नई दिल्ली: प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) का नाम अब बदलकर 'सेवा तीर्थ' रख दिया गया है, और यह बदलाव सरकार के प्रशासनिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण में एक नया अध्याय जोड़ने के लिए किया गया है. दशकों से दिल्ली के दक्षिण ब्लॉक में संचालित यह कार्यालय अब नए, सुरक्षित और आधुनिक परिसर में शिफ्ट होने की तैयारी में है. यह बदलाव केवल एक नाम परिवर्तन नहीं, बल्कि सरकार के कर्तव्य और सेवा की भावना को दर्शाता है.
नई इमारतों में होगा PMO का कामकाज
'सेवा तीर्थ' परिसर में कुल तीन हाई-टेक इमारतें बनाई गई हैं, जो आधुनिकता और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए डिज़ाइन की गई हैं. सेवा तीर्थ-1 में प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) स्थित होगा, जबकि सेवा तीर्थ-2 में कैबिनेट सचिवालय और सेवा तीर्थ-3 में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) का कार्यालय शिफ्ट किया जाएगा.
कैबिनेट सचिव और सेना प्रमुखों के साथ बैठक
14 अक्टूबर 2025 को कैबिनेट सचिव टी.वी. सोमनाथन ने सेवा तीर्थ-2 में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ और तीनों सेना प्रमुखों के साथ उच्च स्तरीय बैठक की. यह बैठक नए परिसर के औपचारिक उद्घाटन की शुरुआत मानी जा रही है. इससे यह संकेत मिलता है कि सरकार ने इस स्थानांतरण प्रक्रिया को तेज़ी से लागू करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं.
हाई-टेक इमारतें और आधुनिक सुरक्षा व्यवस्था
नई इमारतों को अत्याधुनिक सुरक्षा और संचार प्रणाली से लैस किया गया है. इन इमारतों में इंटेलिजेंस-प्रूफ तकनीक का इस्तेमाल किया गया है ताकि सरकारी कामकाज में सुरक्षा की कोई भी कसर न छोड़ी जाए. यह बदलाव सरकार के बड़े प्रशासनिक पुनर्गठन और केंद्रीय सचिवालय के एकीकरण की योजना का हिस्सा माना जा रहा है, जो अधिक संगठित और प्रभावी शासन की ओर इशारा करता है.
लोक भवन के रूप में बदला राज्यपाल निवास का नाम
राज्यपालों के आधिकारिक आवास 'राजभवन' का नाम भी बदलकर 'लोक भवन' रखा जा रहा है. अधिकारियों के मुताबिक, यह बदलाव केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और नैतिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है. यह परिवर्तन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में शासन के क्षेत्र में 'कर्तव्य' और 'पारदर्शिता' की ओर बढ़ते कदम को दर्शाता है.
सरकार के द्वारा किए गए अन्य नाम परिवर्तन
सरकार ने हाल ही में 'राजपथ' का नाम बदलकर 'कर्तव्य पथ' कर दिया था, जो एक गहरे वैचारिक परिवर्तन को दर्शाता है. इसके साथ ही, प्रधानमंत्री के आधिकारिक आवास का नाम 2016 में बदलकर 'लोक कल्याण मार्ग' किया गया था, ताकि यह जनता की भलाई और सेवा के प्रतीक के रूप में सामने आए. इसके अतिरिक्त, केन्द्रीय सचिवालय का नाम अब 'कर्तव्य भवन' रखा गया है, जो प्रशासनिक केंद्र के रूप में जनता की सेवा में एक प्रतिबद्धता का प्रतीक है.
नामों में बदलाव, मानसिकता में बदलाव
अधिकारियों ने कहा कि इन नामों का बदलाव केवल प्रतीक नहीं है, बल्कि यह हमारे समाज और सरकार की मानसिकता में बदलाव का प्रतीक है. आज, इन बदलावों के माध्यम से सरकार सेवा, कर्तव्य और नागरिक-प्रथम शासन की भाषा बोल रही है. यह बदलाव दर्शाता है कि भारतीय लोकतंत्र ने अब 'सत्ता' के बजाय 'जिम्मेदारी' और 'पद' के बजाय 'सेवा' को प्राथमिकता दी है.
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