इस्लामाबाद: पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में गुरुवार को एक विवादित और चिंताजनक घटना सामने आई, जब स्थानीय पुलिस ने अचानक प्रेस क्लब के अंदर घुसकर वहां प्रदर्शन कर रहे पत्रकारों और नागरिकों पर लाठीचार्ज किया. यह प्रदर्शन पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में चल रही हिंसा, मानवाधिकार उल्लंघन और इंटरनेट सेवा बंद किए जाने के खिलाफ था. पत्रकार और प्रदर्शनकारी सरकार से इस हिंसा के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे थे.
घटना के तुरंत बाद पूरे देश में इस कृत्य के खिलाफ गहरा रोष फैल गया. वरिष्ठ पत्रकार, मानवाधिकार कार्यकर्ता और आम जनता ने पुलिस के इस कृत्य को प्रेस की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला करार दिया. इसके जवाब में पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने इस घटना की पूर्ण और निष्पक्ष जांच कराने के आदेश जारी किए.
पुलिस के दबाव के बीच पत्रकारों का उत्पीड़न
प्राप्त जानकारी के अनुसार, गुरुवार को जब पत्रकार और प्रदर्शनकारी प्रेस क्लब के बाहर PoK में बढ़ती हिंसा के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे, तो अचानक भारी संख्या में पुलिस बल मौके पर पहुंच गए. पुलिस ने प्रदर्शन को समाप्त कराने के लिए जबरदस्त दमन की कार्रवाई की.
पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की और संघर्ष होने लगा. इसके बाद कुछ प्रदर्शनकारी प्रेस क्लब के अंदर घुस गए, जिससे स्थिति और भी तनावपूर्ण हो गई. पुलिस ने उनका पीछा करते हुए प्रेस क्लब के अंदर घुसकर वहां मौजूद पत्रकारों और कर्मचारियों पर लाठीचार्ज शुरू कर दिया.
کشمیری صحافی کو اسلامآباد پریس کلب میں تشدد کا نشانہ بنایا جا رہا ہے! pic.twitter.com/SgjyvXTujS
— Adeel Raja (@adeelraja) October 2, 2025
घटना के दौरान, कई पत्रकार मोबाइल फोन और कैमरे लेकर पुलिस की कार्रवाई को रिकॉर्ड कर रहे थे, लेकिन पुलिस ने इस रिकॉर्डिंग को रोकने के लिए उन पर भी हाथ उठाए. पत्रकारों को पीटा गया, कई के कैमरे और मोबाइल फोन तोड़ दिए गए. मीडिया कर्मियों की व्यक्तिगत सुरक्षा को भी खतरा पहुंचा.
घायलों की संख्या और नुकसान
इस हिंसक कार्रवाई के दौरान कम से कम दो फोटोग्राफर और तीन प्रेस क्लब के अन्य कर्मचारी गंभीर रूप से घायल हुए. इसके अलावा कई पत्रकारों के उपकरण जैसे कैमरे और मोबाइल फोन नष्ट हो गए. इस मामले की कई वीडियो क्लिप सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुईं, जिनमें पुलिस द्वारा पत्रकारों पर बेरहमी से लाठियां चलाते और प्रदर्शनकारियों को जबरदस्ती प्रेस क्लब से बाहर निकालते हुए देखा जा सकता है.
पुलिस ने बताया गलती से हुई कार्रवाई
इस घटना के बाद पुलिस ने अपने बचाव में कहा कि पत्रकारों पर हुई पिटाई "गलती से" हुई. उनके अनुसार पुलिस का मकसद केवल प्रदर्शन को नियंत्रित करना था, न कि पत्रकारों को निशाना बनाना. पुलिस के अधिकारियों ने बताया कि जब प्रदर्शनकारी क्लब के अंदर घुस गए, तो पुलिस ने उन्हें दबाने की कोशिश की, लेकिन इस प्रक्रिया में कुछ पत्रकारों को भी आघात पहुंचा. उन्होंने कहा कि यह कोई जानबूझकर की गई कार्रवाई नहीं थी.
गृह मंत्री ने दिए जांच के आदेश
पुलिस के इस हमले के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने इस घटना की निंदा की. उन्होंने कहा कि पत्रकारों पर हिंसा किसी भी हालत में स्वीकार्य नहीं है और जो भी इस कार्रवाई में शामिल होगा, उसके खिलाफ कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी.
मोहसिन नकवी ने अपने आधिकारिक बयान में कहा, "पत्रकारों की स्वतंत्रता लोकतंत्र की रीढ़ है. हम उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करेंगे और इस घटना की निष्पक्ष जांच के लिए उचित कदम उठाएंगे."
गृह राज्य मंत्री की पत्रकारों से माफी
घटना के बाद गृह राज्य मंत्री तलाल चौधरी भी प्रेस क्लब पहुंचे और वहां मौजूद पत्रकारों से व्यक्तिगत तौर पर माफी मांगी. उन्होंने कहा कि कुछ प्रदर्शनकारियों ने पुलिस के साथ दुर्व्यवहार किया था, जिसके जवाब में पुलिस को कार्रवाई करनी पड़ी, लेकिन पत्रकारों के साथ हुई झड़प दुर्भाग्यपूर्ण और अनचाही थी.
तलाल चौधरी ने आश्वासन दिया कि सरकार पूरी गंभीरता से मामले की जांच करेगी और दोषियों को कानून के अनुसार कड़ी सजा दी जाएगी. उन्होंने पत्रकारों से कहा,
“आपकी आवाज़ समाज की आवाज़ है, और हम सभी बोलने की आज़ादी के समर्थक हैं. हमें विश्वास है कि भविष्य में इस प्रकार की घटनाएं नहीं होंगी.”
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