मुस्लिम देश ही बन गए फिलिस्तीनियों के दुश्मन! ट्रंप से हाथ मिलाते ही सीरिया ने शुरू की जंग? ईरान की हालत खराब

सीरिया की नई सरकार ने सत्ता में आते ही ऐसा कदम उठाया है जो न सिर्फ पश्चिम एशिया की राजनीति का नक्शा बदल सकता है, बल्कि दशकों पुरानी धारणाओं पर भी गहरी चोट करता है.

Palestinians Syria started war Trump Iran
मुस्लिम देश ही बन गए फिलिस्तीनियों के दुश्मन! | Photo: X

दमिश्कः जिस धरती से कभी इजरायल के खिलाफ जंग के बिगुल बजते थे, वहां अब खामोशी पसरी है. सीरिया की नई सरकार ने सत्ता में आते ही ऐसा कदम उठाया है जो न सिर्फ पश्चिम एशिया की राजनीति का नक्शा बदल सकता है, बल्कि दशकों पुरानी धारणाओं पर भी गहरी चोट करता है. अल-जुलानी की नई हुकूमत अब सीरिया को अमेरिका-सऊदी खेमे में खींचने को तैयार दिख रही है, और इसकी पहली झलक मिली है उन फिलीस्तीनी आतंकी संगठनों के खिलाफ शुरू हुई कार्रवाई में, जिन्हें कभी दमिश्क की शरण प्राप्त थी.

पिछले कुछ हफ्तों में यह साफ हो गया है कि सीरिया अब इजरायल के खिलाफ छद्म युद्ध का मोर्चा नहीं बने रहना चाहता. दमिश्क की नई सत्ता ने अपने घर में मौजूद उन आतंकवादी गुटों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है जो दशकों से ईरान की शह पर इजरायल पर हमले की रणनीति बनाते थे. एक वक्त था जब फिलीस्तीनी इस्लामिक जिहाद, पॉपुलर फ्रंट फॉर द लिबरेशन ऑफ फिलीस्तीन – जनरल कमांड (PFLP-GC) जैसे गुट दमिश्क की सरजमीं से संचालित होते थे. लेकिन अब, बदले हालातों में इन गुटों के लिए सीरिया में रहना मुश्किल हो गया है.

अब्राहम अकॉर्ड की तरफ बढ़ते कदम?

रिपोर्ट्स में पहले ही संकेत मिले थे कि सीरिया अब्राहम अकॉर्ड में शामिल हो सकता है, जिससे वह इजरायल को मान्यता दे देगा. यह वही सीरिया है जो बशर अल-असद के शासन में इजरायल के खिलाफ जंग के मूड में रहा करता था. लेकिन अब तस्वीर पूरी तरह से बदल चुकी है. माना जा रहा है कि फिलीस्तीनी आतंकी गुटों पर कार्रवाई इसी दिशा में पहला बड़ा कदम है.

तलाल नाजी गिरफ्तार, इस्लामिक जिहाद के लड़ाके सलाखों के पीछे

3 मई को खबर आई कि सीरियाई प्रशासन ने PFLP-GC के मुखिया तलाल नाजी को हिरासत में ले लिया है. इससे पहले अप्रैल के अंत में इस्लामिक जिहाद संगठन के दर्जनों आतंकियों को भी जेल भेजा गया था. नई सरकार की मंशा साफ है—वह ईरान समर्थित आतंकी नेटवर्क को खत्म करने की ओर बढ़ रही है. यह वही नेटवर्क है जिसे बशर अल-असद की सरकार ने लंबे वक्त तक संरक्षण दिया, और जो इजरायल के खिलाफ हिंसा को अपना उद्देश्य मानता था.

वॉशिंगटन-रियाद से नज़दीकी: अब दमिश्क बदलेगा रंग?

अहमद अल-शरा, जिन्हें अल-जुलानी के नाम से जाना जाता है, अब नई अंतरराष्ट्रीय भूमिका निभाने को तैयार हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और सऊदी अरब के शहज़ादों के साथ हुई मुलाकातों ने इस नई सरकार की दिशा तय कर दी है. अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो और तुर्की में अमेरिकी राजदूत टॉम बैरक अब सीरिया को "आतंक मुक्त और स्थिर" राष्ट्र बनाने की योजना का हिस्सा मानते हैं.

टॉम बैरक ने हाल ही में कहा था – "प्रतिबंधों का अंत और ISIS की हार सुनिश्चित करने के लिए सीरिया को एक नया मौका देना जरूरी है." ये बयान इस बात के संकेत हैं कि अमेरिका अब सीरिया के साथ नई डील पर काम कर रहा है, जिसमें आतंकवाद का खात्मा एक मुख्य शर्त है.

संपत्ति जब्त, दफ्तर बंद – दमिश्क की गली में नहीं बचे झंडे

अल-अरबिया और फ्रांस24 की रिपोर्ट्स के मुताबिक, सीरिया में सक्रिय रहे आतंकी संगठनों को न सिर्फ धमकाया गया, बल्कि उनकी संपत्तियां भी जब्त कर ली गई हैं. यार्मुक फिलीस्तीनी शिविर, जो कभी इन संगठनों का गढ़ हुआ करता था, अब वीरान पड़ा है. बैनर उतार दिए गए हैं, और उनके मुख्यालयों को बंद कर दिया गया है.

एक सूत्र ने फ्रांस24 को बताया – "गुटों ने अपने मुख्यालय में हथियार पूरी तरह से सौंप दिए हैं..." जबकि दूसरे ने कहा – "हमने अपने हल्के हथियार केवल आत्मरक्षा के लिए रखे हैं."

बदली हवा, बदलती रणनीति

यह सब उस दिशा में बढ़ते बदलाव का संकेत है जो अब तक कल्पनाओं में भी मुश्किल था—सीरिया अब इजरायल के खिलाफ लड़ने वालों की शरणस्थली नहीं, बल्कि उन्हें खत्म करने वाला बन चुका है. बशर अल-असद की छाया से निकलकर अल-जुलानी की सरकार अब खुद को वैश्विक मंच पर एक ज़िम्मेदार सत्ता के रूप में पेश करना चाहती है—जहां अमेरिका और सऊदी अरब की दोस्ती हो, और ईरान से दूरी भी.

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