आज प्रधानमंत्री मोदी छत्तीसगढ़ दौरे पर हैं. इस दौरान उन्होंने एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि आज का दिन बहुत विशेष है.आज हमारा छत्तीसगढ़ अपनी स्थापना के 25 साल पूरे कर रहा है.छत्तीसगढ़ के साथ ही झारखंड और उत्तराखंड के भी 25 वर्ष पूरे हुए हैं.आज देश के और भी कई राज्य अपना स्थापना दिवस मना रहे हैं.मैं इन सभी राज्यों के निवासियों को स्थापना दिवस को बहुत-बहुत बधाई देता हूं.
उन्होंने कहा कि राज्य के विकास से देश का विकास के मंत्र पर चलते हुए हम भारत को विकसित बनाने के अभियान में जुटे हैं.विकसित भारत की इस अहम यात्रा में ब्रह्माकुमारी जैसी संस्था की बहुत बड़ी भूमिका है. मैं बीते कई दशकों से आप सबके साथ जुड़ा हुआ हूं.मैं यहां अतिथि नहीं हूं, मैं आपका ही हूं. पीएम बोले कि मैंने इस आध्यात्मिक आंदोलन को वटवृक्ष की तरह विस्तार लेते हुए देखा है. 2011 में अहमदाबाद में future of power कार्यक्रम, 2012 में संस्था की स्थापना के 75 वर्ष, 2013 में प्रयागराज का कार्यक्रम, आबू जाना हो या गुजरात के कार्यक्रमों में जाना मेरे लिए रूटीन सा हो गया था.
आत्मसंयम से आत्मज्ञान, आत्मज्ञान से आत्म-साक्षात्कार और आत्म-साक्षात्कार से आत्म शांति।
— BJP (@BJP4India) November 1, 2025
इसी पथ पर चलते हुए, शांति शिखर एकेडमी में साधक वैश्विक शांति का माध्यम बनेंगे।
-पीएम @narendramodi pic.twitter.com/8iPCYgYhXI
यहां शब्द कम सेवा ज्यादा है
PM मोदी बोले कि दिल्ली आने के बाद भी आजादी के अमृत महोत्सव से जुड़ा अभियान हो, स्वच्छ भारत अभियान हो या फिर जल जन अभियान, इन सबसे जुड़ने का मौका हो. मैं जब भी आपके बीच आया हूं, मैंने आपके प्रयासों को बहुत गंभीरता से देखा है. मैंने हमेशा देखा है, यहां शब्द कम सेवा ज्यादा है. हमारे यहां कहा जाता है कि आचारः परमो धर्मः, आचारः परमं तपः। आचारः परमं ज्ञानम्, आचारात् किं न सिध्यति।। अर्थात आचरण ही सबसे बड़ा धर्म है, आचरण ही सबसे बड़ा तप है और आचरण ही सबसे बड़ा ज्ञान है, आचरण से क्या कुछ सिद्ध नहीं हो सकता. यानी बदलाव तब आता है, जब अपने कथन को अपने आचरण में भी उतारा जाए. यही ब्रह्माकुमारी संस्था की आध्यात्मिक शक्ति का स्रोत है.
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