पूर्वी यूक्रेन के पोक्रोव्स्क शहर पर रूस का नियंत्रण स्थापित करने का प्रयास युद्ध का निर्णायक मोड़ बन गया है. करीब 21 महीनों से जारी संघर्ष अब चरम पर पहुंच चुका है. यह शहर पहले एक महत्वपूर्ण लॉजिस्टिक हब माना जाता था, जो डोनेत्स्क, कोस्त्यांतिनिव्का, जापोरिजिया और डिनीप्रो जैसी प्रमुख जगहों से जुड़ा हुआ है.
हालांकि अब रणनीतिक महत्व कम हो गया है, लेकिन राजनीतिक और प्रतीकात्मक महत्व बढ़ गया है. विशेषज्ञों का कहना है कि यदि रूस पोक्रोव्स्क पर कब्जा करता है, तो यह पूरी दुनिया में उसकी ताकत और स्थायित्व का प्रतीक होगा.
घेराबंदी और शहरी युद्ध की गंभीर स्थिति
यूक्रेनी सैनिकों के अनुसार, शहर के चारों ओर रूसी बलों ने घेराबंदी कड़ी कर दी है. शहर के भीतर लगातार गोलीबारी, शहरी युद्ध और ड्रोन हमले जारी हैं. यूक्रेनी कमांडरों का कहना है कि रूस बड़े समूहों में आगे बढ़ रहा है, और जबकि कई सैनिक ड्रोन हमलों में नष्ट हो रहे हैं, कुछ समूह शहर तक पहुंचने में सफल हो रहे हैं.
यूक्रेनी सेना के लिए चुनौती तब और बढ़ जाती है जब उनके पास पर्याप्त सैनिक और बख्तरबंद वाहन उपलब्ध नहीं हैं. शहर में अब केवल 1,200 नागरिक ही बचे हैं, जबकि अन्य सुरक्षित स्थानों की ओर चले गए हैं.
रूस की प्रतीकात्मक जीत
विशेषज्ञों का मानना है कि पोक्रोव्स्क पर कब्जा सैन्य दृष्टि से कोई बड़ा लाभ नहीं देगा. अमेरिकी थिंक टैंक Institute for the Study of War के शोधकर्ता जॉर्ज बैरोस के अनुसार, यह जीत मुख्य रूप से राजनीतिक और प्रचारात्मक होगी. रूस इसे अपनी सैन्य क्षमता और अंतरराष्ट्रीय प्रभाव दिखाने के लिए एक बड़ी उपलब्धि के रूप में पेश करेगा.
यूक्रेन के लिए मनोवैज्ञानिक चुनौती
रूस ने इस क्षेत्र में लगभग 1,70,000 सैनिक तैनात कर दिए हैं. यूक्रेनी सेना का मनोबल इस दबाव से प्रभावित है. एक यूक्रेनी सैनिक ने बताया कि शहर को बचाने के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं हैं और पीछे हटने का आदेश नहीं मिला, जबकि अधिकांश जानते हैं कि शहर का पतन लगभग तय है.
विश्लेषकों के अनुसार, पुतिन इस जीत को डोनेत्स्क और लुहांस्क क्षेत्र में पूर्ण नियंत्रण स्थापित करने की दिशा में एक राजनीतिक प्रतीक के रूप में पेश करना चाहते हैं. यूक्रेनी पक्ष के लिए यह संघर्ष भारी जानहानि और संसाधनों की कमी के बीच एक कठिन मोड़ बन गया है.
पोक्रोव्स्क का लॉजिस्टिक और रणनीतिक महत्व
पोक्रोव्स्क डोनबास क्षेत्र का प्रमुख सप्लाई और ट्रांसपोर्ट हब है. यहां से पूर्वी मोर्चे पर हथियारों, सैनिकों और रसद की आपूर्ति होती है. अगर रूस इस शहर पर कब्जा करता है, तो वह आसपास के प्रमुख शहरों जैसे कुरामाटोर्स्क, स्लोवियान्स्क, कोस्त्यांतिनिव्का और द्रुज़किव्का पर और दबाव डाल पाएगा.
ओं की चुनौती
यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने पहले अमेरिकी नेतृत्व से चीन पर दबाव डालने की अपील की थी, ताकि वह रूस को सीधे मदद न करे. हालांकि अमेरिकी और चीनी नेताओं के बीच हालिया बैठक में युद्ध कोई प्रमुख एजेंडा नहीं था, और कारोबारी मुद्दों पर ही ध्यान केंद्रित रहा.
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