भारत द्वारा चलाए गए ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जबरदस्त कूटनीतिक और राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश की थी. अब इस बात की पुष्टि अमेरिकी सरकार के आधिकारिक दस्तावेजों से हुई है, जो हाल ही में सार्वजनिक किए गए हैं. इन फाइलों से साफ पता चलता है कि मई 2025 में भारत की सैन्य कार्रवाई को रुकवाने के लिए पाकिस्तान ने वॉशिंगटन में व्यापक स्तर पर लॉबिंग अभियान चलाया था.
दस्तावेजों के अनुसार, पाकिस्तान की ओर से नियुक्त लॉबी एजेंसियों और सरकारी प्रतिनिधियों ने उस समय के अमेरिकी प्रशासन पर लगातार दबाव डालने का प्रयास किया, ताकि भारत के सैन्य कदमों पर लगाम लगाई जा सके.
60 से ज्यादा बैठकों की कोशिश
एनडीटीवी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इन अमेरिकी दस्तावेजों का अध्ययन करने पर सामने आया कि पाकिस्तानी राजनयिकों और रक्षा अधिकारियों ने 60 से अधिक बैठकों और संवाद प्रयासों को अंजाम दिया. यह संपर्क अप्रैल 2025 में पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद शुरू हुआ और ऑपरेशन सिंदूर के दौरान तथा उसके बाद घोषित युद्धविराम तक जारी रहा.
इन बैठकों और संवादों में अमेरिका के सांसद, प्रशासनिक अधिकारी, पॉलिसी मेकर्स और बड़े मीडिया नेटवर्क्स शामिल थे. पाकिस्तान की कोशिश थी कि अमेरिका के भीतर भारत की सैन्य कार्रवाई के खिलाफ माहौल बनाया जाए और वॉशिंगटन को हस्तक्षेप के लिए तैयार किया जाए.
FARA रिकॉर्ड से हुआ खुलासा
यह पूरी जानकारी अमेरिकी फॉरेन एजेंट्स रजिस्ट्रेशन एक्ट (FARA) के तहत दाखिल किए गए रिकॉर्ड्स से सामने आई है. इन फाइलों के अनुसार, अमेरिका में पाकिस्तान के राजदूत और डिफेंस अताशे ने ईमेल, फोन कॉल और आमने-सामने की बैठकों के जरिए बार-बार संपर्क साधा.
रिकॉर्ड्स बताते हैं कि पाकिस्तान ने अमेरिकी अधिकारियों, थिंक टैंक्स और प्रभावशाली बिचौलियों से लगातार संवाद किया. यह साफ संकेत देता है कि भारत की सैन्य कार्रवाई से पाकिस्तान बुरी तरह दबाव में था और उसे रोकने के लिए हर संभव रास्ता आजमाया जा रहा था.
कांग्रेस और मीडिया तक पहुंचने की कोशिश
दस्तावेजों के अनुसार, पाकिस्तानी प्रतिनिधियों ने अमेरिका की कांग्रेस, पेंटागन, विदेश विभाग और कई प्रमुख अमेरिकी पत्रकारों से संपर्क किया. बातचीत के दौरान कश्मीर मुद्दे, क्षेत्रीय सुरक्षा हालात, दुर्लभ खनिज संसाधन और पाकिस्तान-अमेरिका रणनीतिक संबंधों जैसे विषयों को उठाया गया.
इतना ही नहीं, पाकिस्तान ने अमेरिकी मीडिया संस्थानों के साथ इंटरव्यू, ऑफ-द-रिकॉर्ड बातचीत और बैकग्राउंड ब्रीफिंग्स भी आयोजित कीं, ताकि भारत के खिलाफ अपनी बात अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रभावी ढंग से रखी जा सके.
लगातार दबाव बनाने की रणनीति
फाइलों से यह भी स्पष्ट होता है कि पाकिस्तान ने किसी एक चैनल या मंच तक खुद को सीमित नहीं रखा. जहां भी संभावना दिखी, वहां संपर्क किया गया. उद्देश्य साफ था—अमेरिकी प्रशासन और नीति निर्धारकों को यह विश्वास दिलाना कि भारत की सैन्य कार्रवाई क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरा है और उसे रोका जाना चाहिए.
विशेषज्ञों के अनुसार, यह पाकिस्तान की एक सोची-समझी रणनीति थी, जिसमें राजनयिक दबाव, मीडिया नैरेटिव और लॉबिंग नेटवर्क का एक साथ इस्तेमाल किया गया.
पहले भी सामने आ चुका है लॉबिंग नेटवर्क
इससे पहले नवंबर 2025 में प्रकाशित एक रिपोर्ट में यह खुलासा हो चुका था कि पाकिस्तान ने वॉशिंगटन में अपनी पहुंच मजबूत करने के लिए छह अलग-अलग लॉबिंग एजेंसियों को नियुक्त किया था. इन एजेंसियों के साथ लगभग 50 लाख डॉलर के अनुबंध किए गए थे.
इसी क्रम में पाकिस्तान ने जेवलिन एडवाइजर्स नाम की फर्म के साथ भी समझौता किया था. माना जाता है कि इस डील के बाद ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर को व्हाइट हाउस आमंत्रित किया था, जिसे उस समय एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक संकेत माना गया था.
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