पुतिन के जिस जिगरी दोस्त से मिलना चाहते थे ट्रंप, उसने पहले ही दे दिया संदेश; दाग दी खतरनाक क्रूज मिसाइल

North Korea Cruise Missile: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का एशियाई दौरा उस वक्त चर्चा में आ गया जब उन्होंने दक्षिण कोरिया की जमीन पर कदम भी नहीं रखा था और उत्तर कोरिया ने क्रूज मिसाइलों की बौछार कर दी.

Putin best friend kim jong un Trump wanted to meet Fired dangerous cruise missile
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North Korea Cruise Missile: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का एशियाई दौरा उस वक्त चर्चा में आ गया जब उन्होंने दक्षिण कोरिया की जमीन पर कदम भी नहीं रखा था और उत्तर कोरिया ने क्रूज मिसाइलों की बौछार कर दी.

ट्रंप की इस यात्रा का मक़सद जहां एशिया में अमेरिकी कूटनीति को नई दिशा देना और चीन के साथ व्यापारिक समीकरण साधना था, वहीं प्योंगयांग ने अपने मिसाइल परीक्षण के जरिए यह साफ़ कर दिया कि कोरियाई प्रायद्वीप में शांति अब भी दूर की कौड़ी है.

एशिया दौरे का आखिरी पड़ाव, सियोल पहुंचने से पहले ही तनाव

ट्रंप अपने एशियाई दौरे पर पहले मलेशिया पहुंचे, जहां उन्होंने आसियान बैठक में भाग लिया और क्षेत्रीय देशों से सहयोग की बात की. इसके बाद वे जापान की नई प्रधानमंत्री से मिलने टोक्यो गए.

अब यात्रा के अंतिम चरण में वे दक्षिण कोरिया में हैं, जहां वे एपेक शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात करने वाले हैं. इस बैठक में दोनों नेताओं के बीच व्यापारिक समझौते और रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाने को लेकर बातचीत होने की उम्मीद है. लेकिन सियोल पहुंचने से ठीक पहले ही, उत्तर कोरिया ने समुद्र से सतह पर मार करने वाली क्रूज मिसाइलों का परीक्षण कर माहौल गरमा दिया.

7800 सेकंड तक आसमान में घूमीं मिसाइलें

उत्तर कोरिया की सरकारी एजेंसी कोरिया सेंट्रल न्यूज एजेंसी (KCNA) के मुताबिक, मिसाइलों को वर्टिकल लॉन्चर से दागा गया था. ये मिसाइलें करीब 2 घंटे यानी 7800 सेकंड तक उड़ान भरती रहीं और अपने निर्धारित लक्ष्यों को सटीकता से भेदा. परीक्षण की निगरानी सेना के शीर्ष अधिकारी पाक जोंग चोन ने की.

दिलचस्प बात यह है कि पिछले हफ्ते ही उत्तर कोरिया ने हाइपरसोनिक मिसाइलों का परीक्षण किया था, जिसने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा था. हालांकि, इन दोनों मौकों पर तानाशाह किम जोंग उन की मौजूदगी की पुष्टि नहीं हुई, जबकि वे आमतौर पर ऐसे कार्यक्रमों में खुद मौजूद रहते हैं.

ट्रंप की “शांति पेशकश” पर नॉर्थ कोरिया का बारूदी जवाब

यह घटना इसलिए और अहम है क्योंकि अपने दूसरे कार्यकाल में ट्रंप पहली बार कोरियाई प्रायद्वीप पहुंचे हैं. उन्होंने टोक्यो जाते वक्त पत्रकारों से कहा था कि अगर किम जोंग उन तैयार हों, तो वे उनसे फिर मिलना चाहेंगे, यहां तक कि उन्होंने प्रतिबंधों में ढील की बात भी कही थी.

लेकिन नॉर्थ कोरिया की मिसाइल लॉन्च ने इस संभावना को लगभग खत्म कर दिया. विश्लेषक मानते हैं कि यह परीक्षण एक राजनयिक संदेश है, कि प्योंगयांग अब भी वाशिंगटन की शर्तों पर बातचीत करने के मूड में नहीं है, खासकर तब जब किम जोंग उन रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ अपने रिश्तों को और गहरा कर रहे हैं.

2019 की याद और मौजूदा सन्नाटा

साल 2019 में अपने पहले कार्यकाल के दौरान ट्रंप ने डिमिलिटराइज्ड ज़ोन (DMZ) में किम जोंग उन से ऐतिहासिक मुलाकात की थी, जिसे “शांति की उम्मीद” के रूप में देखा गया था. लेकिन इस बार, न तो प्योंगयांग से कोई प्रतिक्रिया आई, न ही किसी तरह की वार्ता की संभावना जताई गई है.

उत्तर कोरिया के इस मिसाइल परीक्षण ने साफ कर दिया है कि ट्रंप का एशियाई दौरा जहां कूटनीतिक साझेदारी की मजबूती के लिए है, वहीं उत्तर कोरिया ने इसे अमेरिकी दबाव के खिलाफ शक्ति प्रदर्शन में बदल दिया है.

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