बलूचिस्तान में हालात एक बार फिर तनावपूर्ण हो गए हैं. क्षेत्र में जबरन गायब किए जाने की बढ़ती घटनाओं और कथित सैन्य दमन के कारण आम नागरिक भय और अनिश्चितता से घिरे हुए हैं. मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, पिछले कुछ दिनों में कई बलूच नागरिकों को पाकिस्तानी सुरक्षा बलों द्वारा उठाए जाने की ताज़ा घटनाएं सामने आई हैं, जिनसे पाकिस्तान के सबसे बड़े प्रांत में पहले से मौजूद असंतोष और गहरा हो गया है.
केच जिले से तीन लोग लापता, परिवार बेहाल
बलूच नेशनल मूवमेंट (बीएनएम) के मानवाधिकार विभाग ने बताया कि गुरुवार को सना उल्लाह, जो केच जिले के रहने वाले हैं, को तुरबत के पास तलार चेकपोस्ट से सुरक्षा बलों ने पकड़ा और उसके बाद उनका कोई पता नहीं चला.
इसी के साथ, 16 नवंबर को मुलमा और आबिद बलूच नामक दो और व्यक्तियों को कराची के मरिपुर इलाके से उठा लिया गया. तीनों के परिजनों ने आरोप लगाया है कि इन्हें बिना किसी आरोप, वारंट या कानूनी प्रक्रिया के हिरासत में लिया गया और आज तक न तो गिरफ्तारी की पुष्टि हुई और न ही इनके बारे में कोई आधिकारिक बयान जारी किया गया.
मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि यह घटनाएँ उस व्यापक पैटर्न का हिस्सा हैं जिसमें बलूच नागरिकों को अचानक उठाकर “लापता” कर दिया जाता है और महीनों तक उनका कोई पता नहीं चलता.
एक और फर्जी मुठभेड़: गोली से छलनी मिला शव
17 नवंबर को केच जिले के बनोक-ए-चाडी क्षेत्र में ज़रीफ़ बलूच नामक व्यक्ति का शव मिला. उनके शरीर पर कई गोलियों के निशान थे.
रिपोर्टों के मुताबिक, ज़रीफ़ बलूच और उनके रिश्तेदार रहम दिल को 31 मार्च 2025 को ओरमारा से सुरक्षा बलों ने हिरासत में लिया था. रहम दिल को एक दिन बाद रिहा कर दिया गया, लेकिन ज़रीफ़ का कोई अता-पता नहीं था. अब महीनों बाद उनका शव मिलने से इलाके में गहरा रोष है.
स्थानीय समूहों का कहना है कि यह एक स्पष्ट "काउंटर टेरर ऑपरेशन" के नाम पर की गई न्यायेतर हत्या है, ऐसी घटनाएँ बलूचिस्तान में नई नहीं हैं बल्कि वर्षों से दोहराई जाती रही हैं.
कर्फ्यू, सड़क बंदी और इंटरनेट शटडाउन
स्थानीय मीडिया और मानवाधिकार रिपोर्टों के अनुसार, पिछले कई हफ्तों में बलूचिस्तान के कई हिस्सों में अचानक कर्फ्यू लगा दिया गया है, इंटरनेट बंद किया जा रहा है और सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ा दी गई है.
विशेष रूप से ज़हरी, केच, तुरबत और आसपास के इलाकों में शाम ढलते ही सड़कों पर सन्नाटा पसर जाता है.
निवासियों ने बताया—
500 से अधिक परिवारों ने घर छोड़ा: आरोप
स्थानीय समुदायों का कहना है कि पिछले कुछ दिनों में लगभग 500 परिवार अपने घरों से पलायन कर चुके हैं. लोगों के अनुसार, सुरक्षा बलों की कार्रवाई के दौरान घरों की तलाशी में कई जगह संपत्ति, बर्तन, कपड़े तक उठा लिए गए और कई मामलों में पशुधन को मार दिया गया या ले जाया गया.
एक निवासी ने बताया, "कर्फ्यू पर सवाल पूछने या स्कूलों की बंदी के बारे में आवाज उठाने पर हमें साफ चेतावनी दी जाती है- ‘एक गोली में चुप कर देंगे.’"
मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि शिक्षा, रोजगार और स्वास्थ्य सेवाएँ लगभग पूरी तरह ठप होने से लोगों का जीवन असहनीय हो गया है.
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