न केवल दोनों देशों के लिए, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

Pakistan tension escalate Balochs are delighted friendship between India and Afghanistan
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Balochs On India-Afgan Ties: दक्षिण एशिया की बदलती राजनीतिक और भू-रणनीतिक परिस्थितियों में भारत और अफगानिस्तान के संबंधों में जो हालिया सुधार देखने को मिला है, उसे न केवल दोनों देशों के लिए, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है. इस कूटनीतिक समीकरण पर बलूच नेताओं ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है और भारत की अफगानिस्तान में की जा रही पहलों की खुले तौर पर सराहना की है.

बलूचिस्तान, जो पाकिस्तान से अलग होकर स्वतंत्र राष्ट्र बनने की मांग कर रहा है, लंबे समय से पाकिस्तानी सैन्य दमन और शोषण का सामना कर रहा है. इन हालात में बलूच नेताओं की ओर से भारत की अफगान नीति का स्वागत, एक राजनीतिक और कूटनीतिक संकेत के रूप में देखा जा रहा है.

मीर यार बलूच का बयान, भारत का समर्थन और आभार

बलूच नेता मीर यार बलूच ने हाल ही में मीडिया को दिए एक बयान में कहा कि स्वतंत्र बलूचिस्तान गणराज्य अफगानिस्तान को विकास और मानवीय सहायता देने के लिए भारत का आभार व्यक्त करता है. उन्होंने कहा कि भारत का यह कदम क्षेत्रीय सहयोग और स्थिरता के लिए एक सकारात्मक प्रतीक है.

बलूचिस्तान की ओर से जारी आधिकारिक बयान में विशेष रूप से अफगान विदेश मंत्री आमिर खान मुत्तकी की दिल्ली यात्रा की सराहना की गई है. यह यात्रा उस समय हुई जब भारत और अफगानिस्तान के बीच कूटनीतिक और मानवीय सहयोग को पुनर्जीवित करने की कोशिश की जा रही है.

भारत की अफगान नीति की सराहना

बलूच नेताओं ने भारत द्वारा अफगानिस्तान में की गई मानवीय और विकासात्मक पहलों की विस्तार से प्रशंसा की. इस समर्थन में 20 एम्बुलेंस की आपूर्ति, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे के विकास कार्यक्रम, हवाई संपर्क को पुनर्स्थापित करने की कोशिशें, अफगान नागरिकों, छात्रों और उद्यमियों के लिए वीज़ा प्रक्रिया को सरल बनाना और काबुल में भारत के तकनीकी मिशन को सक्रिय रखना शामिल हैं.  बलूच नेताओं का मानना है कि ये सभी प्रयास अफगानिस्तान की स्थिरता, संप्रभुता और आत्मनिर्भरता को मजबूत करने में सहायक होंगे.

पाकिस्तान को स्पष्ट संदेश

बलूच नेता मीर यार बलूच और अन्य नेताओं ने यह भी कहा कि भारत और अफगानिस्तान का यह बढ़ता सहयोग पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद और सैन्य हस्तक्षेप के विरुद्ध एक स्पष्ट और ठोस रणनीति है. उनके बयान में कहा गया, "भारत और अफगानिस्तान के बीच यह नया संवाद केवल द्विपक्षीय संबंधों की मजबूती नहीं, बल्कि पाकिस्तान को यह दिखाने का भी जरिया है कि उसके विस्तारवादी और अस्थिरता फैलाने वाले प्रयास अब अस्वीकार्य हैं."

बलूच नेताओं ने यह भी स्पष्ट किया कि अफगानिस्तान या भारत के खिलाफ किसी भी प्रकार की पाकिस्तानी सैन्य गतिविधियों को बलूचिस्तान की धरती पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. उन्होंने अफगान लोगों को आश्वस्त किया कि बलूच क्षेत्र को कभी भी इस तरह के हमलों या धमकियों के लिए प्लेटफॉर्म के रूप में इस्तेमाल नहीं होने दिया जाएगा.

क्षेत्रीय स्थिरता का समर्थक

बलूच नेताओं ने अपने बयान में बलूचिस्तान को एक "प्राकृतिक क्षेत्रीय प्रवेश द्वार" बताते हुए कहा कि यदि स्वतंत्रता मिलती है, तो बलूचिस्तान न केवल एक स्थायी लोकतंत्र के रूप में उभरेगा, बल्कि क्षेत्रीय शांति और व्यापार का भी एक नया केंद्र बनेगा.

उन्होंने कहा, "बलूचिस्तान न केवल अफगानिस्तान के लिए, बल्कि भारत और अन्य पड़ोसी देशों के लिए भी एक सुरक्षित और सहयोगी पड़ोसी बनने की क्षमता रखता है. हम पाकिस्तान की सैन्य नीतियों का हिस्सा नहीं हैं और न ही रहेंगे."

भारत की अफगानिस्तान नीति

भारत ने बीते कुछ वर्षों में अफगानिस्तान के साथ अपने संबंधों को व्यावहारिक दृष्टिकोण से आगे बढ़ाया है. तालिबान के सत्ता में आने के बाद, हालांकि भारत ने अब तक उन्हें आधिकारिक मान्यता नहीं दी है, लेकिन काबुल में "टेक्निकल मिशन" के रूप में अपनी उपस्थिति बनाए रखी है.

भारत का ध्यान मुख्य रूप से मानवीय सहायता, पुनर्निर्माण और शिक्षा-स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में सहयोग पर है. भारत ने अब तक हजारों टन गेहूं, दवाएं और जरूरी सामान अफगानिस्तान को भेजा है, ज़ारंज-देलाराम रोड, सलमा डैम, अफगान संसद भवन जैसे महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा प्रोजेक्ट पूरे किए हैं. अब मुत्तकी की भारत यात्रा और उससे जुड़े संकेत यह बताते हैं कि दोनों देश दुबारा सक्रिय कूटनीतिक संवाद की दिशा में बढ़ रहे हैं.

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