ऑपरेशन सिंदूर के बाद कई देशों की यात्रा, बड़ी डील्स... पीएम मोदी ने डिप्लोमेसी से कैसे बदले समीकरण?

ऑपरेशन सिंदूर की सफलता के बाद, भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी उपस्थिति को और भी प्रभावशाली बना दिया है.

PM Modi diplomacy after Operation Sindoor
प्रतिकात्मक तस्वीर/ ANI

नई दिल्ली: ऑपरेशन सिंदूर की सफलता के बाद, भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी उपस्थिति को और भी प्रभावशाली बना दिया है. बीते कुछ महीनों में पीएम मोदी ने दुनिया के कई महत्वपूर्ण देशों का दौरा किया, वैश्विक सम्मेलनों में भाग लिया, और भारत के लिए रणनीतिक, आर्थिक व सामरिक दृष्टि से कई अहम समझौतों को मूर्त रूप दिया. इन यात्राओं ने न सिर्फ भारत की वैश्विक स्थिति को मजबूत किया, बल्कि बदलते अंतरराष्ट्रीय समीकरणों में भी देश को एक निर्णायक भूमिका में खड़ा किया.

जून के मध्य में प्रधानमंत्री मोदी ने कनाडा के कनानास्किस शहर में आयोजित G-7 शिखर सम्मेलन में हिस्सा लिया. यह उनकी एक दशक के बाद की पहली कनाडा यात्रा थी, जिससे भारत-कनाडा के बीच रिश्तों को फिर से मजबूत करने का अवसर मिला. इस दौरान उन्होंने कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी से द्विपक्षीय वार्ता की, जिसमें व्यापार, निवेश, टेक्नोलॉजी और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ावा देने पर चर्चा हुई.

सम्मेलन के दौरान पीएम मोदी ने यूरोपीय नेताओं, जापान के तत्कालीन प्रधानमंत्री, और दक्षिण कोरिया के नवनियुक्त राष्ट्रपति से भी मुलाकात की, जिससे बहुपक्षीय सहयोग के लिए नए रास्ते खुले.

ब्रिक्स सम्मेलन और ब्राजील की यात्रा

जुलाई की शुरुआत में प्रधानमंत्री मोदी ब्रिक्स (BRICS) सम्मेलन के लिए ब्राजील पहुंचे. इस अवसर पर उन्होंने ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला डा सिल्वा के साथ विस्तृत चर्चा की. बातचीत में जलवायु परिवर्तन, वैश्विक दक्षिण के मुद्दे, और व्यापार सहयोग जैसे विषय शामिल थे. इसके अलावा, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के कई अन्य देशों के साथ भी भारत ने संवाद और सहयोग की दिशा में कदम बढ़ाए.

यूके यात्रा: व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर

उसी महीने, प्रधानमंत्री ने ब्रिटेन की यात्रा की, जहाँ भारत और यूके के बीच Comprehensive Economic and Trade Agreement (CETA) पर हस्ताक्षर किए गए. इस समझौते के माध्यम से दोनों देशों के बीच व्यापार को और गति मिलने की उम्मीद है. शिक्षा, रक्षा, साइबर सुरक्षा और जलवायु परिवर्तन के क्षेत्र में भी आपसी सहयोग की रूपरेखा तैयार की गई.

मालदीव: सांस्कृतिक और सामरिक जुड़ाव

यूके से लौटते ही पीएम मोदी मालदीव पहुंचे, जहाँ उन्होंने देश के राष्ट्रीय दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया. भारत ने मालदीव को आर्थिक सहायता के अतिरिक्त सामरिक स्तर पर भी मदद की पेशकश की, जिससे हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की भूमिका और मजबूत हुई.

फिलीपींस के साथ सैन्य सहयोग

अगस्त की शुरुआत में भारत ने फिलीपींस के राष्ट्रपति की मेजबानी की. इस दौरान फिलीपींस द्वारा भारत से ब्रह्मोस सुपरसोनिक मिसाइल सिस्टम खरीदने पर बातचीत हुई. यह कदम भारत की 'एक्ट ईस्ट पॉलिसी' के तहत पूर्वी एशिया में सामरिक सहयोग को बढ़ाने की दिशा में एक अहम मील का पत्थर माना जा रहा है.

जापान दौरा: सुरक्षा और निवेश को नई धार

अगस्त के अंत में प्रधानमंत्री मोदी जापान पहुंचे, जहाँ उन्होंने वार्षिक भारत-जापान शिखर सम्मेलन में भाग लिया. जापान के साथ भारत के संबंध न केवल निवेश और तकनीक तक सीमित हैं, बल्कि दोनों देशों के बीच रणनीतिक रक्षा सहयोग भी लगातार बढ़ रहा है. इस यात्रा से Indo-Pacific क्षेत्र में भारत की स्थिरता और नेतृत्व क्षमता को और बल मिला.

चीन में SCO शिखर सम्मेलन

जापान से लौटने के बाद प्रधानमंत्री मोदी चीन के लिए रवाना हुए, जहाँ उन्होंने Shanghai Cooperation Organization (SCO) सम्मेलन में हिस्सा लिया. इस दौरान उनकी मुलाकात चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से हुई. इन बैठकों में क्षेत्रीय स्थिरता, सीमा प्रबंधन और सामरिक साझेदारी पर चर्चा हुई. तीनों नेताओं की एक अनौपचारिक तस्वीर भी सामने आई, जिसने सोशल मीडिया पर खूब सुर्खियाँ बटोरीं.

एक्ट ईस्ट नीति: सिंगापुर की भूमिका

चीन से लौटने के बाद पीएम मोदी ने सिंगापुर के प्रधानमंत्री की भारत में मेजबानी की. सिंगापुर, भारत की Act East Policy का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है, और दोनों देशों के बीच फिनटेक, डिजिटल इनोवेशन और समुद्री सहयोग जैसे विषयों पर समझौते हुए.

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