अफ्रीका में भारत की नई कूटनीतिक पहल, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की ऐतिहासिक अंगोला यात्रा

भारत और अफ्रीका के रिश्ते सदियों पुराने हैं, लेकिन अब यह संबंध एक नए रणनीतिक मोड़ पर पहुंच रहे हैं. इसी दिशा में भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू शनिवार रात अपनी पहली राजकीय यात्रा पर अंगोला पहुंचीं, जहां उनका पारंपरिक और भव्य स्वागत किया ग

President murmu angola visit will talk in this points
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भारत और अफ्रीका के रिश्ते सदियों पुराने हैं, लेकिन अब यह संबंध एक नए रणनीतिक मोड़ पर पहुंच रहे हैं. इसी दिशा में भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू शनिवार रात अपनी पहली राजकीय यात्रा पर अंगोला पहुंचीं, जहां उनका पारंपरिक और भव्य स्वागत किया गया. यह किसी भी भारतीय राष्ट्राध्यक्ष की अंगोला की पहली आधिकारिक यात्रा है, जो भारत और अफ्रीका के बीच गहराते रिश्तों की एक ऐतिहासिक मिसाल बन गई है.


राष्ट्रपति भवन के अनुसार, यह दौरा भारत की उस नीति का हिस्सा है जिसके तहत वैश्विक दक्षिण (Global South) के देशों. खासतौर पर अफ्रीकी देशों — के साथ राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का प्रयास किया जा रहा है. विदेश मंत्रालय के आर्थिक संबंध सचिव सुधाकर दलेला ने प्रेस वार्ता में कहा कि यह यात्रा भारत की “विकास साझेदारी मॉडल” को और सशक्त करेगी. उन्होंने कहा, “अफ्रीका के साथ हमारी साझेदारी केवल व्यापारिक नहीं, बल्कि जन-केंद्रित है. यह साझेदारी विकास, प्रौद्योगिकी और मानवीय सहयोग पर आधारित है.”

अंगोला में राष्ट्रपति मुर्मू की व्यस्त कूटनीतिक दिनचर्या

राष्ट्रपति मुर्मू अपने अंगोला दौरे के दौरान राष्ट्रपति जोआओ लौरेंको के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगी. दोनों नेताओं के बीच रक्षा सहयोग, ऊर्जा सुरक्षा, फार्मास्यूटिकल उद्योग और शिक्षा जैसे अहम विषयों पर चर्चा होगी. इसके अलावा, वह 11 नवंबर को अंगोला की स्वतंत्रता की 50वीं वर्षगांठ समारोह में शामिल होंगी और अंगोलन संसद को संबोधित करेंगी  जो किसी भारतीय राष्ट्राध्यक्ष के लिए एक और ऐतिहासिक क्षण होगा. साथ ही, राष्ट्रपति मुर्मू भारतीय समुदाय के सदस्यों से मुलाकात करेंगी और अंगोला में भारत की विकास परियोजनाओं की प्रगति का भी जायजा लेंगी.

बोत्सवाना से चीतों के स्थानांतरण पर बातचीत

विदेश मंत्रालय के अनुसार, इस यात्रा का एक विशेष पहलू ‘प्रोजेक्ट चीता’ से जुड़ा है. भारत और बोत्सवाना के बीच चीतों के स्थानांतरण को लेकर चर्चाएं चल रही हैं. यह पहल भारत के पर्यावरण संरक्षण और वन्यजीव पुनर्स्थापन के प्रति गंभीर प्रतिबद्धता को दर्शाती है. गौरतलब है कि भारत ने पिछले वर्षों में नामीबिया से चीतों को मध्यप्रदेश के कुनो नेशनल पार्क में बसाया था, और अब बोत्सवाना के साथ भी इसी दिशा में समझौते की उम्मीद है.

राष्ट्रपति मुर्मू का बोत्सवाना दौरा

अंगोला के बाद राष्ट्रपति मुर्मू 11 से 13 नवंबर तक बोत्सवाना की यात्रा करेंगी. यह दौरा बोत्सवाना के राष्ट्रपति ड्यूमा गिदोन बोको के निमंत्रण पर हो रहा है. बोत्सवाना में राष्ट्रपति मुर्मू व्यापार, निवेश, ऊर्जा, कृषि, स्वास्थ्य, रक्षा और डिजिटल प्रौद्योगिकी सहयोग जैसे विषयों पर बातचीत करेंगी. वह बोत्सवाना की राष्ट्रीय सभा को संबोधित करेंगी और वहां के ऐतिहासिक व सांस्कृतिक स्थलों का भी दौरा करेंगी.

अफ्रीका के साथ भारत के रिश्ते: एक नई ऊंचाई

पिछले कुछ वर्षों में भारत-अफ्रीका संबंधों में अभूतपूर्व प्रगति हुई है. भारत ने अफ्रीकी देशों के साथ डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, शिक्षा, खनिज संपदा, ऊर्जा परिवर्तन और क्षमता निर्माण के क्षेत्रों में मजबूत साझेदारी स्थापित की है.भारत आज अफ्रीका के सबसे भरोसेमंद विकास भागीदारों में से एक बन चुका है. नई दिल्ली की "अफ्रीका फोकस नीति" का मकसद न केवल व्यापार बढ़ाना है, बल्कि लोगों के बीच संस्कृतिक और सामाजिक पुल बनाना भी है.

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