रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने वैश्विक मंच से एक बार फिर पश्चिमी देशों, खासकर अमेरिका और यूरोप, पर तीखा हमला बोला है. एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने भारत की विदेश नीति और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नेतृत्व क्षमता की खुलकर सराहना की. उन्होंने साफ तौर पर कहा कि अमेरिका द्वारा भारत पर लगाए गए अतिरिक्त टैरिफ का कोई असर नहीं पड़ेगा और यह रणनीति अंततः विफल होगी.
पुतिन ने कहा कि भारत और चीन जैसे देश आत्मनिर्भर और स्वाभिमानी हैं. उन्होंने कहा, भारतीय लोग कभी अपमान नहीं सहते. मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को व्यक्तिगत रूप से जानता हूं. वह कभी भी अपने देश की संप्रभुता और हितों से समझौता नहीं करेंगे. यह टिप्पणी उस समय आई है जब अमेरिका ने रूस से तेल खरीदने को लेकर भारत पर 25% अतिरिक्त टैरिफ लगा दिया है, जिससे कुल टैरिफ 50% हो गया है. अमेरिका का आरोप है कि भारत रूस से ऊर्जा खरीद कर यूक्रेन युद्ध को अप्रत्यक्ष समर्थन दे रहा है. हालांकि भारत का रुख स्पष्ट है. वह अपने नागरिकों के हितों की सुरक्षा के लिए किसी भी रणनीतिक साझेदारी से पीछे नहीं हटेगा.
NATO और यूरोपीय देशों पर करारा प्रहार
पुतिन ने वाल्दई डिस्कशन क्लब के एक आयोजन में यूरोपीय नेताओं को भी नहीं बख्शा. उन्होंने यूरोपीय देशों पर ‘युद्ध उन्माद’ फैलाने का आरोप लगाया और कहा कि NATO के खतरे का हौवा जानबूझकर खड़ा किया जा रहा है. NATO पर रूस के हमले की बात पूरी तरह से झूठ और बेबुनियाद है. हमने दो बार NATO की सदस्यता के लिए आवेदन दिया था, लेकिन हमें नजरअंदाज कर दिया गया. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर यूरोप ने रूस को उकसाया, तो जवाब ‘कड़ा और निर्णायक’ होगा. विशेष रूप से जर्मनी की सैन्य ताकत को लेकर चल रही चर्चाओं पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि रूस यूरोप के बढ़ते सैन्यीकरण को लेकर सतर्क है.
रूस की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं
पुतिन ने अपनी बात को स्पष्ट करते हुए कहा कि रूस कभी भी सैन्य टकराव की शुरुआत नहीं करता, लेकिन यदि उसकी संप्रभुता, नागरिकों की सुरक्षा और अस्तित्व को खतरा हुआ, तो प्रतिक्रिया त्वरित और कठोर होगी."हमें उकसाओगे तो जवाब मिलेगा — और ऐसा जवाब जिसे इतिहास याद रखेगा," उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा. उन्होंने यह भी जोड़ा कि रूस की कमजोरी दिखाना खतरनाक होगा क्योंकि इससे विरोधी ग़लतफहमी में पड़ सकते हैं कि दबाव डालकर रूस को झुकाया जा सकता है.
अमेरिका और ट्रंप पर टिप्पणी
यूक्रेन युद्ध के मुद्दे पर बोलते हुए पुतिन ने कहा कि यदि डोनाल्ड ट्रंप अमेरिका के राष्ट्रपति होते, तो शायद युद्ध की नौबत नहीं आती. उन्होंने ट्रंप की मध्य पूर्व में की गई पहलों को ‘उम्मीद की किरण’ बताया और यूक्रेन युद्ध को एक मानवीय त्रासदी करार दिया.
पश्चिमी देशों के दोहरे मापदंड
रूसी राष्ट्रपति ने पश्चिमी नेताओं पर जानबूझकर रूस को "काल्पनिक दुश्मन" बनाने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि यूरोपीय नागरिक खुद नहीं समझ पा रहे कि ऐसा कौन सा खतरा है जिससे निपटने के लिए उन्हें अपनी ही जनता के हितों की बलि देनी पड़ रही है. "क्या यूरोप के नेता सच में मानते हैं कि रूस हमला करने वाला है, या वे जानबूझकर अपने नागरिकों को डराकर राजनीतिक एजेंडा चला रहे हैं?"
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