पाकिस्तान ने संकेत दिया है कि वह युद्धग्रस्त गाजा पट्टी में अंतरराष्ट्रीय शांति बल की मदद के लिए अपने सैनिक भेजने पर सहमत है. इस अहम घोषणा की जानकारी पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री इशाक डार ने शनिवार को दी. डार ने स्पष्ट किया कि गाजा में तैनात होने वाले पाकिस्तानी सैनिक केवल इंटरनेशनल सिक्योरिटी फोर्स (ISF) के साथ समन्वय करेंगे और उनका उद्देश्य इलाके में सुरक्षा, स्थिरता और मानवीय गतिविधियों को समर्थन देना होगा.
डार ने कहा कि पाकिस्तान का उद्देश्य गाजा में किसी राजनीतिक या सैन्य गुट पर दबाव बनाना नहीं है. उन्होंने कहा कि हमास से हथियार जमा कराना पाकिस्तान की भूमिका में शामिल नहीं है. उनके अनुसार यह मुद्दा फिलिस्तीनी कानून और स्थानीय प्रशासन के अधिकार क्षेत्र में आता है. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि न तो पाकिस्तान और न ही कोई अन्य बाहरी देश इस प्रक्रिया में दखल दे.
गाजा में सैनिक भेजने से पहले स्पष्टता जरूरी
डार ने बताया कि गाजा में सैनिक भेजने से पहले ISF के ढांचे, नियमों और अधिकारों को लेकर स्पष्टता जरूरी होगी, ताकि किसी भी प्रकार की गलतफहमी या टकराव की स्थिति न बने. उनका कहना था कि युद्ध के बाद गाजा में सुरक्षा और मानवीय व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए ISF की मौजूदगी महत्वपूर्ण है.
चार साल में पाकिस्तान के हजारों सैनिक मारे गए
डिप्टी प्रधानमंत्री ने पाकिस्तान के सुरक्षा हालात पर भी चिंता जताई और खुलासा किया कि पिछले चार वर्षों में देश ने सुरक्षा मोर्चे पर भारी नुकसान झेला है. उनके अनुसार लगभग चार हजार पाकिस्तानी सैनिक मारे गए हैं और बीस हजार से अधिक घायल हुए हैं. उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान में तालिबान के सत्ता में आने के बाद पाकिस्तान पर हमलों और उग्रवाद में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है.
डार ने तालिबान नेतृत्व से अपील की कि वे पाकिस्तान में हमलों के लिए जिम्मेदार आतंकवादी संगठनों, खासकर तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP), के खिलाफ सख्त कदम उठाएं. उन्होंने कहा कि अफगानिस्तानी सीमा के करीब TTP को सुरक्षित ठिकाने नहीं दिए जाने चाहिए.
तालिबान ने सैकड़ों TTP लड़ाकों को हिरासत में लिया
डार के मुताबिक तालिबान सरकार ने हाल ही में पाकिस्तान को सूचित किया है कि TTP के कई सौ लड़ाकों को हिरासत में लिया गया है. अफगानिस्तान के विदेश मंत्री अमीर खान मुत्ताकी ने एक प्रतिनिधिमंडल भेजकर इन गिरफ्तारियों की आधिकारिक जानकारी पाकिस्तान को देने की बात भी कही है. डार ने उम्मीद जताई कि यह कदम सीमा पार उग्रवाद को नियंत्रित करने में मदद करेगा.
उन्होंने आगे बताया कि पाकिस्तान संयुक्त राष्ट्र के अनुरोध पर अफगान नागरिकों के लिए खाद्य सामग्री भेजने पर विचार कर रहा है. इस संबंध में अंतिम फैसला प्रधानमंत्री और पाकिस्तानी सेना की सलाह के बाद लिया जाएगा.
सुरक्षा कारणों से अफगानिस्तान सीमा बंद
डार ने अफगानिस्तान-पाकिस्तान सीमा को बंद किए जाने पर कहा कि यह फैसला मजबूरी में सुरक्षा कारणों से लिया गया. उनका कहना था कि तालिबान के अधिकांश सदस्य स्थिरता चाहते हैं, लेकिन कुछ गुट अब भी हिंसक समूहों को संरक्षण दे रहे हैं. उन्होंने यह भी जोड़ा कि पाकिस्तान ने अप्रैल में उनकी काबुल यात्रा के दौरान हुए सभी समझौतों का पालन किया है और तालिबान नेतृत्व भी इससे सहमत है.
डार ने कहा कि पाकिस्तान की नीति बहुत स्पष्ट है- अफगानिस्तान की जमीन का इस्तेमाल पाकिस्तान के खिलाफ किसी भी सूरत में नहीं होना चाहिए. उन्होंने बताया कि इस मुद्दे पर उन्होंने तालिबान से कई दौर की चर्चा की, लेकिन पाकिस्तान को अब तक आशानुरूप परिणाम नहीं मिले हैं. डार ने जोर दिया कि सीमा सुरक्षा और आतंकी गतिविधियों से निपटने के लिए पाकिस्तान को सख्त कदम उठाने पड़ रहे हैं.
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