पाकिस्तानी आतंकवादियों ने अब म्यांमार में मचाई तबाही, अराकान आर्मी पर किया हमला, छिड़ेगी नई जंग?

म्यांमार के अशांत रखाइन प्रांत में एक बार फिर हिंसा की लपटें उठ रही हैं.

Pakistani terrorists attacked Arakan Army in Myanmar
प्रतिकात्मक तस्वीर/ FreePik

नई दिल्ली/इस्लामाबाद/नेपीडॉ: म्यांमार के अशांत रखाइन प्रांत में एक बार फिर हिंसा की लपटें उठ रही हैं. रिपोर्ट्स के अनुसार, पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठन अराकान रोहिंग्या साल्वेशन आर्मी (ARSA) ने हाल ही में म्यांमार के सबसे शक्तिशाली विद्रोही गुटों में से एक अराकान आर्मी पर बड़ा हमला किया है. यह हमला 10 अगस्त की रात को ताउंग प्यो लेट क्षेत्र में हुआ, जहां ARSA के लड़ाकों ने अराकान आर्मी के दो ठिकानों को निशाना बनाया.

सूत्रों के मुताबिक, यह हमला रात करीब 11 बजे शुरू हुआ और करीब 50 मिनट तक चला. इस हिंसक मुठभेड़ में कम से कम 5 लड़ाकों की मौत हो गई जबकि 12 से अधिक गंभीर रूप से घायल हुए हैं. इस दौरान बड़ी संख्या में अराकान आर्मी के जवानों ने इलाके से भागने में ही अपनी भलाई समझी. माना जा रहा है कि यह हमला पूरी तरह योजनाबद्ध और पूर्व नियोजित था.

पाकिस्तान की भूमिका पर उठ रहे सवाल

खुफिया एजेंसियों और अंतरराष्ट्रीय मीडिया की मानें तो ARSA को पाकिस्तान का प्रत्यक्ष समर्थन प्राप्त है. रिपोर्टों के अनुसार, लश्कर-ए-तैयबा और अन्य कट्टरपंथी आतंकी संगठनों से इस समूह को आर्थिक सहायता, हथियार और प्रशिक्षण मुहैया कराया जा रहा है. यही वजह है कि अब म्यांमार की सीमा से सटे भारत के उत्तर-पूर्वी इलाकों में भी सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई हैं.

ARSA की गतिविधियाँ सिर्फ म्यांमार तक सीमित नहीं हैं. बांग्लादेश में रोहिंग्या शरणार्थियों के शिविरों में भी यह संगठन अपना प्रभाव बढ़ा रहा है. रिपोर्टों में यह भी खुलासा हुआ है कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI ने बांग्लादेश के कट्टरपंथी संगठनों के साथ गठजोड़ करके रोहिंग्याओं को ARSA में शामिल करने के लिए कई गुप्त अभियान चलाए हैं. इसके तहत उन्हें हथियार और जरूरत का अन्य सामान देने का प्रलोभन भी दिया गया.

कौन है अराकान आर्मी?

अराकान आर्मी (AA) म्यांमार के पश्चिमी हिस्से में स्थित रखाइन राज्य की एक प्रभावशाली बौद्ध उग्रवादी सेना है. इसकी स्थापना वर्ष 2009 में हुई थी, जिसका मुख्य उद्देश्य स्थानीय बौद्ध आबादी के लिए अधिक स्वायत्तता और राजनीतिक अधिकारों को सुनिश्चित करना है. वर्तमान में अराकान आर्मी रखाइन राज्य के 17 में से 15 जिलों पर प्रभाव रखती है.

यह समूह म्यांमार की सैन्य सरकार, रोहिंग्या उग्रवादी गुटों और कभी-कभी अन्य जातीय सशस्त्र गुटों के साथ भी संघर्षरत रहा है. माना जाता है कि अराकान आर्मी के चीन के साथ मजबूत संबंध हैं, जो इसे हथियारों और रणनीतिक सलाह देने में भूमिका निभा सकता है.

भारत के लिए खतरे की घंटी?

म्यांमार में बढ़ती हिंसा और पाकिस्तान की कथित भागीदारी भारत के लिए भी चिंता का विषय बन चुकी है. भारत की म्यांमार से सटी सीमा के राज्यों- मिज़ोरम, मणिपुर, नागालैंड और अरुणाचल प्रदेश में पहले से ही शरणार्थियों और अवैध घुसपैठ की समस्या बनी हुई है. अब ARSA जैसे आतंकी संगठनों की सक्रियता से उग्रवाद और आतंकी गतिविधियों के फैलने का खतरा और बढ़ गया है.

खुफिया एजेंसियों को इस बात की भी आशंका है कि पाकिस्तानी आतंकी संगठन पूर्वोत्तर भारत के उग्रवादी गुटों के साथ सांठगांठ कर सकते हैं, जिससे भारत की आंतरिक सुरक्षा को सीधी चुनौती मिल सकती है.

रोहिंग्या समुदाय का फायदा उठा रहा है पाकिस्तान?

ARSA का गठन 2012 के बाद हुआ था, जब म्यांमार में रोहिंग्या मुस्लिमों के खिलाफ दंगे भड़क उठे थे. यह संगठन खुद को रोहिंग्याओं का रक्षक बताता है, लेकिन इसके आतंकी गतिविधियों और हिंसक हमलों की वजह से इसकी अंतरराष्ट्रीय छवि एक चरमपंथी संगठन की बन गई है.

अब पाकिस्तान इस संवेदनशील स्थिति का राजनीतिक और सामरिक फायदा उठाने की कोशिश कर रहा है. बांग्लादेश के शरणार्थी शिविरों में ARSA की भर्ती गतिविधियों को अंजाम देना और उन्हें हथियार मुहैया कराना इस रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है.

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