पीएम मोदी ने भारत रत्न लालकृष्ण आडवाणी से की मुलाकात, जन्मदिन की दी बधाई

PM Modi Meet Lal Krishna Advani: भारतीय राजनीति के दिग्गज और भारत रत्न लालकृष्ण आडवाणी आज अपना 98वां जन्मदिन मना रहे हैं. इस खास मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दिल्ली स्थित उनके आवास पहुंचे और उन्हें फूलों का गुलदस्ता भेंट कर जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं.

PM Modi met Bharat Ratna Lal Krishna Advani wished him on his birthday
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PM Modi Meet Lal Krishna Advani: भारतीय राजनीति के दिग्गज और भारत रत्न लालकृष्ण आडवाणी आज अपना 98वां जन्मदिन मना रहे हैं. इस खास मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दिल्ली स्थित उनके आवास पहुंचे और उन्हें फूलों का गुलदस्ता भेंट कर जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं. पीएम मोदी ने आडवाणी की फोटो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर शेयर कर उन्हें उनके समर्पित राजनीतिक जीवन के लिए सराहा.

प्रधानमंत्री मोदी ने आडवाणी को एक दूरदर्शी और बुद्धिमान नेता बताते हुए लिखा कि उनका जीवन हमेशा भारत की प्रगति और लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए समर्पित रहा. उन्होंने आडवाणी के योगदान को भारतीय राजनीति और संस्कृति पर अमिट छाप छोड़ने वाला बताया और उनकी उत्तम स्वास्थ्य व लंबी उम्र की कामना की.

अमित शाह ने भी जताया सम्मान

गृह मंत्री अमित शाह ने भी लालकृष्ण आडवाणी को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं दीं. उन्होंने लिखा कि भाजपा के संस्थापक सदस्य, पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष और करोड़ों कार्यकर्ताओं के प्रेरणास्रोत आडवाणी का जीवन निष्ठा और समर्पण की मिसाल है. शाह ने उनके योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि संगठन से लेकर सरकार तक, उनका हर कदम राष्ट्र प्रथम के सिद्धांत पर आधारित रहा.

आडवाणी ने पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में भाजपा को गांव की चौपालों से लेकर महानगरों तक मजबूत किया और गृह मंत्री रहते हुए देश की सुरक्षा को सुदृढ़ किया. श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन में भी उनका नेतृत्व और रथ यात्रा के माध्यम से जनजागरण देशभर में यादगार रहा.

कराची से दिल्ली तक, एक प्रेरणादायक यात्रा

8 नवंबर 1927 को कराची (अब पाकिस्तान) में जन्मे लालकृष्ण आडवाणी का बचपन देश के विभाजन की त्रासदी के बीच बीता. विभाजन के समय वे दिल्ली आ गए. सेंट पैट्रिक स्कूल, कराची और बॉम्बे लॉ कॉलेज से शिक्षा प्राप्त करने वाले आडवाणी किशोरावस्था में ही राष्ट्रसेवा से जुड़े.

महज 14 साल की उम्र में वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े और फिर पत्रकारिता के क्षेत्र में कदम रखा. साप्ताहिक ऑर्गनाइजर में सह-संपादक के रूप में काम करते हुए उन्होंने भारतीय राजनीति की बारीकियों को समझा और अपने विचारशील नेतृत्व को तराशा. यही अनुभव उन्हें बाद में भारतीय राजनीति के विचारवान और दूरदर्शी नेता के रूप में स्थापित करने में सहायक हुआ.

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