'डोनाल्ड ट्रंप रूस के एजेंट हैं', इस देश के राष्ट्रपति ने अमेरिका पर साधा निशाना, जानें क्या कहा

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय आलोचनाओं के घेरे में हैं.

President of Portugal said- Donald Trump is an agent of Russia
प्रतिकात्मक तस्वीर/ Sociel Media

लिस्बन: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय आलोचनाओं के घेरे में हैं. इस बार उन पर गंभीर आरोप लगाए हैं पुर्तगाल के राष्ट्रपति मार्सेलो रेबेलो डी सूसा ने, जिन्होंने ट्रंप को 'रूसी एजेंट' तक करार दे दिया है. पुर्तगाली राष्ट्रपति के इस बयान ने न केवल अमेरिकी राजनीति में हलचल मचा दी है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर अमेरिका की भूमिका और नीतियों पर भी बहस छेड़ दी है.

राष्ट्रपति सूसा पुर्तगाल में आयोजित पीएसडी समर यूनिवर्सिटी में एक प्रमुख संबोधन के दौरान बोल रहे थे. अपने भाषण में उन्होंने बिना किसी लाग-लपेट के कहा, "दुनिया की सबसे बड़ी महाशक्ति का नेता, असल में एक सोवियत या रूसी संपत्ति (एसेट) की तरह काम कर रहा है. वह एक एजेंट की भूमिका में है, चाहे वह प्रत्यक्ष हो या अप्रत्यक्ष."

इस बयान ने न केवल ट्रंप समर्थकों को चौंकाया, बल्कि यह भी स्पष्ट कर दिया कि यूरोप के कुछ शीर्ष नेता अमेरिकी नेतृत्व को लेकर कितने चिंतित और संशय में हैं, खासकर जब वह नेतृत्व डोनाल्ड ट्रंप के हाथों में हो.

यूक्रेन संकट पर ट्रंप की भूमिका की आलोचना

राष्ट्रपति सूसा ने यूक्रेन-रूस संघर्ष के संदर्भ में भी ट्रंप की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि ट्रंप द्वारा युद्ध को समाप्त करने के प्रयास निरर्थक साबित हुए हैं और उन्होंने यूक्रेन को कोई ठोस मदद नहीं पहुंचाई.

सूसा ने कहा, "ट्रंप जिस तरह यूक्रेन में शांति स्थापना का दावा कर रहे हैं, असल में वह रूसी पक्ष को ही मजबूत कर रहा है. उनके प्रयासों से यूक्रेनी पक्ष की स्थिति कमजोर हो रही है."

उन्होंने यह भी जोड़ा कि अमेरिका का नेतृत्व, विशेष रूप से ट्रंप जैसे नेता, जब मध्यस्थ की भूमिका में आने का प्रयास करते हैं, तो वे केवल एक पक्ष यानी रूस से संवाद करते हैं, जो कि निष्पक्ष कूटनीति के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है.

'सिर्फ धमकियां, कोई ठोस कार्रवाई नहीं'

पुर्तगाली राष्ट्रपति ने ट्रंप पर यह भी आरोप लगाया कि उन्होंने रूस के खिलाफ कठोर प्रतिबंधों की सिर्फ धमकी दी, लेकिन व्यवहारिक तौर पर कोई सख्त कदम नहीं उठाया. उन्होंने कहा, "हर दिन रूस के खिलाफ प्रतिबंधों की भयंकर धमकियां दी जाती हैं, लेकिन क्या इन पर कभी अमल हुआ? नहीं. ट्रंप प्रशासन के दौरान रूस के खिलाफ कोई ठोस प्रतिबंध नहीं लगाए गए."

यह टिप्पणी उन व्यापक आलोचनाओं की गूंज है जो पहले भी ट्रंप पर लगती रही हैं कि वे रूस के प्रति नरम रुख अपनाते हैं और कई बार अमेरिकी खुफिया एजेंसियों की राय के विपरीत बयान देते रहे हैं.

यूरोप की चूक और ट्रंपवाद का असर

राष्ट्रपति सूसा ने यह भी स्वीकार किया कि यूरोपीय नेताओं ने ट्रंप और उनके विचारों को कम करके आंका. उन्होंने कहा कि ट्रंपवाद को गंभीरता से नहीं लेने की वजह से आज यूरोप को रणनीतिक मोर्चों पर नुकसान झेलना पड़ रहा है. उन्होंने कहा, "यूरोप ने सोचा ही नहीं था कि ट्रंप जैसा व्यक्ति फिर से वैश्विक मंच पर प्रभावशाली हो सकता है. उन्होंने यह मान लिया था कि अमेरिका की राजनीति स्थिर रहेगी, लेकिन यह एक बड़ी भूल थी."

सूसा ने चेताया कि अगर ट्रंप जैसे नेताओं का प्रभाव यूं ही बढ़ता रहा तो इससे वैश्विक शक्ति संतुलन अस्थिर हो सकता है और लोकतांत्रिक मूल्यों को गहरा नुकसान पहुंच सकता है.

क्या ट्रंप रूस के लिए सॉफ्ट पावर हैं?

हालांकि सूसा ने सीधे तौर पर ट्रंप को रूस का एजेंट कहने से ज्यादा संकेतात्मक भाषा में बात की, लेकिन उनका तात्पर्य स्पष्ट था- ट्रंप की नीतियां और उनके बयान अकसर रूस के हित में जाते हैं, जिससे अमेरिका की पारंपरिक विदेश नीति की विश्वसनीयता पर सवाल उठता है.

ट्रंप की पिछली राष्ट्रपति अवधि के दौरान भी यह मुद्दा कई बार उठा कि वह व्लादिमीर पुतिन के प्रति असामान्य रूप से नरम रहे. उन्होंने बार-बार NATO की आलोचना की, अमेरिका के पारंपरिक सहयोगियों को अपमानित किया, और रूस के साथ संबंध सुधारने की बात करते रहे.

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