Balochistan human rights violation: बलूचिस्तान में मानवाधिकार हनन की घटनाएं अब केवल एक क्षेत्रीय मुद्दा नहीं रहीं. पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में हाल ही में हुई सैन्य कार्रवाई, जबरन हिरासत और नागरिकों की गुमशुदगी ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान खींचा है. लंदन की ऐतिहासिक सड़क 10 डाउनिंग स्ट्रीट के बाहर बलूच प्रवासी समुदाय ने ज़ोरदार प्रदर्शन कर इस मुद्दे को वैश्विक मंच पर उठाया.
स्थानीय सूत्रों और बलूचिस्तान पर नज़र रखने वाले पोर्टल द बलूचिस्तान पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, क्वेटा, पंजगुर, खारान और मस्तुंग जैसे जिलों में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों द्वारा की गई छापेमारी में कम से कम 18 लोगों को हिरासत में लिया गया है. इनमें दो छात्र भी शामिल हैं. हिरासत में लिए गए लोगों को अज्ञात स्थानों पर ले जाया गया और उनके परिवारों को अब तक कोई आधिकारिक सूचना नहीं दी गई.
जेहरी में ‘सैन्य घेराबंदी’ जैसी स्थिति
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि बलूचिस्तान के जेहरी क्षेत्र में पाकिस्तानी सेना द्वारा एक ‘क्रूर सैन्य अभियान’ चलाया जा रहा है. बलूच वॉयस फॉर जस्टिस (BVJ) के अनुसार, यह प्रदर्शन जेहरी और आसपास के इलाकों में बढ़ते मानवाधिकार संकट के खिलाफ आवाज़ उठाने के लिए किया गया.
प्रदर्शन में बैनर और पोस्टर लिए प्रदर्शनकारियों ने पाकिस्तानी सेना पर महिलाओं, बच्चों और निर्दोष नागरिकों को निशाना बनाने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा, "इलाके में बमबारी, सड़कें सील, कर्फ्यू और भय का माहौल है, यह आम लोगों के जीवन को नर्क बना रहा है."
ब्रिटिश सरकार से चुप्पी तोड़ने की अपील
प्रदर्शनकारियों ने ब्रिटिश सरकार से अपील की कि वह इस मुद्दे पर अपनी चुप्पी तोड़े और पाकिस्तान को उसके कृत्यों के लिए जिम्मेदार ठहराए. उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों से भी मांग की कि बलूचिस्तान में एक स्वतंत्र जांच टीम भेजी जाए जो ज़मीनी सच्चाई को सामने लाए.
जबरन गायबियां बनीं आम बात, अदनान बलूच की कहानी
मानवाधिकार संगठनों ने हाल ही में मस्तुंग जिले में हुई एक और घटना को उजागर किया जिसमें पाकिस्तानी फ्रंटियर कोर (FC) के जवानों ने दुकानदार अदनान बलूच को उसकी दुकान से उठाकर किसी अज्ञात स्थान पर ले गए. 19 अक्टूबर से अदनान का कोई अता-पता नहीं है. अदनान अकेला कमाने वाला था, और उसका यूँ अचानक लापता हो जाना उसके परिवार को अनिश्चितता और डर के अंधेरे में धकेल गया है.
एक संगठित मानवाधिकार संकट?
बलूच राष्ट्रीय आंदोलन के मानवाधिकार विभाग ‘पांक’ ने यह चेतावनी दी है कि जबरन गायब किए जाने की घटनाएं पूरे बलूचिस्तान में आम होती जा रही हैं. हर हफ्ते दर्जनों लोगों का बिना किसी कानूनी प्रक्रिया के उठाया जाना, मानवाधिकारों का खुला उल्लंघन है. इस पूरे घटनाक्रम को लेकर आवाजें अब केवल बलूचिस्तान में नहीं, बल्कि लंदन, यूरोप और अमेरिका में भी बुलंद हो रही हैं.
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