मनीला/बीजिंग: दक्षिण-पूर्व एशिया में सामरिक समीकरणों को बदलने वाला एक कदम फिलीपींस ने उठाया है. देश की मरीन कॉर्प्स ने हाल ही में अपनी पहली ब्रहमोस सुपरसोनिक एंटी-शिप मिसाइल बैटरी का सार्वजनिक प्रदर्शन किया. यह बैटरी फिलीपींस के पश्चिमी लुजोन इलाके, विशेषकर ज़ाम्बालेस में तैनात की गई है. इस मिसाइल की रेंज लगभग 290 किलोमीटर है, जो फिलीपींस को उसके पश्चिमी जलक्षेत्र में किसी भी सतही जहाजीय खतरे को सीधे निशाने पर लेने की क्षमता देती है.
ब्रहमोस मिसाइलों की तैनाती सिर्फ तकनीकी या सैन्य कदम नहीं है, बल्कि यह क्षेत्रीय राजनीति और समुद्री दावों में बदलाव की दिशा में एक मजबूत संकेत है. दक्षिण चीन सागर, जहां चीन अपने नियंत्रण का दावा करता है, वहां फिलीपींस अब अपने तटीय और आर्थिक अधिकारों की रक्षा के लिए ठोस कदम उठा रहा है.
चीन के लिए बढ़ा दबाव
दक्षिण चीन सागर में चीन की आक्रामकता पिछले सालों में लगातार बढ़ी है. चीन ने स्कारबोरो शोअल के आसपास गतिविधियों को बढ़ाया और इस क्षेत्र में नेचर-रिजर्व का एलान किया, जिससे मनीला-बीजिंग के बीच तनाव बढ़ा. अगस्त और सितंबर में इस क्षेत्र में कई बार टकराव के मामले सामने आए.
विशेषज्ञों के अनुसार, ब्रहमोस मिसाइल की तैनाती चीन के लिए बड़ा संदेश है कि फिलीपींस अब अपनी सीमा और आर्थिक क्षेत्रों की रक्षा के लिए सशक्त साधनों से लैस है. सुपरसोनिक और उच्च-सटीकता वाली ब्रहमोस मिसाइलें दुश्मन के जहाजों और सप्लाई चैन को सीधे निशाना बनाने में सक्षम हैं.
पाकिस्तान में हुए प्रयोग ने बढ़ाई विश्वसनीयता
ब्रहमोस मिसाइल की विश्वसनीयता का सबसे बड़ा सबूत पाकिस्तान के साथ हुए हाल के संघर्षों में देखने को मिला. मई महीने में पाकिस्तान के 11 एयरबेस पर ब्रहमोस हमले किए गए थे. उस दौरान पाकिस्तान के चीनी मूल के एयर डिफेंस सिस्टम इन हमलों को रोकने में नाकाम रहे थे. इस अनुभव ने यह साबित किया कि ब्रहमोस मिसाइलों को रोक पाना अत्यंत कठिन है. यही वजह है कि अब दक्षिण चीन सागर और उससे जुड़े देशों ने इस प्रणाली में गहरी दिलचस्पी दिखाई है.
भारत और फिलीपींस के बीच ब्रहमोस सौदा
भारत और फिलीपींस के बीच ब्रहमोस मिसाइलों का सौदा 2022 में हुआ था. इस सौदे की कुल कीमत लगभग 375 मिलियन डॉलर बताई गई थी. इसके तहत भारत ने तीन ब्रहमोस बैटरियों की आपूर्ति की है. प्रत्येक बैटरी में दो मोबाइल ऑटोनॉमस लॉन्चर, एक रडार वाहन, एक मिसाइल रीलोडर और कमांड एंड कंट्रोल ट्रक शामिल हैं. प्रत्येक लॉन्चर में दो मिसाइलें तैनात हैं और रीलोडिंग वाहन में अतिरिक्त चार मिसाइलों की क्षमता होती है.
सौदे के अगले चरण में फिलीपींस भारत से और ब्रहमोस मिसाइलें खरीद सकता है. इसी प्रकार, दक्षिण-पूर्व एशिया के अन्य देशों जैसे इंडोनेशिया और वियतनाम ने भी ब्रहमोस मिसाइलों में दिलचस्पी दिखाई है.
सामरिक महत्व और रणनीतिक संदेश
फिलीपींस के पूर्व राष्ट्रीय रक्षा सचिव डेल्फ़िन लोरेंजाना के अनुसार, ब्रहमोस बैटरी देश के पश्चिमी फिलीपींस सागर में किसी भी बाहरी धमकी के खिलाफ मजबूत सुरक्षा कवच का काम करेगी. यह मिसाइल तटीय रक्षा को नई ऊँचाई देती है और फिलीपींस को चीन की बढ़ती समुद्री गतिविधियों के खिलाफ मजबूत प्रतिरोध स्थापित करने में सक्षम बनाती है.
विश्लेषकों के अनुसार, इस कदम का महत्व केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं है. यह राजनीतिक और रणनीतिक संदेश भी है कि फिलीपींस अपने समुद्री दावों और आर्थिक अधिकारों की रक्षा के लिए हर संभव कदम उठाने को तैयार है. दक्षिण चीन सागर में बढ़ते तनाव और चीन की आक्रामक नीति को देखते हुए ब्रहमोस की तैनाती फिलीपींस की सामरिक स्वतंत्रता और प्रभाव को कई गुना बढ़ा देगी.
दक्षिण चीन सागर का सामरिक परिदृश्य
ब्रहमोस मिसाइलों की तैनाती ने इस क्षेत्र में सामरिक संतुलन को नया रूप दे दिया है. फिलीपींस अब अपने पश्चिमी जलक्षेत्र में चीन के जहाजों और तटीय गतिविधियों के खिलाफ सक्रिय नियंत्रण स्थापित कर सकता है. इस कदम से दक्षिण चीन सागर में सामरिक ताकत के केंद्र में बदलाव आने की संभावना है.
विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले वर्षों में भारत और फिलीपींस का यह सहयोग न सिर्फ दक्षिण चीन सागर में बल्कि पूरे इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सामरिक संतुलन के लिए महत्वपूर्ण साबित होगा.
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