चीन के हथियार बेचकर पैसा कमा रहा पाकिस्तान, अब गृहयुद्ध की आग में जल रहे सूडान से करेगा JF-17 का सौदा

पाकिस्तान अपनी सैन्य ताकत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैलाने की रणनीति पर काम कर रहा है. सूडान और लीबिया जैसे देशों में बढ़ती सैन्य मौजूदगी और हथियारों की बिक्री से पाकिस्तान का उद्देश्य न केवल अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूती देना है, बल्कि अपनी भूमिका को वैश्विक रक्षा बाजार में मजबूत बनाना भी है.

Pakistan to sell weapons to war-torn Sudan Shahbaz and Munir eye profits from Made in China JF-17
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नई दिल्ली: पाकिस्तान अपनी सैन्य ताकत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैलाने की रणनीति पर काम कर रहा है. सूडान और लीबिया जैसे देशों में बढ़ती सैन्य मौजूदगी और हथियारों की बिक्री से पाकिस्तान का उद्देश्य न केवल अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूती देना है, बल्कि अपनी भूमिका को वैश्विक रक्षा बाजार में मजबूत बनाना भी है. हालिया रिपोर्टों के मुताबिक, पाकिस्तान सूडान को लड़ाकू विमान और अन्य सैन्य साजो-सामान बेचने के लिए एक बड़े सौदे की तैयारी में है. इससे न सिर्फ सूडान के गृहयुद्ध पर असर पड़ सकता है, बल्कि पाकिस्तान की रक्षा नीति को भी एक नया मोड़ मिल सकता है.

पाकिस्तान और सूडान के बीच बढ़ती सैन्य साझेदारी

सूचना के अनुसार, पाकिस्तान और सूडान के बीच लगभग 1.5 अरब डॉलर के हथियार सौदे पर बातचीत चल रही है. इस डील में पाकिस्तान की 'मेड इन चाइना' JF-17 थंडर लड़ाकू विमान और अन्य सैन्य उपकरण शामिल हो सकते हैं. सूडान, जो पिछले तीन वर्षों से गृहयुद्ध में घिरा हुआ है, इस वक्त सैन्य सहायता की जरूरत महसूस कर रहा है. रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, यह सौदा जल्दी ही अंतिम रूप ले सकता है.

पाकिस्तान की बढ़ती सैन्य मौजूदगी मुख्य रूप से अरब और अफ्रीकी देशों में अपनी धाक जमाने की रणनीति का हिस्सा है. पहले पाकिस्तान मुख्य रूप से अरब देशों को सैन्य प्रशिक्षण देता था, लेकिन अब वह सीधे तौर पर हथियार और लड़ाकू विमान बेचने के कदम उठा रहा है. इससे पाकिस्तान का सैन्य प्रभाव क्षेत्रीय स्तर पर और अधिक मजबूत हो सकता है, खासतौर पर सऊदी अरब और अन्य प्रमुख देशों में.

सऊदी अरब से रणनीतिक साझेदारी 

पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच हालिया समझौते ने पाकिस्तान की सैन्य ताकत को एक नया दिशा दिया है. 2022 में सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच हुए 'स्ट्रैटेजिक म्यूचुअल डिफेंस एग्रीमेंट (SMDA)' ने दोनों देशों के सैन्य संबंधों को मजबूत किया. इस साझेदारी के तहत सऊदी अरब ने पाकिस्तान के JF-17 लड़ाकू विमान में रुचि दिखाई है. हालाँकि, सऊदी अरब के पास पहले से अमेरिकी और यूरोपीय देशों के अत्याधुनिक विमानों का खजाना है, फिर भी पाकिस्तान को एक विश्वसनीय रक्षा साझेदार माना जा रहा है, खासकर चीन के साथ उसकी मजबूत रक्षा साझेदारी के कारण.

JF-17: कम बजट वाले देशों के लिए बेहतरीन विकल्प

JF-17 थंडर, पाकिस्तान और चीन द्वारा संयुक्त रूप से विकसित किया गया हल्का और बहुउद्देश्यीय लड़ाकू विमान है. यह विमान सस्ते और प्रभावी होने के कारण विकासशील देशों के लिए एक आकर्षक विकल्प बन चुका है. इसकी कीमत पश्चिमी विमानों की तुलना में काफी कम है, जिससे यह कम बजट वाले देशों के लिए आदर्श साबित हो सकता है. इसके अलावा, JF-17 की युद्ध में क्षमता भी साबित हो चुकी है, खासकर 2025 में भारत-पाकिस्तान सीमा संघर्ष के बाद इसकी लोकप्रियता में वृद्धि हुई है.

सूडान, लीबिया और पाकिस्तान की कूटनीतिक चुनौती

हालांकि पाकिस्तान सूडान और लीबिया जैसे देशों के साथ सैन्य सौदों में सक्रिय हो रहा है, लेकिन उसे एक कठिन कूटनीतिक स्थिति का सामना भी करना पड़ सकता है. इन देशों में विभिन्न गुटों के बीच संघर्ष है, और पाकिस्तान को यह सुनिश्चित करना होगा कि उसके द्वारा बेचे गए हथियार किसी विरोधी पक्ष के हाथों में न जाएं. सूडान में जहां सऊदी अरब सेना का समर्थन कर रहा है, वहीं यूएई ने RSF (रैपिड सपोर्ट फोर्स) को समर्थन दिया है. ऐसे में पाकिस्तान को अपनी सैन्य बिक्री में पूरी सतर्कता बरतनी होगी, ताकि वह कूटनीतिक विवादों से बच सके.

पाकिस्तान का हथियार निर्यात बढ़ता हुआ

पाकिस्तान का हथियार निर्यात पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ा है. 2022-23 के दौरान, पाकिस्तान के हथियार निर्यात में 13 मिलियन डॉलर से बढ़कर 400 मिलियन डॉलर से अधिक की वृद्धि हुई है. अनुमान है कि JF-17 से जुड़े मौजूदा और संभावित सौदों से पाकिस्तान को 13 अरब डॉलर तक की आय हो सकती है, जिससे उसके विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूती मिलेगी.

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