दिल्ली में इस बार भव्यता से छठ पूजा मनाने की तैयारी, 1000 से अधिक घाटों का किया जा रहा निर्माण

Chhath Ghat in Delhi: सूर्य उपासना और लोक आस्था का सबसे बड़ा पर्व छठ पूजा, अब सिर्फ बिहार और पूर्वांचल तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे देश की सांस्कृतिक एकता का प्रतीक बन चुका है.

preparations are being made to celebrate Chhath Puja grandly in Delhi 1000 ghats being constructed
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Chhath Ghat in Delhi: सूर्य उपासना और लोक आस्था का सबसे बड़ा पर्व छठ पूजा, अब सिर्फ बिहार और पूर्वांचल तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे देश की सांस्कृतिक एकता का प्रतीक बन चुका है. राजधानी दिल्ली में भी इसकी भव्यता इस बार नई ऊंचाई छूने जा रही है. यमुना के किनारों से लेकर मोहल्लों तक, दिल्ली सरकार ने छठ पूजा के लिए ऐतिहासिक स्तर की तैयारियों का दावा किया है. मंत्री प्रवेश वर्मा के मुताबिक, इस बार की छठ पूजा “पहले से कहीं ज्यादा भव्य, संगठित और सुरक्षित” होगी.

मंत्री प्रवेश वर्मा ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि दिल्ली में छठ पूजा के आयोजन को लेकर पहले की सरकारें सिर्फ राजनीति करती थीं, लेकिन इस बार सरकार ने इसे श्रद्धा और सुविधा के मेल से जोड़ दिया है. उन्होंने कहा, “हमारी सरकार ने न केवल 1000 से अधिक छठ घाटों का निर्माण कराया है, बल्कि यमुना किनारे 17 विशेष मॉडल घाट भी बनाए जा रहे हैं जो भव्यता और परंपरा का प्रतीक होंगे. हर घाट पर स्वच्छता, सुरक्षा और प्रकाश व्यवस्था के विशेष इंतजाम किए गए हैं.”

वर्मा ने आगे कहा, “छठ पूजा अब दिल्ली के ताने-बाने का हिस्सा बन गई है. यह सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि मातृशक्ति और भारतीय संस्कृति के प्रति सम्मान का प्रतीक है. आने वाले वर्षों में हम इसे और बड़े स्तर पर मनाएंगे.”

यमुना तट पर बन रहे मॉडल घाट

इस बार दिल्ली सरकार ने यमुना के तटों को एक “सांस्कृतिक उत्सव” के रूप में तैयार किया है. यहां सैकड़ों अस्थायी घाटों के साथ-साथ 17 मॉडल घाटों को विशेष थीम पर सजाया जा रहा है. इन घाटों को इस तरह डिजाइन किया गया है कि श्रद्धालु न केवल पूजा कर सकें, बल्कि आरामदायक माहौल में पूरे परिवार के साथ पर्व का आनंद भी उठा सकें.

हर घाट पर सुरक्षा के लिए पुलिस बल, एनडीआरएफ की टीम, मेडिकल कैंप और स्वच्छता कर्मी तैनात किए गए हैं. दिल्ली सरकार ने कहा है कि इस बार यमुना तट पर कोई भी श्रद्धालु असुविधा में नहीं रहेगा.

संस्कृति और परंपरा का संगम

लगभग 200 घाटों पर सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, जिनमें भोजपुरी लोकगीत, पारंपरिक नृत्य और लोक संगीत के माध्यम से छठ महापर्व की सांस्कृतिक आत्मा को जीवंत किया जाएगा. कार्यक्रमों में दिल्ली और पूर्वांचल के प्रसिद्ध कलाकार भाग ले रहे हैं.

सरकार का कहना है कि यह केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सांस्कृतिक एकता और पूर्वांचली विरासत का उत्सव है. दिल्ली अब उस दिशा में बढ़ रही है जहाँ परंपरा और आधुनिकता एक साथ कदम बढ़ा रही हैं.

नेताओं की शुभकामनाएं और जनता की आस्था

भाजपा सांसद बांसुरी स्वराज ने भी एक्स (पूर्व ट्विटर) पर छठ पर्व की शुभकामनाएं दीं. उन्होंने लिखा, “लोक आस्था और सूर्य उपासना के महापर्व छठ पूजा के प्रथम अनुष्ठान ‘नहाय-खाय’ की सभी श्रद्धालु व्रतिन बहनों को हार्दिक मंगलकामनाएं. सूर्य देव और छठी मईया की कृपा से प्रत्येक परिवार के जीवन में सुख, शांति, आरोग्य और समृद्धि का उदय हो.”

दिल्ली के कई इलाकों, लक्ष्मी नगर, पालम, द्वारका, गीता कॉलोनी, और आईटीओ में सुबह से ही घाटों की सजावट, पंडालों की तैयारी और सफाई अभियान चल रहा है.

“छठ सिर्फ एक पर्व नहीं, एक भावनात्मक जुड़ाव है”

छठ पूजा उत्तर भारत के उन पर्वों में से है, जो भक्ति और तपस्या के साथ-साथ समाज को एकजुट करने की प्रेरणा देता है. दिल्ली में बसे लाखों पूर्वांचली परिवार इस पर्व को अपनी जड़ों से जुड़ाव और पहचान के रूप में मनाते हैं.

इस बार दिल्ली सरकार की तैयारियां और जनता का उत्साह देखकर साफ है कि राजधानी सिर्फ राजनीतिक केंद्र नहीं, बल्कि संस्कृति और आस्था की नई राजधानी बनती जा रही है.

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